खबरीलाल डेस्क
सहारनपुर/बिजनौर (खबरीलाल विशेष रिपोर्ट):
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट यानी जिलाधिकारी (DM) कार्यालय परिसर के भीतर बनी एक मस्जिद को बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इसे लेकर लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक खींचतान चल रही थी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव और गहमागहमी का माहौल है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस फोर्स, पीएसी (PAC) और आरपीएफ (RRF) की कंपनियों को तैनात कर दिया है।
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​इस बीच, समाजवादी पार्टी की तेज-तर्रार सांसद इकरा हसन जब इस पूरे मामले का विरोध करने और मौके पर पहुंचने वाली थीं, तो पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही रोकते हुए हाउस अरेस्ट कर लिया।
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क्या है पूरा मामला? कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

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​सहारनपुर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कलेक्ट्रेट कैंपस में बनी इस मस्जिद के निर्माण को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अवैध करार दिया था। प्रशासन का तर्क था कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर बनाया गया था। कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी की तरफ से ऊपरी अदालतों में अपील दायर की गई थी, लेकिन वह अपील खारिज हो गई, जिससे सिटी मजिस्ट्रेट का निचली अदालत का आदेश बरकरार रहा।
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​कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर की उस विवादित मस्जिद को गिराने का निर्णय लिया। सहारनपुर मंडल के डीआईजी (DIG) अभिषेक सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ध्वस्तीकरण से पहले सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं। मस्जिद कमेटी को पहले ही विधिवत नोटिस भेजा जा चुका था और कोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
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छावनी में बदला इलाका: पीएसी और आरक्षित बल तैनात

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​कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के अप्रिय घटनाक्रम से निपटने के लिए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट और उसके आस-पास के पूरे इलाके को सील कर दिया। इलाके को पूरी तरह पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ पीएसी की 5 और आरपीएफ (RRF) की 1 कंपनी को तैनात किया गया। पुलिस ने इलाके में लगातार पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च भी किया।
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​प्रशासन ने पहले ही अराजक तत्वों और सोशल मीडिया यूजर्स को सख्त चेतावनी दी थी कि यदि किसी ने इस संवेदनशील मामले पर किसी भी तरह की अफवाह फैलाई या भड़काऊ पोस्ट शेयर की, तो उसके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशासनिक अमले और बुलडोजर ने मस्जिद के ढांचे को गिराने का काम पूरा किया।
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सांसद इकरा हसन हुईं आगबबूला, पुलिस ने किया नजरबंद

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​इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू सपा सांसद इकरा हसन की प्रतिक्रिया और उनकी घर पर हुई नजरबंदी रही। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में तोड़ी जा रही मस्जिद के मामले की जानकारी लेने और अधिकारियों से मिलने के लिए अपने समर्थकों के साथ रवाना होने वाली थीं।
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​लेकिन, प्रशासन को इसकी भनक पहले ही लग चुकी थी। सुबह-ससुबह ही उनके सरकारी आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस ने किसी भी व्यक्ति को उनके घर के अंदर जाने या बाहर आने की अनुमति नहीं दी।
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​हाउस अरेस्ट किए जाने पर कड़ा आक्रोश जताते हुए सांसद इकरा हसन ने कहा, "हम केवल यह जानने के लिए अधिकारियों से मिलना चाहते थे कि आखिर जल्दबाजी में इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है, लेकिन हमें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए नजरबंद कर दिया गया। क्या एक जनप्रतिनिधि का प्रशासनिक अधिकारियों से मिलना और जनता की बात रखना भी अब अपराध बन गया है?" उन्होंने प्रशासन के इस रवैये को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
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प्रशासनिक कदम और बढ़ते सवाल

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​जिला प्रशासन का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह कानूनी दायरे में और अदालत के आदेशों के अनुपालन में की गई है। हालांकि, एक सरकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट कैंपस) के भीतर धार्मिक ढांचे के ध्वस्तीकरण और उसके बाद एक जनप्रतिनिधि की नजरबंदी ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दल इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकते हैं।
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​सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद का यह मामला अब प्रशासनिक सीमाओं को लांघकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन अपनी पूरी ताकत झोंक चुका है, लेकिन इस कार्रवाई के दूरगामी राजनीतिक और सामाजिक परिणाम क्या होंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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