मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन में पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा सप्ताह के चौथे दिन भगवान के विभिन्न अवतारों और श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया गया। सोमवार 28 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक आयोजित कथा में कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को भगवान के अवतारों की कथा सुनाई।

वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने धर्म की अवधारणा और उसके महत्व पर भी विचार रखे।

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धर्म की स्थापना के लिए भगवान के अवतार

कथा के दौरान स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने कहा कि जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब भगवान आवश्यकता के अनुसार अपनी माया शक्ति धारण कर अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं।

उन्होंने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म वह है जो धारण करे। उनके अनुसार मानव मात्र को एक सूत्र में बांधने वाला तथा व्यक्ति के कल्याण के साथ विश्वकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला आचरण धर्म कहलाता है।

स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान श्रीकृष्ण प्रमुख रूप से प्रतिपादित हैं। उन्होंने कृष्ण के जन्म, कर्म और लीलाओं के तत्व को समझने की महत्ता बताई। उनके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और जीवन प्रसंगों को समझने से व्यक्ति को जीवन के दुखों से मुक्ति और आनंद की अनुभूति प्राप्त हो सकती है।

व्यास पूजन में श्रद्धालुओं ने लिया भाग

कथा कार्यक्रम के दौरान मुकेश शर्मा, शामली ने व्यास पूजन किया। इस अवसर पर सुशील दत्त, समथरपाल, राजीव शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु और समिति से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

वेदांत सत्संग समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांक सिंघल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि श्रीमद्भागवत पुराण कथा सप्ताह का आयोजन पितृ पक्ष के अवसर पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में श्रद्धालु कथा का श्रवण कर रहे हैं।

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