राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग द्वारा कई प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद हलचल मच गई है। जिन प्रमुख लोगों को नोटिस प्राप्त हुए हैं उनमें आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और स्वयं चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू के नाम शामिल हैं। नोटिस जारी होने के बाद सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में मतदाताओं के नाम कटने की आशंका जताई जाने लगी, जिस पर चुनाव आयोग ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

चुनाव आयोग की सफाई: बिना सुनवाई नहीं कटेगा किसी का नाम

​दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा कि नोटिस जारी होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम दिल्ली की मतदाता सूची से हटाया जा रहा है। आयोग ने कहा कि यह केवल ECINET पोर्टल में डेटा एंट्री से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों को सुधारने की एक तकनीकी प्रक्रिया है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि किसी भी मतदाता को बिना अपनी बात रखने का अवसर दिए और बिना कोई विधिवत आदेश पारित किए मतदाता सूची से निष्कासित नहीं किया जा सकता। नोटिस मिलने वाले नागरिकों को अपने दस्तावेज जमा करने और पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

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क्यों जारी किए गए 33.1 लाख नोटिस?

​मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, दिल्ली के करीब 33.1 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में डेटा विसंगतियां पाई गई हैं, जिसके कारण ये सिस्टम-जनरेटेड नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. 'नो मैपिंग' (Unmapped with Last SIR): इस श्रेणी में उन मतदाताओं को रखा गया है जिनके मौजूदा रिकॉर्ड का वर्ष 2002 या पिछली गहन पुनरीक्षण सूची से मिलान नहीं हो पाया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, उनकी पत्नी और लालकृष्ण आडवाणी के परिजनों का रिकॉर्ड इसी श्रेणी के तहत चिह्नित किया गया है।
  2. तार्किक विसंगतियां (Logical Discrepancies): इस श्रेणी में उन मतदाताओं के नाम शामिल हैं जिनके डेटा में नाम की वर्तनी (स्पेलिंग), माता-पिता के नाम में अंतर, या आयु के अनुपात में कोई तकनीकी त्रुटि पाई गई है। जैसे कि चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू के मामले में फॉर्म में 'डॉ. एस.एस. संधू' और आधिकारिक सूची में 'सुखबीर सिंह संधू' दर्ज होने के कारण नोटिस जनरेट हुआ।

सीएम रेखा गुप्ता के विवरण का सत्यापन पूरा

​प्रारंभिक दौर में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी आयु अंतर से जुड़ी विसंगति के कारण फ्लैग किया गया था। हालांकि, दिल्ली निर्वाचन विभाग के अधिकारियों ने बाद में स्थिति साफ करते हुए बताया कि बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) द्वारा उनके पते पर जाकर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन पहले ही पूरा कर लिया गया है। उनका डेटा पूरी तरह सही पाया गया है और उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में बिना किसी अड़चन के शामिल रहेगा।

सत्यापन की अंतिम तिथि और आगे का रोडमैप

​चुनाव आयोग ने दिल्ली में 14 मई से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की थी, जिसका ड्राफ्ट रोल 31 अगस्त को प्रकाशित किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली का कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न हो।

​जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, वे अपने बीएलओ (BLO) या निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष आवश्यक दस्तावेज पेश कर सकते हैं। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार 29 अक्टूबर तक सभी नोटिसों के निस्तारण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके पश्चात 4 नवंबर को दिल्ली की अंतिम और अद्यतन मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का प्रकाशन किया जाएगा।

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