उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में मेरठ हाईकोर्ट बेंच की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। अपनी इस दशकों पुरानी और प्रमुख मांग को लेकर मेरठ बार एसोसिएशन और अन्य अधिवक्ता संगठनों ने हड़ताल का शंखनाद कर दिया है। मंगलवार को हुई अहम बैठक में लिए गए कड़े फैसले के बाद, बुधवार सुबह से ही वकीलों ने न्यायिक कार्य का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है। कचहरी परिसर में अधिवक्ता जोरदार विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। इस बड़े आंदोलन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के वकीलों का पूरा समर्थन हासिल हुआ है, जिससे यह हड़ताल एक व्यापक रूप ले चुकी है।

'बेंच नहीं तो वोट नहीं' का नारा और कड़े फैसले अधिवक्ताओं ने इस बार आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कचहरी परिसर के सभी प्रवेश द्वारों पर बड़े-बड़े बैनर लगा दिए गए हैं, जिन पर स्पष्ट रूप से 'बेंच नहीं तो वोट नहीं' का नारा लिखा गया है। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से यह तय किया है कि न्यायालय परिसर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के किसी भी जनप्रतिनिधि का प्रवेश पूरी तरह से निषेध रहेगा।

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इसके अलावा एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला यह भी लिया गया है कि एमपी-एमएलए कोर्ट सहित जिले की अन्य अदालतों में भाजपा के वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों की ओर से जो वकालतनामे दाखिल किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। मेरठ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भाजपा नेताओं पर मेरठ हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए कोई ठोस प्रयास या समर्थन न करने का आरोप लगाते हुए भविष्य में उनका कोई भी मुकदमा न लड़ने का संकल्प लिया है।

सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का वकालतनामा भी होगा वापस इस विरोध-प्रदर्शन के तहत, राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की ओर से दिए गए वकालतनामे को भी वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही बार एसोसिएशन ने भाजपा से जुड़े उन सभी जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक सदस्यता को भी जल्द समाप्त करने का अल्टीमेटम दिया है, जो वर्तमान में बार के सदस्य हैं।

वकीलों का कहना है कि वे इस मुद्दे को जन-जन तक ले जाएंगे। इसके लिए शहर के संयुक्त व्यापार संघ और अन्य संगठनों के साथ एक संयुक्त बैठक की जाएगी। अधिवक्ताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण की समस्या और हाईकोर्ट बेंच के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी है, जिसे लेकर वकीलों और आम जनता में भारी रोष है। आंदोलन की अगली रणनीति तैयार करने के लिए जल्द ही सहारनपुर में केंद्रीय संघर्ष समिति की एक अहम बैठक भी बुलाई गई है।

भाजपा समर्थक अधिवक्ताओं में विरोध के स्वर बार एसोसिएशन के इस कड़े फैसले से वकीलों के बीच आपसी खींचतान की स्थिति बन गई है। जानकारी के मुताबिक, भाजपा की विचारधारा का समर्थन करने वाले अधिवक्ता इस निर्णय का खुलकर विरोध कर रहे हैं। बुधवार को जब दोनों बार एसोसिएशन के पदाधिकारी अदालतों से भाजपा नेताओं के वकालतनामे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे, तो भाजपा समर्थक वकीलों द्वारा इसका भारी विरोध किए जाने की आशंका है। फिलहाल, मेरठ कचहरी परिसर में गहमागहमी का माहौल है।

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