मुजफ्फरनगर में बुधवार, 23 सितंबर 2026 को संयुक्त सवर्ण समाज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के नियमों के विरोध में पैदल मार्च निकाला। मार्च टाउन हॉल से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। यहां प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर UGC के नियमों पर पुनर्विचार करने और उन्हें वापस लेने की मांग रखी। 23 सितंबर को मार्च निकालने का निर्णय सवर्ण संगठनों की पहले हुई बैठक में लिया गया था।
टाउन हॉल से DM कार्यालय तक मार्च
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने UGC के नए नियमों को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं और शिक्षा व्यवस्था में सभी वर्गों के लिए समान अवसर की मांग की। UGC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, संबंधित नियमों का आधिकारिक नाम ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026’ है। इसे 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित किया गया था।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और समाज के एक हिस्से में असंतोष है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शिकायतों और कार्रवाई की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित हो। ये प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाई गई मांगें और उनके पक्ष की आपत्तियां हैं।
विजय प्रताप सिंह ने किया नेतृत्व
पैदल मार्च का नेतृत्व अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने सरकार से सवर्ण समाज की मांगों पर ध्यान देने की अपील की। हिंदू रक्षा दल के जिलाध्यक्ष शैंकी शर्मा और एडवोकेट शलभ गुप्ता ने भी UGC के नियमों पर पुनर्विचार की मांग रखी।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इससे पहले 2 और 3 सितंबर को हुई बैठकों में आयोजक संगठनों ने UGC के नियमों को वापस लेने के साथ एससी/एसटी संबंधी प्रावधानों और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई थी। इन मांगों को लेकर 23 सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने की घोषणा पहले ही की गई थी।
पुलिस तैनाती के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
विजय प्रताप सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुजफ्फरनगर दौरे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सवर्ण समाज के कुछ नेताओं को ज्ञापन देने से रोकने के लिए उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात की गई और उन्हें करीब 18 घंटे तक नजरबंद रखा गया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है, इसलिए इसे आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के समानता संबंधी विनियम लागू नियमों की सूची में दर्ज हैं।