🔔
हर खबर का Alert पाएं
ब्रेकिंग न्यूज़ सबसे पहले सीधे अपने फ़ोन/ब्राउज़र पर पाएं
📰
🔍
← Back

✍️ कॉस्मिक रॉयलेट: विज्ञान, ब्रह्मांड और भारतीय दर्शन का अद्भुत संगम

सुशी सक्सेना, इंदौर, मध्यप्रदेश
साहित्य एवं विज्ञान लेखिका
सुशी सक्सेना, इंदौर (मध्य प्रदेश) की साहित्य एवं विज्ञान लेखिका हैं। उनकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। वे अनुपमा (सबकी सहेली) पत्रिका और वर्ल्ड ऑफ केमिस्ट्री ग्रुप की संस्थापक हैं तथा कई पुस्तकों की लेखिका हैं। ईमेल: sushisaxena1@gmail.com

अच्छा लिखने के लिए अच्छा पढ़ना जरूरी है। इसी विचार और अपने ‘रिसर्च एंड राइट’ फॉर्मूले के तहत मैंने देव गणेश द्वारा मुझे भेंट की गई उनकी पुस्तक  ‘कॉस्मिक रॉयलेट’ पढ़ी। देव गणेश भारतीय वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद लेखन को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। 

‘कॉस्मिक रॉयलेट’ एक विज्ञान-कथा उपन्यास है, जिसका कैनवास अत्यंत व्यापक है। यह कहानी किसी एक ग्रह, समय या पात्र तक सीमित न रहकर ब्रह्मांड की उत्पत्ति, विकास और संभावित अंत तक की कल्पनात्मक यात्रा कराती है। पुस्तक में Big Bang से Big Crunch तक की ब्रह्मांडीय यात्रा को आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों के साथ जोड़ा गया है। लेखक ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति को एक सर्वोच्च चेतना की सांस की प्रतीकात्मक कल्पना से जोड़ते हुए विज्ञान और दर्शन के बीच एक रोचक संवाद स्थापित किया है।

 कहानी में दो अमूर्त Entities, विभिन्न ग्रहों और प्रजातियों की सभ्यताएँ, अंतरिक्ष यात्राएँ, उन्नत तकनीक, प्राचीन गुरु, ध्यान, astral travel और कर्म जैसे अनेक तत्व एक साथ दिखाई देते हैं। पुस्तक का आधिकारिक विवरण भी Big Bang, Big Crunch, ancient gurus, astral travel, karma और विभिन्न sentient species जैसे विषयों को रेखांकित करता है। यही विविधता इसे सामान्य विज्ञान-कथा से अलग अनुभव प्रदान करती है।

इस पुस्तक की एक विशेषता यह है कि लेखक ने आधुनिक खगोल विज्ञान की अवधारणाओं को भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारों के साथ जोड़ने का प्रयास किया है। ब्रह्मांड, चेतना, सृष्टि, कर्म और अस्तित्व जैसे प्रश्न कहानी के भीतर लगातार पाठक के सामने आते हैं। इस कारण यह केवल अंतरिक्ष और तकनीक की कहानी न रहकर मानव अस्तित्व से जुड़े दार्शनिक प्रश्न भी उठाती है। 

कहानी का विस्तार हमारी आकाशगंगा मिल्की वे से लेकर एंड्रोमेडा जैसी विशाल आकाशगंगाओं और विभिन्न सभ्यताओं तक जाता है। करोड़ों-अरबों वर्षों के समय को एक कथा में समेटने का प्रयास लेखक की व्यापक कल्पनाशक्ति को दर्शाता है। पृथ्वी जैसी समानांतर दुनिया और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संरचनाओं की कल्पना भी पुस्तक को एक अलग आयाम देती है। 

देव गणेश की सैन्य पृष्ठभूमि का प्रभाव पुस्तक के अंतरिक्ष युद्धों, रणनीतियों और लड़ाकू दृश्यों में स्पष्ट दिखाई देता है। तकनीकी विवरणों के कारण ये प्रसंग विज्ञान-कथा में विशेष रुचि रखने वाले पाठकों के लिए आकर्षक बनते हैं। लेखक की सैन्य पृष्ठभूमि उनके युद्ध और combat situations के चित्रण को एक अलग विश्वसनीयता प्रदान करती है। 

पुस्तक की विशालता ही कहीं-कहीं इसकी चुनौती भी बन जाती है। अनेक प्रजातियाँ, तकनीकी शब्द, दार्शनिक अवधारणाएँ और अलग-अलग समय-खंड नए पाठकों के लिए थोड़े जटिल हो सकते हैं। कहानी का फोकस किसी एक केंद्रीय पात्र के बजाय व्यापक ब्रह्मांडीय घटनाओं पर अधिक है, इसलिए पाठक का भावनात्मक जुड़ाव पारंपरिक उपन्यासों की तरह किसी एक पात्र के साथ नहीं बनता। हालांकि, मेरे लिए इस कहानी का वास्तविक नायक किसी एक पात्र के बजाय स्वयं समय और ब्रह्मांड प्रतीत होता है।

‘कॉस्मिक रॉयलेट’ उन पाठकों के लिए विशेष रूप से रोचक हो सकती है, जिन्हें विज्ञान-कथा, अंतरिक्ष, एलियन सभ्यताओं, ब्रह्मांड और भारतीय दार्शनिक चिंतन में रुचि है। यह पुस्तक पाठक को केवल एक काल्पनिक अंतरिक्ष-यात्रा पर नहीं ले जाती, बल्कि यह सोचने के लिए भी प्रेरित करती है कि इस अनंत ब्रह्मांड में हमारा अस्तित्व क्या है और सृष्टि के इस विराट खेल में मनुष्य की भूमिका क्या हो सकती है।