Asian Games 2026 का आगाज हो चुका है और भारत ने Aichi-Nagoya Games में अपने मेडल अभियान की शुरुआत भी कर दी है। 20 सितंबर तक भारत के खाते में दो सिल्वर मेडल आ चुके हैं।
दोनों पदक शूटिंग में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा से आए हैं। वहीं MMA में सुचिका तारियाल के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ एक और पदक पक्का हो चुका है, जिसका रंग अभी तय होना बाकी है।
अब बड़ा सवाल है—क्या भारत 2022 के 107 मेडल के अपने रिकॉर्ड को Aichi-Nagoya में और आगे ले जा पाएगा?
2022 में भारत ने क्या किया था?
हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने 107 पदक जीते थे। इनमें 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज शामिल थे। भारत पहली बार एशियन गेम्स में 100 मेडल के आंकड़े को पार करने में सफल रहा था। कुल पदकों के लिहाज से भारत चौथे स्थान पर रहा था।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इस बार भारत के सामने उसी प्रदर्शन को दोहराने या उससे आगे निकलने की चुनौती है। खेल मंत्रालय ने भी पहले 2026 एशियन गेम्स के लिए हांगझोउ के ऐतिहासिक प्रदर्शन को पार करने का लक्ष्य बताया था।
सबसे पहले शूटिंग ने दिया संकेत
भारत का पहला मेडल महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम ने जीता। एलावेनिल वलारिवन, सोनम मास्कर और विदरसा विनोद की टीम ने सिल्वर हासिल किया। चीन गोल्ड के साथ पहले स्थान पर रहा और जापान ने ब्रॉन्ज जीता।
इसके बाद एलावेनिल ने इसी स्पर्धा के व्यक्तिगत फाइनल में भी सिल्वर मेडल जीत लिया। उन्होंने 252.4 अंक हासिल किए और जापान की हिनाता ताइची से सिर्फ 0.6 अंक पीछे रहीं।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हांगझोउ में भारत के लिए शूटिंग सबसे सफल खेलों में से एक रही थी और भारतीय निशानेबाजों ने वहां 22 मेडल जीते थे।
मेडल का सबसे बड़ा आधार कौन से खेल?
1. शूटिंग
शूटिंग से भारत को इस बार भी बड़ी संख्या में पदकों की उम्मीद है। मनु भाकर, ईशा सिंह, रु्द्रांक्ष पाटिल, ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर और अनंतजीत सिंह नरूका जैसे नाम भारतीय चुनौती को मजबूत बनाते हैं। मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीत चुकी हैं।
यानी शूटिंग में सिर्फ एक-दो खिलाड़ियों पर निर्भरता नहीं है।
2. एथलेटिक्स
एथलेटिक्स ऐतिहासिक रूप से भारत का सबसे बड़ा मेडल स्रोत रहा है। पिछले 19 एशियन गेम्स में भारत ने एथलेटिक्स से 283 मेडल जीते हैं—85 गोल्ड, 102 सिल्वर और 96 ब्रॉन्ज।
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इस बार अविनाश साबले, तजिंदरपाल सिंह तूर, पारुल चौधरी और अन्नू रानी जैसे एथलीटों पर नजर रहेगी। ये खिलाड़ी हांगझोउ में अपने-अपने इवेंट में चैंपियन रह चुके हैं।
लेकिन यहां एक बड़ा बदलाव है—नीरज चोपड़ा इस बार एशियन गेम्स में नहीं हैं। चोट के कारण उनका अभियान रुक गया है। इससे भारत को एक संभावित गोल्ड मेडल का नुकसान हुआ है।
3. बॉक्सिंग
2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया और सात गोल्ड व तीन सिल्वर जीते। हालांकि एशियन गेम्स का स्तर अलग है। हांगझोउ में भारत ने बॉक्सिंग में चार मेडल जीते थे—एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज। इसलिए कॉमनवेल्थ की सफलता को सीधे एशियन गेम्स के मेडल में बदलना तय नहीं माना जा सकता।
4. हॉकी
भारत की पुरुष हॉकी टीम हांगझोउ की गोल्ड मेडलिस्ट है। एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का इतिहास भी भारत के पक्ष में रहा है। भारत ने इस स्पर्धा में चार गोल्ड, नौ सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज जीते हैं।
महिला टीम ने भी 20 सितंबर को अपने अभियान की शुरुआत उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19-0 की जीत से की।
हॉकी के दोनों गोल्ड भारत की मेडल टैली में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
5. क्रिकेट और कबड्डी
भारत की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमें तथा पुरुष और महिला कबड्डी टीमें पिछली बार की गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इस बार भी इन टीमों से पदक की उम्मीद है।
महिला क्रिकेट टीम 20 सितंबर को सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। सेमीफाइनल जीतने पर कम से कम सिल्वर मेडल पक्का हो जाएगा।
बैडमिंटन में भी नजर
बैडमिंटन में पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी जैसे खिलाड़ी भारत की चुनौती पेश करेंगे। 2026 में आयुष शेट्टी एशियन चैंपियनशिप के पुरुष सिंगल्स फाइनल तक पहुंचे, जबकि गायत्री गोपीचंद और ट्रीसा जॉली ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक पदक जीता।
इसलिए बैडमिंटन भी भारत की कुल मेडल संख्या में योगदान दे सकता है।
लेकिन 107 का आंकड़ा आसान क्यों नहीं?
भारत का पिछला रिकॉर्ड बड़ा है, लेकिन इस बार परिस्थितियां बिल्कुल वैसी नहीं हैं। सबसे बड़ा नाम नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी है। दूसरी तरफ कई खेलों में युवा खिलाड़ियों की बड़ी संख्या है, जिनके लिए यह पहला एशियन गेम्स अनुभव है।
इसके अलावा पिछले प्रदर्शन को दोहराना भी अपने आप में चुनौती है। 2022 में भारत ने 28 गोल्ड समेत 107 पदक जीते थे। इस बार मुकाबला भी कड़ा है और हर खेल में पिछली उपलब्धि दोहराना जरूरी नहीं कि संभव हो।