अनिल कुमार शर्मा, विशेष संवाददाता | खबरीलाल मीडिया
\r\n\r\nधामपुर (बिजनौर), 04 सितंबर 2026: भारतीय संस्कृति और त्योहारों का असली रंग और उत्साह अक्सर विद्यालयों के प्रांगण में देखने को मिलता है। गुरुवार, 03 सितंबर 2026 को धामपुर के शिखर शिशु सदन सी० सै० स्कूल (Shikhar Shishu Sadan Sr. Sec. School) में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व अत्यंत हर्ष, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरा विद्यालय परिसर मानों गोकुल और वृंदावन में तब्दील हो गया था। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को समर्पित इस कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।READ ALSO:-मौसम अलर्ट: 4 सितंबर को 25 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का खतरा, UP-बिहार समेत कई राज्यों में IMD की चेतावनी
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पुष्पगुच्छ से हुआ स्वागत, दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत
\r\n\r\nकार्यक्रम का शुभारंभ एक अत्यंत गरिमामयी और पारंपरिक तरीके से हुआ। विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों ने प्रधानाचार्या श्रीमती भारती सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक गुलदस्ता (पुष्पगुच्छ) भेंट किया। इसके पश्चात, प्रधानाचार्या महोदया ने बाल रूप श्री कृष्ण के सुंदर चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार शुरुआत एक सुमधुर भजन से हुई। भगवान कृष्ण की स्तुति में गाए गए इस भजन ने पूरे विद्यालय के वातावरण को अत्यंत भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
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राधा-कृष्ण के नृत्य और रासलीला ने बांधा समां
\r\n\r\nकार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया राधा-कृष्ण का मनमोहक नृत्य रहा। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजीं छात्राओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से वृंदावन की प्रसिद्ध 'रासलीला' को मंच पर जीवंत कर दिया। बांसुरी की धुन और मधुर संगीत पर थिरकते बच्चों के कदम देखकर दर्शक तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाए।
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लघु नाटिका में दिखे श्री कृष्ण की लीलाओं के जीवंत दृश्य
\r\n\r\nविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने श्री कृष्ण के जन्मोत्सव और उनकी बाल लीलाओं पर आधारित एक शानदार लघु नाटिका (Mini Drama) को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस नाटिका में कई रोंगटे खड़े कर देने वाले और भावुक दृश्य शामिल थे:
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- \r\n कारागार का खुलना: देवकी और वासुदेव के बंदी होने और भगवान के जन्म के समय जादुई तरीके से कारावास के ताले खुलने का दृश्य।\r\n \r\n
- \r\n यमुना पार करना: घोर अंधकार और तूफानी रात में वासुदेव द्वारा टोकरी में नन्हे कान्हा को रखकर उफनती यमुना नदी को पार करना।\r\n \r\n
- \r\n कालिया मर्दन और कंस वध: भगवान कृष्ण द्वारा अपने अदम्य साहस से कालिया नाग का घमंड तोड़ना और अत्याचारी मामा कंस का वध करना। इन सभी पौराणिक घटनाओं का मंचन इतनी जीवंतता के साथ किया गया कि दर्शक पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गए।\r\n \r\n
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नर्सरी के बच्चों की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
\r\n\r\nनर्सरी से लेकर कक्षा तीसरी तक के नन्हे-मुन्ने बच्चे राधा और कृष्ण की वेशभूषा में सज-धज कर विद्यालय पहुंचे थे। माथे पर मोर मुकुट, हाथों में बांसुरी और पीले वस्त्रों में सजे ये बच्चे पूरे कार्यक्रम में आकर्षण का मुख्य केंद्र बने रहे।
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विशेष रूप से नर्सरी के छोटे बच्चों द्वारा एक अत्यंत आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। इस झांकी में वासुदेव-देवकी का कारावास, कृष्ण कन्हैया की प्रसिद्ध 'मटकी फोड़' लीला और यमुना नदी के मनमोहक दृश्यों की झलकियां प्रस्तुत की गईं, जिसने सभी के चेहरों पर मुस्कान ला दी।
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इन होनहार बच्चों ने किया शानदार प्रदर्शन
\r\n\r\nइस भव्य आयोजन में विद्यालय के अनेक छात्र-छात्राओं ने बहुत ही उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इनमें मुख्य रूप से वेदांश वशिष्ठ, चैतन्य वशिष्ठ, अर्णव वर्मा, दिव्या, कार्तिक, शगुन, अंकिता, योगीता, वैभव, जयवर्धन, संजना, आरोही, पहल, अव्या, पार्थ, मानवी, मुस्कान, अंशिका, नैना, नंदिनी, मानवी और जायश आदि बच्चों का प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा।
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शिक्षकों और प्रबंधन का रहा अहम योगदान
\r\n\r\nकिसी भी कार्यक्रम की सफलता के पीछे शिक्षकों की कड़ी मेहनत होती है। इस आयोजन के लिए गायन और नृत्य की बेहतरीन तैयारी संगीत शिक्षिका श्रीमती संतोष और शिक्षक कबीर वशिष्ठ द्वारा करवाई गई थी। वहीं, छोटे-छोटे बच्चों को मनमोहक वेशभूषा पहनाने और उन्हें मंच के लिए तैयार करने में शिक्षिका श्रीमती मनजीत कौर, अनीता, पायल और शिवानी आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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विद्यालय के डायरेक्टर श्री शेखर अवस्थी जी ने मंच से सभी बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को जन्माष्टमी की ढेरों शुभकामनाएं दीं और इस सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही कार्यक्रम के सफल संचालन में श्री आर० एन० सिंह, अंकित सिसौदिया, अंकित शर्मा, आकान्शु और बीना अग्रवाल आदि सदस्यों की भूमिका भी अत्यंत सराहनीय रही।
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"कृष्ण केवल भगवान नहीं, एक आदर्श गुरु और मित्र भी हैं"
\r\n\r\nकार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती भारती सिंह ने सभी को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायक भाषण में उन्होंने कहा, "श्री कृष्ण केवल हमारे आराध्य भगवान ही नहीं हैं, बल्कि वे एक आदर्श गुरु, एक सच्चे मित्र और एक बेहतरीन मार्गदर्शक (नेता) भी हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में उनके द्वारा दिया गया कर्म और धर्म का उपदेश आज के इस आधुनिक युग में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना महाभारत काल में था। हमें उनके जीवन से कर्म करने और सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा लेनी चाहिए।"
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