शकील अहमद
बिजनौर (खबरीलाल ग्राउंड रिपोर्ट):
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उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला अपनी उपजाऊ भूमि और गन्ने की मिठास के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह क्षेत्र मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) का प्रमुख केंद्र बन गया है। गन्ने के घने खेत अब खूंखार वन्यजीवों, विशेषकर गुलदारों (Leopards) की शरणस्थली बन चुके हैं। इसी कड़ी में बिजनौर के थाना नहटौर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सदरुद्दीन नगर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। यहाँ पिछले कई दिनों से किसानों और ग्रामीणों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुका एक गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया है। गुलदार के पकड़े जाने के बाद से पूरे इलाके में छाई दहशत का माहौल खत्म हो गया है और ग्रामीणों ने राहत की गहरी सांस ली है।
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दहशत के साये में थे सदरुद्दीन नगर के ग्रामीण

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​ग्राम सदरुद्दीन नगर और उसके आस-पास के इलाकों में पिछले कुछ समय से इस गुलदार की लगातार चहलकदमी देखी जा रही थी। खेतों में काम करने वाले किसानों को अक्सर इसके पगमार्क (पैरों के निशान) दिखाई देते थे, जिससे पूरे गांव में खौफ का माहौल था। शाम ढलते ही लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए थे। बच्चे न तो घर से बाहर खेलने निकल पा रहे थे और न ही किसान बेखौफ होकर अपने खेतों में सिंचाई या कटाई का काम कर पा रहे थे। पशुपालकों को भी अपने पालतू जानवरों के शिकार होने का डर हर वक्त सताता रहता था। ग्रामीणों ने कई बार इसकी सूचना वन विभाग को दी, लेकिन गन्ने के खेतों की सघनता के कारण गुलदार को पकड़ना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था।
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भाकियू (टिकैत) नेता सुजीव चौधरी की पहल लाई रंग

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​जब डर का साया गहराने लगा और ग्रामीणों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होने लगा, तब भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला उपाध्यक्ष सुजीव चौधरी ने इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने का बीड़ा उठाया। किसानों की पीड़ा और उनके परिवारों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, सुजीव चौधरी ने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया।
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​आज से ठीक 5 दिन पहले, सुजीव चौधरी की देखरेख में गांव की पूर्व दिशा (पूरब दिशा) में, जहां गुलदार की आवाजाही सबसे ज्यादा देखी गई थी, एक मजबूत लोहे का पिंजरा लगवाया गया। पिंजरे में गुलदार को आकर्षित करने के लिए शिकार भी रखा गया था। पांच दिनों तक ग्रामीण और भाकियू कार्यकर्ता सतर्क निगाह बनाए हुए थे। आखिरकार उनकी यह मेहनत और सूझबूझ रंग लाई। बीती रात शिकार की तलाश में भटकता हुआ यह खूंखार गुलदार उस पिंजरे के पास पहुंचा और जैसे ही उसने शिकार पर झपट्टा मारने की कोशिश की, वह पिंजरे में सुरक्षित रूप से कैद हो गया।
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सुबह होते ही पिंजरे के पास लगी ग्रामीणों की भीड़

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​सुबह जब कुछ किसान अपने खेतों की तरफ गए, तो उन्होंने पिंजरे के अंदर से आ रही गुलदार की तेज दहाड़ सुनी। देखते ही देखते यह खबर पूरे सदरुद्दीन नगर और आस-पास के गांवों में आग की तरह फैल गई। गुलदार को देखने के लिए पिंजरे के आस-पास ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि, लोगों की आंखों में खौफ के बजाय अब एक जीत और राहत की चमक थी। जो गुलदार कल तक उनके लिए जानलेवा खतरा बना हुआ था, वह अब लोहे की सलाखों के पीछे बेबस था। ग्राम प्रधान और भाकियू नेताओं ने तुरंत भीड़ को नियंत्रित किया ताकि जानवर को उकसाया न जाए और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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वन विभाग की टीम का सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन

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​गुलदार के पिंजरे में कैद होने की सूचना तुरंत वन विभाग (Forest Department) के उच्च अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम, रेंजर और पशु चिकित्सकों के साथ पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई।
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​वन विभाग की टीम इस बात को लेकर पूरी तरह सतर्क है कि जानवर को किसी भी प्रकार की चोट न पहुंचे। रेस्क्यू टीम सबसे पहले भीड़ को पिंजरे से दूर कर रही है ताकि गुलदार तनाव में न आए। इसके बाद सुरक्षित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, पिंजरे को ट्रैक्टर-ट्रॉली या विभागीय वाहन में लोड किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि गुलदार का मेडिकल चेकअप किया जाएगा और यदि वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, तो उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार उसे अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) या शिवालिक के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा, जहां से उसका इंसानी बस्तियों की ओर लौटना मुश्किल हो।
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बिजनौर में क्यों बढ़ रहा है गुलदारों का आतंक?

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​खबरीलाल इस मौके पर यह सवाल भी उठाना चाहता है कि आखिर बिजनौर में ही गुलदारों का आतंक इतना क्यों बढ़ गया है? दरअसल, बिजनौर जिला गंगा खादर और जंगलों से सटा हुआ है। लगातार जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवास के सिकुड़ने से ये वन्यजीव गन्ने के खेतों को अपना नया घर बना रहे हैं। गन्ने की ऊंचाई और सघनता उन्हें छिपने के लिए प्राकृतिक जंगल जैसा ही माहौल प्रदान करती है। यही कारण है कि आए दिन बिजनौर के किसी न किसी गांव से गुलदार के हमले या पकड़े जाने की खबरें आती रहती हैं। सरकार और वन विभाग को इस दिशा में दीर्घकालिक ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
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सतर्कता ही बचाव है

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​सदरुद्दीन नगर में गुलदार का पकड़ा जाना निश्चित रूप से एक बड़ी सफलता है। सुजीव चौधरी और ग्रामीणों की जागरूकता ने एक बड़े संभावित हादसे को टाल दिया है। खबरीलाल सभी पाठकों और किसान भाइयों से अपील करता है कि खेतों में जाते समय हमेशा समूह में जाएं, अपने साथ शोर मचाने वाले उपकरण रखें और किसी भी वन्यजीव के दिखने पर खुद उलझने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
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