मेरठ/हापुड़: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में पारदर्शी व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के तमाम दावों के बीच हापुड़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हापुड़ के धौलाना विकासखंड स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय हसनपुर धौलाना में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था, छात्र सुरक्षा में भारी लापरवाही और सामाजिक भेदभाव की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए मेरठ मंडल की मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (एडी बेसिक) ऐश्वर्या लक्ष्मी ने प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) हापुड़ दीपा भाटी को एक आधिकारिक पत्र जारी कर मामले की निष्पक्ष जांच करने और एक सप्ताह (सात कार्यदिवस) के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की है। एडी बेसिक के इस कड़े रुख के बाद हापुड़ शिक्षा विभाग से लेकर संबंधित स्कूल के स्टाफ में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है।
शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सौंपा शिकायती पत्र
इस पूरे मामले की शुरुआत बुधवार को हुई, जब शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल मेरठ स्थित मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक के कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने एडी बेसिक ऐश्वर्या लक्ष्मी से मुलाकात कर उन्हें पूर्व माध्यमिक विद्यालय हसनपुर धौलाना की बदहाल स्थिति और वहां तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक तस्नीम अली खान की मनमानी के खिलाफ एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा।

शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने एडी बेसिक को अवगत कराया कि हसनपुर धौलाना के इस विद्यालय में छोटे-छोटे मासूम बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर शिकायतों की अनदेखी किए जाने के कारण संगठन को उच्च अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ी।
प्रभारी प्रधानाध्यापक पर लगे 6 संगीन आरोप: जानिए पूरा मामला
शोषित क्रांति दल द्वारा प्रस्तुत शिकायती पत्र में पूर्व माध्यमिक विद्यालय हसनपुर धौलाना के प्रभारी प्रधानाध्यापक तस्नीम अली खान पर कई संगीन और गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
मिड-डे मील (MDM) योजना में बड़ा घोटाला: सरकार द्वारा विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार देने के लिए चलाई जा रही मध्याह्न भोजन योजना में भारी हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि कागजों में छात्रों की उपस्थिति अधिक दिखाकर मिड-डे मील के बजट और खाद्यान्न का गबन किया जा रहा है।
बच्चों को निर्धारित खुराक से कम खाना देना: मेन्यू और शासन द्वारा तय मानकों के विपरीत बच्चों को अत्यंत कम मात्रा और गुणवत्ताहीन खाना परोसा जाता है। शिकायत के अनुसार, बच्चों को न तो पूरा पोषण मिल पा रहा है और न ही दूध व फल वितरण की योजना का सही लाभ दिया जा रहा है।
विद्यालय परिसर में शौचालय का न होना: 21वीं सदी में भी इस स्कूल में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के लिए शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। बुनियादी स्वच्छता सुविधा का न होना स्वच्छता अभियान और शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों का खुला उल्लंघन है।
जर्जर भवन की सूचना उच्च अधिकारियों से छिपाना: विद्यालय का भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। बारिश या सामान्य दिनों में भी छत से प्लास्टर गिरने और हादसे की आशंका बनी रहती है। आरोप है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक ने इस खतरनाक स्थिति की लिखित सूचना समय रहते उच्चाधिकारियों को नहीं भेजी, जिससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
घायल छात्र का इलाज न कराना व घोर संवेदनहीनता: स्कूल अवधि के दौरान परिसर में चोटिल हुए एक मासूम छात्र को प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही उसके परिजनों को सही समय पर सूचित किया गया। प्रशासनिक स्तर पर इस कृत्य को गंभीर लापरवाही माना गया है।
जातीय आधार पर भेदभाव करना: सबसे दुखद और संवेदनहीन आरोप विद्यालय में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के साथ जातीय आधार पर भेदभाव (Caste-based discrimination) करने का है। आरोप है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों के साथ व्यवहार और बैठने की व्यवस्था में पक्षपात किया जाता है।
एडी बेसिक ऐश्वर्या लक्ष्मी का कड़ा निर्देश: 'एक हफ्ते में दें जवाब'
शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत द्वारा दिए गए साक्ष्यों और शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एडी बेसिक ऐश्वर्या लक्ष्मी ने तनिक भी देरी न करते हुए त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हापुड़ दीपा भाटी को संबोधित पत्र में स्पष्ट लिखा है कि शिकायत पत्र में उल्लिखित सभी 6 बिंदुओं की गहराई से जांच की जाए।
एडी बेसिक के आदेशानुसार, बीएसए हापुड़ को एक सप्ताह के भीतर स्वयं या किसी वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर विद्यालय का औचक निरीक्षण कराना होगा। जांच में मध्याह्न भोजन के अभिलेखों, छात्र उपस्थिति पंजिका, शौचालय निर्माण की स्थिति, भवन की भौतिक जांच और पीड़ित बच्चों व अभिभावकों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
बीएसए हापुड़ दीपा भाटी पर टिकीं नजरें: होगी कड़ी विभागीय कार्रवाई?
अब इस मामले में पूरी जिम्मेदारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) हापुड़ दीपा भाटी के कंधों पर है। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर पेश होने वाली जांच रिपोर्ट में प्रभारी प्रधानाध्यापक तस्नीम अली खान पर लगे आरोप सिद्ध होते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन (Suspension) और विभागीय जांच जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय है।
बेसिक शिक्षा विभाग में मिड-डे मील में हेराफेरी और बच्चों के साथ जातीय भेदभाव जैसे मामलों को शासन स्तर पर बेहद गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि विभागीय जांच की आंच कुछ अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों तक भी पहुंच सकती है जिन्होंने पूर्व में मिली मौखिक शिकायतों को दबाने का प्रयास किया था।
शोषित क्रांति दल की चेतावनी: 'कार्रवाई न हुई तो होगा बड़ा आंदोलन'
शिकायत दर्ज कराने के बाद शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा:
"हम गरीब और शोषित वर्ग के बच्चों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे देश का भविष्य हैं। अगर उनके निवाले पर डाका डाला जाएगा, उन्हें जर्जर इमारतों में खतरे के साये में बैठाया जाएगा और जातीय भेदभाव का शिकार बनाया जाएगा, तो शोषित क्रांति दल इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि एक सप्ताह के भीतर आरोपी शिक्षक पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई और व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो हमारा संगठन बीएसए कार्यालय हापुड़ के समक्ष उग्र धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।"
जनहित और बेसिक शिक्षा की साख पर उठे सवाल
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर उजागर करता है कि ग्रामीण अंचलों के सरकारी स्कूलों में जमीनी स्तर पर अनुश्रवण (Monitoring) की कितनी सख्त जरूरत है। जब तक दोषी अधिकारियों और शिक्षकों पर कठोर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सरकारी विद्यालयों के प्रति आम जनता का विश्वास बहाल होना कठिन है। फिलहाल पूरे हापुड़ और मेरठ मंडल की नजरें बीएसए द्वारा पेश की जाने वाली सात दिवसीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।