मेरठ/नोएडा: उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता पश्चिमी यूपी के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है। इस बात को भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बहुत अच्छी तरह समझता है। इसी राजनीतिक अहमियत को ध्यान में रखते हुए, गुरुवार देर शाम भाजपा ने पश्चिमी क्षेत्र के लिए अपनी नई और बहुप्रतीक्षित क्षेत्रीय कार्यसमिति की घोषणा कर दी है।READ ALSO:-माता लक्ष्मी की कृपा से आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत? जानें 04 सितंबर 2026 का संपूर्ण पंचांग, सटीक राशिफल और अचूक महा-उपाय
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इस बार पार्टी ने एक बेहद संतुलित, आक्रामक और रणनीतिक रूप से मजबूत टीम उतारी है। 37 सदस्यीय इस नई कार्यसमिति में 24 प्रमुख पदाधिकारी और 13 कार्यकारिणी सदस्य शामिल किए गए हैं। इस लिस्ट को देखकर राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं, क्योंकि इसमें समाज के हर वर्ग, जाति और समुदाय को साधने की एक 'परफेक्ट सोशल इंजीनियरिंग' (Social Engineering) देखने को मिल रही है।
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जातीय समीकरणों का 'अचूक चक्रव्यूह'
\r\n\r\nभाजपा ने इस 'स्पेशल 37' टीम के जरिए पश्चिमी यूपी के हर छोटे-बड़े वोट बैंक को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। लिस्ट में सवर्ण वर्ग (विशेषकर ब्राह्मण और ठाकुर) से लेकर वैश्य, गुर्जर, पिछड़ा (OBC), अतिपिछड़ा (MBC) और दलित वर्गों के नेताओं को उनके प्रभाव के अनुसार संगठन में जगह दी गई है। पश्चिमी यूपी में रालोद (RLD) और सपा (SP) के गठबंधन की चुनौती से निपटने के लिए भाजपा ने जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले नेताओं को आगे किया है। दिलचस्प बात यह है कि जिन कुछ कद्दावर नेताओं को हाल ही में मेरठ महानगर की टीम से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, पार्टी ने उनकी नाराजगी मोल लेने के बजाय उन्हें क्षेत्रीय सूची में अहम स्थान देकर उनका रुतबा और बढ़ा दिया है। यह दर्शाता है कि पार्टी चुनाव से पहले कोई भी अंदरूनी कलह नहीं चाहती।
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संगठन में दिखा 'नोएडा' के दो सुपर-बॉस का जलवा
\r\n\r\nइस नई कार्यकारिणी की सूची जारी होते ही कार्यकर्ताओं के बीच जो सबसे बड़ी चर्चा छिड़ी है, वह है 'नोएडा का दबदबा'। आमतौर पर ऐसी सूचियों में लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय या दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व की स्पष्ट छाप होती है, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है।
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- \r\n सिफारिशें हुईं दरकिनार: विश्वस्त सूत्रों और कार्यकर्ताओं में चल रही अंदरखाने की चर्चाओं के अनुसार, इस सूची में नोएडा का प्रभुत्व साफ नजर आ रहा है। कई ऐसे नाम थे, जिनके लिए लखनऊ और दिल्ली के बड़े नेताओं ने संगठन में अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों की सिफारिश की थी। लेकिन जब फाइनल लिस्ट आई, तो वे सिफारिशें सिरे से गायब मिलीं।\r\n \r\n
- \r\n दो चेहरों की महती भूमिका: माना जा रहा है कि नोएडा में बैठकर पश्चिमी यूपी की राजनीति को कंट्रोल करने वाले पार्टी के दो बड़े चेहरों ने इस सूची को अंतिम रूप देने में निर्णायक (Veto) भूमिका निभाई है। इसी के चलते क्षेत्रीय टीम में उनके करीबियों को प्रमुखता से जगह मिल सकी है।\r\n \r\n
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मेरठ मॉडल: छात्र राजनीति से निकले 'हीरों' की लगी लॉटरी
\r\n\r\nमेरठ हमेशा से पश्चिमी यूपी की राजनीति का केंद्र (Epicenter) रहा है। इस बार भाजपा ने मेरठ की छात्र राजनीति की भट्टी में तपकर निकले युवाओं को संगठन में कमान सौंपकर एक बड़ा दांव खेला है:
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- \r\n अंकुर राणा का बढ़ा कद: छात्रसंघ की राजनीति में लंबे समय तक अपना दबदबा कायम रखने वाले तेज-तर्रार नेता अंकुर राणा को पार्टी ने बड़ा इनाम दिया है। पूर्व में क्षेत्रीय मंत्री के रूप में शानदार काम करने वाले अंकुर को अब सीधे 'क्षेत्रीय उपाध्यक्ष' की कुर्सी पर बैठाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n सुखविंदर सोम का जलवा: युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी धाक जमा चुके सुखविंदर सोम को क्षेत्रीय मंत्री बनाया गया है। वह इस पूरी 37 सदस्यीय भारी-भरकम कार्यकारिणी में सबसे कम उम्र के पदाधिकारी हैं, जो युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है।\r\n \r\n
- \r\n वरुण गोयल और आयुष पवार: मेरठ कॉलेज की राजनीति से निकलकर मुख्यधारा की राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले वरुण गोयल और छात्र राजनीति के ही आक्रामक चेहरे आयुष पवार को भी पार्टी ने क्षेत्रीय मंत्री के पद से नवाजा है।\r\n \r\n
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ब्राह्मण कार्ड, महिला शक्ति और पुराने चेहरों की वापसी
\r\n\r\nपार्टी ने इस लिस्ट के जरिए रूठे हुओं को मनाने और आधी आबादी (महिलाओं) को साधने का भी पूरा प्रयास किया है।
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- \r\n ब्राह्मणों को संदेश: मेरठ से दर्जा प्राप्त मंत्री रहे और वर्तमान में परशुराम परिषद के अध्यक्ष पंडित सुनील भराला के छोटे भाई अजय भारद्वाज भराला को क्षेत्रीय मंत्री बनाकर ब्राह्मण समाज को एकजुट करने की कोशिश की गई है।\r\n \r\n
- \r\n अनुभव को सम्मान: मेरठ महानगर कार्यकारिणी में लंबे समय तक पदाधिकारी रहे अनुभवी नेता महेश बाली और हरीश सिंह ठाकुर को क्षेत्रीय टीम में पुन: सम्मानजनक स्थान देकर उनका अनुभव भुनाने की तैयारी है।\r\n \r\n
- \r\n नारी शक्ति वंदन: संगठन में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए गीता शर्मा, कुमुदिनी चौधरी सैनी और हरजिंदर कौर को शामिल कर महिला कोटा बखूबी पूरा किया गया है।\r\n \r\n

यहां देखिए भाजपा पश्चिम क्षेत्र की 'स्पेशल 37' की पूरी लिस्ट:
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■ क्षेत्रीय उपाध्यक्ष (कुल 10):
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- \r\n विनोद त्यागी\r\n \r\n
- \r\n मानसिंह गोस्वामी\r\n \r\n
- \r\n हरेंद्र जाटव\r\n \r\n
- \r\n प्रवीण मित्तल\r\n \r\n
- \r\n बिजेंद्र कश्यप\r\n \r\n
- \r\n अंकुर राणा\r\n \r\n
- \r\n राजीव सिसोदिया\r\n \r\n
- \r\n प्रदीप सैनी\r\n \r\n
- \r\n विनोद चौधरी\r\n \r\n
- \r\n सुभाष वाल्मीकि\r\n \r\n

■ क्षेत्रीय महामंत्री (कुल 4):
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- \r\n अशोक मोंगा\r\n \r\n
- \r\n हरीश सिंह\r\n \r\n
- \r\n संजीव सिक्का गोयल\r\n \r\n
- \r\n रुपेंद्र सैनी\r\n \r\n

■ क्षेत्रीय मंत्री (कुल 10):
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- \r\n अजय भारद्वाज भराला\r\n \r\n
- \r\n कुमुदिनी चौधरी सैनी\r\n \r\n
- \r\n हरजिंदर कौर\r\n \r\n
- \r\n सुखविंदर सोम\r\n \r\n
- \r\n नितिन मलिक\r\n \r\n
- \r\n महेश बाली\r\n \r\n
- \r\n दीपक रिषि गौड़\r\n \r\n
- \r\n वरुण गोयल\r\n \r\n
- \r\n सौरव पाल लोधी\r\n \r\n
- \r\n आयुष पवार\r\n \r\n

■ क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य (कुल 13):
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- \r\n मनोज शर्मा\r\n \r\n
- \r\n गीता शर्मा\r\n \r\n
- \r\n नितिन शर्मा\r\n \r\n
- \r\n राजे कसाना\r\n \r\n
- \r\n रवीना सिंह\r\n \r\n
- \r\n कृष्ण चंद सैनी\r\n \r\n
- \r\n रोहिल वाल्मीकि\r\n \r\n
- \r\n हरमीत बख्शी\r\n \r\n
- \r\n हेमंत लोधी\r\n \r\n
- \r\n ललित गर्ग मोदी\r\n \r\n
- \r\n संजय राणा\r\n \r\n
- \r\n सतेंद्र चौधरी\r\n \r\n
- \r\n राजीव लोचन प्रजापति\r\n \r\n
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पश्चिमी यूपी में भाजपा की यह नई कार्यकारिणी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि पार्टी किसी भी तरह के 'कंफर्ट जोन' में नहीं रहना चाहती। छात्र नेताओं को आगे लाना, जातीय संतुलन साधना और क्षेत्रीय क्षत्रपों (नोएडा लॉबी) को महत्व देना, यह सब 2027 के महासंग्राम की एक सोची-समझी तैयारी का हिस्सा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'स्पेशल 37' की टीम विपक्ष के 'पीडीए' (PDA) और रालोद-सपा गठबंधन के सामने मैदान में कितनी खरी उतर पाती है।
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