आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर से बिगड़ता नजर आ रहा है। पहले से ही आसमान छू रही चीनी और प्याज की कीमतों ने आम जनता को परेशान कर रखा था, और अब इसमें अंडों (Eggs) के दाम भी तेजी से जुड़ गए हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल अंडों की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के कई बड़े शहरों में एक अंडे की खुदरा कीमत 9 से 10 रुपये तक पहुँच चुकी है। स्थिति यह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिसंबर तक इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण अंडे और भी महंगे हो सकते हैं।
\r\n\r\nकौन सा आइटम कितने में बिक रहा है? (वर्तमान कीमतें)
\r\n\r\nबाजार के आंकड़ों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, रसोई की इन तीनों मुख्य चीजों के दाम इन दिनों किस स्तर पर हैं, आइए एक नजर डालते हैं:
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- \r\n अंडे के दाम: देश के कई प्रमुख बाजारों और खुदरा दुकानों पर एक अंडे की कीमत 9 से 10 रुपये प्रति पीस तक पहुँच गई है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 40% की बढ़ोतरी हुई है।\r\n \r\n
- \r\n चीनी के दाम: कुछ महीनों पहले (जुलाई 2026 के आसपास) जो चीनी खुदरा बाजार में करीब 48 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, वह अब बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो से ज्यादा में बिक रही है। महज दो महीनों में चीनी के दामों में लगभग 25% का उछाल आया है।\r\n \r\n
- \r\n प्याज के दाम: प्याज के तेवर भी लगातार तीखे बने हुए हैं। बड़े शहरों में प्याज की खुदरा कीमत 50 से 65 रुपये प्रति किलो (और कुछ खास बाजारों में 70 से 82 रुपये प्रति किलो तक) बनी हुई है। अगस्त के मुकाबले सितंबर आते-आते प्याज के दामों में करीब 42% तक का इजाफा देखा गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\nअंडे महंगे होने के पीछे की मुख्य वजह क्या है?
\r\n\r\nअंडों की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण जुड़े हुए हैं, जिनमें पोल्ट्री उद्योग की लागत सबसे अहम है:
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- \r\n पोल्ट्री फीड (मक्के की कीमतें): अंडों के महंगे होने का सबसे बड़ा कनेक्शन मक्का (Maize) से है। पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गियों को दिए जाने वाले कुल आहार (Feed) का करीब 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा मक्का ही होता है। कुछ समय पहले तक जो मक्का 14,000 रुपये प्रति टन बिक रहा था, उसकी कीमत बढ़कर अब 26,500 रुपये प्रति टन तक पहुँच गई है। खुदरा बाजार में भी मक्के का भाव 22 रुपये से बढ़कर 30 रुपये प्रति किलो हो गया है।\r\n \r\n
- \r\n डिमांड और सप्लाई में अंतर: बाजार में अंडों की मांग (Demand) काफी ज्यादा है, जबकि उस अनुपात में सप्लाई (Supply) कम हो रही है, जिसके कारण दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n विकल्पों की तलाश: 'Abhi Eggs' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मक्के की आसमान छूती कीमतों के कारण अब पोल्ट्री फीड के लिए टूटे चावल, गेहूं और सोयामील जैसे सस्ते विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन लागत पर इसका भारी असर पड़ा है।\r\n \r\n
- \r\n दिसंबर तक और बढ़ सकती है लागत: रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले दिसंबर तक अंडों की इनपुट कॉस्ट में 15 से 20 प्रतिशत तक का और इजाफा हो सकता है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।\r\n \r\n
\r\n\r\nप्याज और चीनी की महंगाई ने बढ़ाई चिंता
\r\n\r\nअंडों के साथ-साथ प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों ने भी आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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- \r\n चीनी: पिछले कुछ हफ्तों में सप्लाई और उत्पादन से जुड़े कारणों के चलते चीनी के दाम लगातार ऊपर बने हुए हैं। 60 रुपये किलो बिकने वाली चीनी ने मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित किया है।\r\n \r\n
- \r\n प्याज: सितंबर महीने में प्याज की कीमतों में जिस तरह का उछाल आया है (जो पिछले साल सितंबर के 28 रुपये प्रति किलो से बढ़कर कई गुना हो चुका है), उसने थाली का जायका बिगाड़ दिया है।\r\n \r\n
महंगाई के इस दौर में प्रोटीन का सबसे सस्ता और सुलभ स्रोत माना जाने वाला अंडा भी अब आम आदमी की पहुँच से थोड़ा दूर होता जा रहा है। पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत और मक्के के दाम में उछाल जब तक नियंत्रित नहीं होते, तब तक अंडों की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। सरकार और बाजार के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले सर्दियों के सीजन में मांग बढ़ने पर कीमतों को कैसे संभाला जाएगा।