खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद दर्दनाक और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। कम उम्र में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर से चिकित्सा जगत और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मेरठ के मवाना थाना क्षेत्र स्थित बसंत वैली पब्लिक स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले मात्र 13 साल के एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की वजह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि स्कूल के वॉशरूम में आया 'साइलेंट हार्ट अटैक' बताया जा रहा है। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, वह सन्न रह गया। सुबह जो बच्चा अपनी पीठ पर बस्ता टांगकर हंसते-खेलते स्कूल गया था, चंद घंटों बाद उसकी बेजान देह घर लौटी, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। यह पूरी घटना सोमवार दोपहर की है, जिसने स्कूल प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक में हड़कंप मचा दिया है।READ ALSO:-बिजनौर में न्याय का महापर्व: 12 सितंबर को लगेगी 'राष्ट्रीय लोक अदालत', सालों पुराने विवादों का होगा चंद मिनटों में मुफ्त निपटारा!
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छुट्टी की घंटी बजी, लेकिन ई-रिक्शा तक नहीं पहुंचा कुनाल

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मृतक छात्र की पहचान 13 वर्षीय कुनाल शर्मा के रूप में हुई है। कुनाल मवाना के ही मोहल्ला काबिली गेट, कलावदा रोड का निवासी था और रोजमर्रा की तरह सोमवार को भी ई-रिक्शा से स्कूल गया था। घटनाक्रम के अनुसार, सोमवार दोपहर को जब स्कूल की छुट्टी की घंटी बजी, तो सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं से बाहर निकलकर घर जाने के लिए अपने वाहनों की ओर दौड़ पड़े। कुनाल का ई-रिक्शा चालक भी स्कूल के बाहर उसका और अन्य बच्चों का इंतजार कर रहा था। कुनाल के साथ ई-रिक्शा में जाने वाले बाकी सभी बच्चे तो आकर अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए, लेकिन कुनाल नहीं आया।
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 Kaili(Meerut)-Meerut News ( कैली(मेरठ) - मेरठ न्यूज़): Kaili(Meerut) -  Meerut News Hindi Samachar, Latest News Headlines and Breaking News -  Dainik Bhaskar

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चालक को लगा कि शायद कुनाल किसी टीचर के पास रुक गया होगा या अपनी क्लास में कुछ काम कर रहा होगा। उसने करीब 15 मिनट तक स्कूल के गेट पर इंतजार किया। जब काफी देर हो गई और कुनाल बाहर नहीं आया, तो चालक को चिंता हुई। उसने खुद स्कूल के अंदर जाकर कुनाल को तलाशने का फैसला किया। चालक सबसे पहले कुनाल के क्लासरूम में गया, लेकिन वहां सन्नाटा था। कुनाल वहां नहीं मिला। इसके बाद चालक ने स्कूल में मौजूद कुछ अन्य बच्चों और स्टाफ से पूछताछ की। तभी एक बच्चे ने बताया कि उसने कुनाल को छुट्टी होने के ठीक बाद वॉशरूम की तरफ जाते हुए देखा था।
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बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद, छत से दिखा दिल दहला देने वाला मंजर

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जानकारी मिलते ही ई-रिक्शा चालक तुरंत स्कूल के वॉशरूम की तरफ भागा। वहां पहुंचकर उसने देखा कि वॉशरूम का एक दरवाजा अंदर से बंद है। चालक ने कई बार दरवाजा खटखटाया और कुनाल का नाम लेकर जोर-जोर से आवाजें लगाईं, लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई और न ही कोई जवाब मिला। लगातार आवाजें देने के बावजूद जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, तो चालक घबरा गया। उसकी घबराहट देखकर स्कूल का स्टाफ भी वहां इकट्ठा हो गया।
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स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, दरवाजा तोड़ने से पहले यह तय किया गया कि ऊपर से झांक कर देखा जाए। स्कूल का एक स्टाफ सदस्य किसी तरह छत के रास्ते ऊपर चढ़ा और वॉशरूम के अंदर झांका। अंदर का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। कुनाल वॉशरूम के फर्श पर बेसुध पड़ा हुआ था। इसके बाद बिना कोई देरी किए, आनन-फानन में अंदर से किसी तरह दरवाजा खोला गया और कुनाल को बाहर निकाला गया। उसकी आंखें बंद थीं, शरीर पूरी तरह से शिथिल पड़ चुका था और उसकी सांसें नहीं चल रही थीं। बच्चे की यह हालत देखकर स्कूल स्टाफ के हाथ-पैर फूल गए और उन्होंने तुरंत कुनाल के परिजनों को फोन पर इस खौफनाक घटना की सूचना दी।
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अस्पतालों के चक्कर और डॉक्टरों का वो जवाब जिसने परिजनों को तोड़ दिया

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जैसे ही कुनाल के पिता धर्मेंद्र शर्मा को स्कूल से फोन गया, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह बदहवास हालत में भागते हुए सीधे स्कूल पहुंचे। बिना एक पल भी गंवाए, परिवार वाले कुनाल को मवाना के ही एक नजदीकी प्राइवेट डॉक्टर के पास लेकर दौड़े। डॉक्टर ने जांच की और स्थिति गंभीर बताते हुए जवाब दे दिया। इसके बाद वे दूसरे निजी डॉक्टर के पास गए, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी; दोनों डॉक्टरों ने कुनाल की नब्ज टटोलने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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लेकिन एक पिता का दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि उनका 13 साल का बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। एक आखिरी उम्मीद के सहारे, परिजन कुनाल को लेकर तुरंत मवाना से मेरठ शहर की ओर भागे और उसे मेरठ के प्रतिष्ठित सुशीला जसवंत राय अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों की एक टीम ने कुनाल की गहन जांच की। ईसीजी और अन्य प्राथमिक जांचों के बाद डॉक्टरों ने भी वही दुखद बात दोहराई— कुनाल की मौत हो चुकी थी। जब परिजनों ने मौत का कारण पूछा, तो डॉक्टरों ने लक्षणों के आधार पर बताया कि बच्चे को अचानक 'हार्ट अटैक' (Cardiac Arrest) आया था, जिसकी वजह से उसकी जान चली गई।
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13 साल की उम्र में हार्ट अटैक? परिवार गहरे सदमे में

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कुनाल के पिता धर्मेंद्र शर्मा और मां अनीता के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। कुनाल तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था। उसकी एक बड़ी बहन साक्षी है, जबकि छोटा भाई संचित शर्मा है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। कुनाल की मां अनीता बार-बार बेसुध हो रही थीं। परिजनों का रोते हुए बस यही कहना था कि कुनाल पूरी तरह से स्वस्थ था। उसे पहले कभी भी दिल से जुड़ी कोई बीमारी, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसी कोई परेशानी नहीं हुई थी। वह एक सामान्य, एक्टिव बच्चा था। ऐसे में महज 13 साल की उम्र में अचानक हार्ट अटैक आ जाना उनके समझ से परे है। पूरा मोहल्ला इस घटना से स्तब्ध है कि आखिर एक हंसते-खेलते बच्चे का दिल अचानक कैसे धड़कना बंद कर सकता है।
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पुलिस की दस्तक और परिजनों का फैसला

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स्कूल के वॉशरूम में छात्र की रहस्यमयी मौत की यह सनसनीखेज खबर जंगल की आग की तरह पूरे मवाना क्षेत्र में फैल गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मवाना थाना पुलिस भी तुरंत हरकत में आई। सूचना पाकर पुलिस की एक टीम जांच के लिए कुनाल के घर पहुंची। पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराना चाहती थी ताकि मौत के सही कारणों (जैसे कोई छिपी हुई बीमारी, फूड पॉइजनिंग या ब्रेन हैमरेज) का आधिकारिक तौर पर पता लगाया जा सके।
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हालांकि, शोकाकुल परिजनों ने पुलिस को किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई करने से साफ मना कर दिया। परिवार ने लिखित में पुलिस को अवगत कराया कि वे अपने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते हैं और न ही उन्हें स्कूल प्रशासन या किसी अन्य व्यक्ति पर कोई शक या शिकायत है। परिजनों की इस गुजारिश और भावनाओं का सम्मान करते हुए पुलिस बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट गई। इसके बाद गमगीन माहौल में परिवार बच्चे के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गया।
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कम उम्र में हार्ट अटैक: एक बढ़ती हुई गंभीर चिंता

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कुनाल की इस असामयिक मौत ने एक बार फिर से इस ज्वलंत मुद्दे को सतह पर ला दिया है कि आखिर बच्चों और युवाओं में हार्ट अटैक के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें अघोषित जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Defects), जीवनशैली में बदलाव, अत्यधिक मानसिक तनाव या कुछ मामलों में कोविड-19 के बाद शरीर के अंगों पर पड़े दूरगामी प्रभाव (Post-Covid Complications) शामिल हैं। कई बार बच्चों में 'हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी' जैसी हृदय की मांसपेशी की बीमारी होती है, जो बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है। यह घटना सभी अभिभावकों और स्कूलों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए और स्कूलों में आपातकालीन सीपीआर (CPR) ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी अनहोनी को रोका जा सके।