खेल डेस्क (विशेष रिपोर्ट): अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारतीय एथलीटों ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में शनिवार का दिन भारतीय खेल इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। भारतीय दल ने अभूतपूर्व और ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए मुक्केबाजी (Boxing) के रिंग में विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया। भारत ने पहली बार एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स संस्करण में मुक्केबाजी के अंदर 5 गोल्ड मेडल (Gold Medals) जीतने का चमत्कारी कारनामा कर दिखाया है।READ ALSO:-ममता का खौफनाक कत्ल: प्रेमी के इश्क में अंधी 'कलियुगी' मां ने अपने 6 माह के मासूम को नाले में फेंका, मेरठ पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
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इस ऐतिहासिक दिन पर प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने रिंग में उतरकर न सिर्फ अपने विरोधियों को धूल चटाई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाज अब वैश्विक स्तर पर अजेय बन चुकी हैं। इसके साथ ही, ट्रैक एंड फील्ड, पैरा-एथलेटिक्स और जूडो में भी भारत के पदकों की बारिश जारी है, जिसने भारत को पदक तालिका में शीर्ष देशों की कतार में ला खड़ा किया है।
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भारतीय मुक्केबाजी का 'स्वर्णिम अध्याय': रिंग में शेरनियों की दहाड़
\r\n\r\nशनिवार का दिन पूरी तरह से भारतीय महिला मुक्केबाजों के नाम रहा। इन सभी खिलाड़ियों ने अलग-अलग भार वर्गों में अपनी तकनीकी दक्षता, गति और बेजोड़ ताकत का प्रदर्शन किया। आइए विस्तार से जानते हैं इन गोल्डन गर्ल्स के ऐतिहासिक मुकाबलों के बारे में:
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1. अरुंधति चौधरी (60kg भार वर्ग): एकतरफा और दबंग जीत 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में अरुंधति चौधरी ने अपनी प्रतिद्वंद्वी रीड को संभलने का एक भी मौका नहीं दिया। पूरे मुकाबले के दौरान अरुंधति इतनी हावी रहीं कि अंतिम राउंड के शुरुआती 30 सेकेंड में रेफरी को खेल की रफ्तार बढ़ाने के लिए दोनों मुक्केबाजों को निर्देश देना पड़ा। रीड को मुकाबले में वापसी के लिए बेहद आक्रामक होना था, लेकिन अरुंधति के अचूक डिफेंस और तेज प्रहारों ने उन्हें पस्त कर दिया। अरुंधति ने यह मुकाबला यूनानिमस डिसीजन (5-0) से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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2. प्रिया घंघास (60kg भार वर्ग): स्प्लिट डिसीजन का रोमांचक फाइनल महिलाओं के इसी 60kg वर्ग के एक अन्य कड़े और रोमांचक फाइनल में भारत की प्रिया घंघास ने स्वर्णिम सफलता हासिल की। प्रिया ने मुकाबले की शुरुआत बेहद तेज की, लेकिन उनकी प्रतिद्वंद्वी अल-अहमदियेह ने भी हार नहीं मानी और कुछ सटीक पंच जड़कर जोरदार पलटवार किया। फाइनल राउंड में दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। एक समय प्रिया थकी हुई नजर आ रही थीं, लेकिन उनके जज्बे ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार अपना आक्रामक रुख बनाए रखा और अंततः स्प्लिट डिसीजन (4-1) से यह महामुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल चूम लिया।
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3. साक्षी चौधरी (51kg भार वर्ग): सटीक रणनीति और 5-0 से विजय 51 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में साक्षी चौधरी का सामना इंग्लैंड की मुक्केबाज से था। साक्षी ने इस बड़े मुकाबले में गजब की रणनीतिक परिपक्वता दिखाई। उन्होंने अपने बाएं हाथ से प्रतिद्वंद्वी के खतरनाक पंचों को ब्लॉक किया और दाएं हाथ से लगातार सटीक काउंटर-अटैक (जवाबी हमले) किए। साक्षी के कई पंच सीधे इंग्लिश खिलाड़ी के चेहरे पर लगे, जिससे मुकाबला पूरी तरह एकतरफा हो गया। परिणाम स्वरूप, जजों ने यूनानिमस डिसीजन (5-0) से साक्षी को विजेता घोषित किया।
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4. प्रीति पवार: ओलिंपियन का जलवा बरकरार हरियाणा की स्टार मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी अपना दबदबा साबित करते हुए गोल्ड मेडल जीता। प्रीति का खेल सफर प्रेरणादायक रहा है। वह 2022 एशियन चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीत चुकी हैं। 2024 पेरिस ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं प्रीति ने अपनी फॉर्म को जारी रखते हुए 2026 एशियन चैंपियनशिप और 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भी गोल्ड अपने नाम किया था। पटियाला के NS NIS में कड़ी ट्रेनिंग करने वाली प्रीति की यह जीत उनकी अथक मेहनत का परिणाम है।
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5. जैस्मिन लांबोरिया (57kg भार वर्ग): दुनिया की नंबर-1 का स्वर्णिम पंच 57 किलोग्राम वर्ग में वर्तमान में दुनिया की नंबर-1 बॉक्सर जैस्मिन लांबोरिया ने अपनी ख्याति के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। हरियाणा की इस दिग्गज खिलाड़ी ने 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में भी भारत को स्वर्ण दिलाया था। 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज जीतने वाली जैस्मिन ने इस बार अपने पदक का रंग बदलकर उसे सोने में तब्दील कर दिया है।
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निराशाजनक परिणाम: जहां महिला मुक्केबाजों ने इतिहास रचा, वहीं पुरुष मुक्केबाज जादुमणि को हार का सामना करना पड़ा। अपने से कहीं अधिक लंबे ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी डिक्सन के खिलाफ पहला राउंड 3-2 से जीतने के बावजूद, जादुमणि अगले दो राउंड में लय खो बैठे और उन्हें हार मिली।
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पैरा-एथलेटिक्स और एथलेटिक्स: ट्रैक एंड फील्ड में मेडल की झड़ी
\r\n\r\nमुक्केबाजी के रिंग से बाहर, एथलेटिक्स के मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी।
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पैरा शॉट पुट (F-57 कैटेगरी) में भारत का दबदबा: पैरा शॉट पुट इवेंट में भारतीय एथलीटों ने डबल धमाका किया। सोमन राणा ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर 13.40 मीटर का अपना 'सीजन बेस्ट थ्रो' फेंककर गोल्ड मेडल हासिल किया। वहीं, भारत के ही शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर का बेहतरीन थ्रो करते हुए सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। (जानकारी के लिए: F-57 कैटेगरी उन पैरा-खिलाड़ियों के लिए होती है, जिनके शरीर के निचले अंग (पैर) कमजोर होते हैं, लेकिन उनके धड़ और हाथों (ऊपरी शरीर) की ताकत पूरी तरह से सामान्य होती है।)
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ट्रिपल जंप (Triple Jump) में भी दो पदक: पुरुषों के ट्रिपल जंप इवेंट में भारत ने अपनी झोली में दो और मेडल डाले। प्रवीण चित्रावेल ने अपनी शानदार एथलेटिसिज्म का परिचय देते हुए 16.58 मीटर की छलांग लगाई और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसी इवेंट में भारत के सेल्वा प्रभु ने भी 16.52 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। इस प्रतियोगिता का स्वर्ण जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट (16.72 मीटर) ने जीता।
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जूडो के मैट पर उन्नति शर्मा का 'इप्पोन'
\r\n\r\nमहिलाओं के 63 किलोग्राम जूडो वर्ग में भारत की उन्नति शर्मा ने दक्षिण अफ्रीका की स्काई नोस्टर को बुरी तरह पछाड़ते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह मुकाबला उन्नति की फुर्ती का गवाह बना, जिन्होंने मात्र 1 मिनट 7 सेकेंड में जीत हासिल कर ली।
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उन्नति ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और सही मौका देखते ही नोस्टर का संतुलन बिगाड़कर उन्हें पीठ के बल मैट पर पटक दिया। इस बेदाग और परफेक्ट दांव के लिए उन्नति को 'इप्पोन' (Ippon) दिया गया। जूडो के खेल में इप्पोन एक ही दांव पर मिलने वाला सर्वोच्च स्कोर होता है, जो सीधे जीत दिलाता है। खास बात यह रही कि उन्नति ने पूरे मुकाबले में कोई 'शिडो' (पेनल्टी) या 'युको' नहीं गंवाया। इससे पहले उन्होंने राउंड ऑफ 16 में लामुलेला मागागुला को हराकर शानदार शुरुआत की थी।
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कुछ निराशाएं भी आईं सामने
\r\n\r\nखेल में जीत-हार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। कुछ स्पर्धाओं में भारत को निराशा भी हाथ लगी:
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- \r\n पैरा एथलेटिक्स (T54): पुरुष 1500 मीटर के फाइनल में भारत के रमेश शनमुगम 3:23:59 मिनट के समय के साथ सातवें स्थान पर रहे और पदक से चूक गए।\r\n \r\n
- \r\n रेस वॉकिंग में डिस्क्वालिफिकेशन: महिलाओं की 10,000 मीटर रेस वॉक के फाइनल में भारत की रवीना गायकवाड का अभियान बेहद निराशाजनक तरीके से समाप्त हुआ। उन्हें रेस वॉकिंग के कड़े नियमों के उल्लंघन के चलते तीन रेड कार्ड मिले, जिसके बाद उन्हें अयोग्य (Disqualify) घोषित कर रेस से बाहर कर दिया गया।\r\n \r\n
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भारत की पदक तालिका और आगे की चुनौतियां
\r\n\r\nभारतीय दल के इस बेमिसाल प्रदर्शन के बाद मेडल टैली (Medal Tally) में भारत ने लंबी छलांग लगाई है।
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- \r\n भारत के कुल पदक: 34 (11 गोल्ड, 15 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज)\r\n \r\n
- \r\n वर्तमान स्टैंडिंग: इन 34 पदकों के साथ टीम इंडिया अब पदक तालिका में चौथे स्थान (4th Position) पर मजबूती से काबिज हो गई है।\r\n \r\n
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आज क्या है खास? (44 मेडल इवेंट्स की लाइनअप): कॉमनवेल्थ गेम्स का रोमांच अभी बाकी है। आज (शनिवार/रविवार) खेलों के इस महाकुंभ में कुल 44 गोल्ड मेडल इवेंट्स होने जा रहे हैं। भारतीय खिलाड़ी बॉक्सिंग के बचे हुए मुकाबलों के अलावा एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स (19 फाइनल), बॉक्सिंग (14 फाइनल), ट्रैक और पैरा ट्रैक साइक्लिंग (6 फाइनल), जूडो (5 फाइनल) और लॉन बॉल्स में अपनी मजबूत चुनौती पेश करेंगे।
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पूरे देश की निगाहें अब ट्रैक, मैट और रिंग पर टिकी हैं। जिस रफ्तार से भारतीय दल आगे बढ़ रहा है, उससे उम्मीद है कि इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करेगा और पदकों की संख्या में ऐतिहासिक इजाफा होगा। देश को अपने इन शूरवीरों पर गर्व है!

Sabse pehle comment karne wale banein.