खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में स्थित दूधली गांव में एक डिग्री कॉलेज की बिल्डिंग का इस्तेमाल शिक्षा देने के बजाय एक बड़े आपराधिक सिंडिकेट द्वारा किया जा रहा था। इस कॉलेज भवन के भीतर पिछले आठ महीनों से धड़ल्ले से नकली सिगरेट बनाने की अवैध फैक्टरी संचालित हो रही थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्थानीय पुलिस को महीनों तक इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस गोरखधंधे की भनक तक नहीं लगी। जब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इस फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शिक्षा के मंदिर (डिग्री कॉलेज) की आड़ में चल रहे इस अवैध कारोबार ने सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-बिजनौर के मोहम्मदपुर देवमल में विधिक जागरूकता शिविर का भव्य आयोजन: बाल विवाह को जड़ से खत्म करने का संकल्प, लोक अदालत से मिलेगा त्वरित न्याय!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस खुलासे के बाद जहां एक ओर तस्करों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी है। पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले में विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
\r\n\r\n

 नकली सिगरेट बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

पुलिस की घोर लापरवाही: चौकी प्रभारी और बीट कांस्टेबल निलंबित

\r\n\r\n
किसी भी इलाके में अगर कोई अवैध फैक्टरी महीनों तक संचालित होती रहे, तो वहां की स्थानीय पुलिस और बीट कांस्टेबल की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ जाती है। दूधली गांव में चल रही इस नकली सिगरेट फैक्टरी के मामले में भी ठीक ऐसा ही हुआ। मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने पाया कि स्थानीय पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह से विफल रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अपने ही क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर मशीनों के जरिए नकली सिगरेट का उत्पादन, कच्चे माल की सप्लाई और तैयार माल की डिलीवरी हो रही थी, लेकिन हस्तिनापुर थाने की जंबूद्वीप चौकी पुलिस बेखबर रही। इस घोर लापरवाही और कर्तव्यहीनता के आरोप में एसएसपी ने जंबूद्वीप चौकी प्रभारी उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) शिवेंद्र कुमार और क्षेत्र के बीट कांस्टेबल उमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि बिना स्थानीय पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत के इतने लंबे समय तक ऐसा अवैध कारोबार नहीं चल सकता।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसएसपी ने निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच की जिम्मेदारी क्षेत्राधिकारी (CO) मवाना को सौंपी गई है। सीओ मवाना अब यह जांच करेंगे कि क्या इन पुलिसकर्मियों की इस आपराधिक नेटवर्क के साथ कोई संलिप्तता थी या यह महज लापरवाही का मामला है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

खादर के सुनसान इलाके का उठाया गया फायदा

\r\n\r\n
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करों ने इस अवैध फैक्टरी को स्थापित करने के लिए दूधली गांव के 'खादर' इलाके को जानबूझकर चुना था। हस्तिनापुर का खादर क्षेत्र गंगा नदी के तटीय इलाके में आता है, जो भौगोलिक रूप से थोड़ा दुर्गम और मुख्य शहर से कटा हुआ है। इस इलाके में पुलिस की गश्त अमूमन कम होती है और आबादी भी विरल है। अपराधियों ने इसी सन्नाटे और भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने एक बंद पड़े डिग्री कॉलेज की बिल्डिंग को अपने गोरखधंधे का अड्डा बनाया, क्योंकि बाहर से देखने पर किसी को भी शक नहीं हो सकता था कि शिक्षा के इस संस्थान के अंदर जहर (नकली सिगरेट) बनाने का काम चल रहा होगा। यहां बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई गई थीं, भारी मात्रा में कच्चा तंबाकू, ब्रांडेड कंपनियों के नकली रैपर, पैकेजिंग का सामान और केमिकल बरामद हुआ है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं था, बल्कि करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाला एक सुगठित अपराध था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

गिरफ्तार आरोपी रवि किशोर सिर्फ एक मोहरा

\r\n\r\n
पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जिसका नाम रवि किशोर है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि रवि किशोर मूल रूप से कर्नाटक के बेंगलुरु का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में वह देश की राजधानी दिल्ली में रह रहा था। शुरुआत में रवि किशोर ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और बयान दिया कि वह खुद ही इस पूरी फैक्टरी का संचालन कर रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हालांकि, जब पुलिस की जांच टीमों ने बरामद दस्तावेजों, मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स (CDR) और बैंक खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाली, तो कहानी पूरी तरह से पलट गई। जांच अधिकारियों को पुख्ता सबूत मिले हैं कि रवि किशोर इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नहीं है। वह इस बड़े सिंडिकेट का महज एक छोटा सा मोहरा (Pawn) है, जिसे चंद रुपयों के लालच में इस फैक्टरी की देखरेख और संचालन के लिए यहां रखा गया था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: मास्टरमाइंड के तार कंबोडिया से जुड़े

\r\n\r\n
अब इस मामले में जो सबसे खतरनाक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, वह है इसका अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन। पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन्स की व्हाट्सएप चैट्स, इंटरनेट कॉलिंग रिकॉर्ड्स और पैसों के लेन-देन (हवाला ट्रांजैक्शन) से संकेत मिले हैं कि इस पूरे नेटवर्क के तार दक्षिण-पूर्व एशियाई देश कंबोडिया (Cambodia) तक जुड़े हो सकते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सूत्रों के मुताबिक, इस फैक्टरी को खड़ा करने के लिए जिस विदेशी फंड का इस्तेमाल किया गया था और जो केमिकल या मशीनरी यहां लाई गई थी, उसके पीछे बैठे मुख्य सरगना विदेश में बैठकर इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे हैं। कंबोडिया पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम, हवाला कारोबार और अवैध स्मगलिंग का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। ऐसे में कंबोडिया का नाम सामने आने से केंद्रीय खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस की कई टीमें

\r\n\r\n
इस इनपुट के बाद मेरठ पुलिस ने मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पुलिस की क्राइम ब्रांच, सर्विलांस सेल और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की टीमें लगातार काम कर रही हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कॉलेज की बिल्डिंग को किराये पर किसने लिया था और इसका एग्रीमेंट किसके नाम पर है?
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    फैक्टरी में कच्चा माल (Raw Material) किन राज्यों या देशों से सप्लाई हो रहा था?
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    यहां से बनकर तैयार होने वाली नकली सिगरेट किस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली और एनसीआर के बाजारों में खपाई जा रही थी?
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    क्या इस गिरोह का संबंध हवाला नेटवर्क या ड्रग्स सिंडिकेट से भी है?
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार

\r\n\r\n
नकली सिगरेट का यह कारोबार न केवल एक बड़ा आर्थिक अपराध है, बल्कि यह आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी एक भयानक खिलवाड़ है। असली सिगरेट के मुकाबले नकली सिगरेट में अत्यधिक घटिया स्तर के तंबाकू, निकोटीन और यहां तक कि लकड़ी के बुरादे तथा खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो फेफड़ों के लिए कई गुना ज्यादा घातक होते हैं। इसके अलावा, ब्रांडेड कंपनियों के रैपर लगाकर यह गिरोह सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व (Tax/GST) का चूना लगा रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
फिलहाल, मेरठ पुलिस की प्राथमिकता इस नेटवर्क के हर एक सदस्य को बेनकाब करना और मास्टरमाइंड को दबोचना है। कंबोडिया कनेक्शन के चलते पुलिस आवश्यकता पड़ने पर इंटरपोल (Interpol) या अन्य राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की भी मदद ले सकती है। यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि किस तरह माफिया और सफेदपोश अपराधी सुनसान इलाकों का फायदा उठाकर अपनी जड़ें जमा लेते हैं। अब देखना यह होगा कि सीओ मवाना की जांच में और क्या नए खुलासे होते हैं और कंबोडिया में बैठे आकाओं तक पुलिस के हाथ कब तक पहुंच पाते हैं।