शकील अहमद
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले और आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए 10 सितंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अन्याय, उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे मामलों पर सीधा संज्ञान लेने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women - NCW) नई दिल्ली की अध्यक्षा श्रीमती विजया राहटकर बिजनौर का सघन दौरा कर रही हैं। इस दौरे का मुख्य केंद्र बिंदु विकास भवन सभागार में आयोजित होने वाली 'महिला जनसुनवाई' (Mahila Jansunwai) है। इस पहल का उद्देश्य उन पीड़ित महिलाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है, जिनकी आवाज या तो स्थानीय स्तर पर सुनी नहीं जाती या फिर विभागीय फाइलों में कहीं दब कर रह गई है।READ ALSO:-बागपत एक्सप्रेसवे पर काल का कहर: दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की पिकअप पलटी, 13 की मौत; 30 मीटर तक बिखर गया मंजर
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कार्यक्रम की रूपरेखा और समय सारिणी

\r\n\r\n
जिला प्रोबेशन अधिकारी, बिजनौर, विमल कुमार चौबे ने इस पूरे कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए सर्वसाधारण को सूचित किया है। उनके द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती विजया राहटकर 10 सितंबर 2026 को जनपद बिजनौर के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरे के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें सबसे अहम 'महिला जनसुनवाई' है। यह जनसुनवाई विकास भवन के मुख्य सभागार में आयोजित की जाएगी। जनसुनवाई का समय दोपहर 12:00 बजे से लेकर अपराह्न 2:00 बजे तक तय किया गया है। इन दो घंटों के दौरान, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा सीधे पीड़ित महिलाओं से रूबरू होंगी, उनकी व्यथा सुनेंगी और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रार्थना पत्रों एवं शिकायतों का गहनता से अवलोकन करेंगी।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

अधिकारियों की सीधी जवाबदेही और ऑन-द-स्पॉट समाधान

\r\n\r\n
इस जनसुनवाई की सबसे बड़ी और प्रभावशाली विशेषता यह है कि इसमें केवल शिकायतें सुनी ही नहीं जाएंगी, बल्कि उनका मौके पर ही निस्तारण (Spot Disposal) करने की ठोस व्यवस्था भी की गई है। जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि जनसुनवाई के दौरान जिले के सभी संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी मौजूद रहेंगे। इसमें पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, समाज कल्याण विभाग, प्रोबेशन विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और पंचायती राज विभाग के प्रमुख अधिकारी शामिल होंगे। जब कोई पीड़ित महिला अपना प्रार्थना पत्र आयोग की अध्यक्षा के समक्ष प्रस्तुत करेगी, तो उस मामले से संबंधित विभागीय अधिकारी को तुरंत तलब किया जाएगा। अध्यक्षा की उपस्थिति में ही अधिकारी से जवाबदेही तय की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीड़िता को न्याय के लिए दर-दर न भटकना पड़े। पारिवारिक विवाद, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद या कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

समीक्षा बैठक: कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा की होगी पड़ताल

\r\n\r\n
दोपहर 2:00 बजे जनसुनवाई के समापन के ठीक बाद, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इस अहम बैठक में बिजनौर के जिलाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP), मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सहित पुलिस और प्रशासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा जिले में महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के ग्राफ की समीक्षा करना होगा। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं, जैसे मिशन शक्ति (Mission Shakti), बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन की जमीनी हकीकत और उनके क्रियान्वयन का भी बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा। आयोग की अध्यक्षा पुलिस थानों में लंबित महिला संबंधी मामलों की प्रगति रिपोर्ट भी तलब कर सकती हैं, जिससे जांच में हो रही किसी भी प्रकार की लापरवाही को उजागर किया जा सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जिला प्रोबेशन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका और तैयारियां

\r\n\r\n
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी विमल कुमार चौबे और उनकी पूरी टीम युद्ध स्तर पर तैयारियां कर रही है। विकास भवन सभागार में महिलाओं के बैठने, पीने के पानी, और सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की जा रही है। प्रोबेशन विभाग का मुख्य कार्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का संरक्षण करना है, इसलिए इस जनसुनवाई में उनकी भूमिका एक नोडल एजेंसी के रूप में उभर कर सामने आ रही है। विभाग द्वारा यह भी प्रयास किया जा रहा है कि सुदूर ग्रामीण अंचलों की महिलाओं तक इस जनसुनवाई की सूचना समय रहते पहुंच जाए, ताकि अधिक से अधिक पीड़ित महिलाएं इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी समस्याएं आयोग तक पहुंचा सकें। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आशा बहुओं के माध्यम से भी गांव-गांव में इस कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

न्याय की आस और प्रशासन पर बढ़ता दबाव

\r\n\r\n
राष्ट्रीय महिला आयोग का यह दौरा स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है। अक्सर देखा गया है कि जब राष्ट्रीय स्तर के आयोग किसी जिले का दौरा करते हैं, तो स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति रहती है। जो मामले महीनों से थानों या तहसीलों में लंबित पड़े रहते हैं, उनकी फाइलें तेजी से खंगाली जाने लगती हैं। बिजनौर में भी इस दौरे से ठीक पहले कई पुराने मामलों में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है। महिलाओं के मन में एक नई उम्मीद जगी है कि अब उनके मामलों में हीलाहवाली नहीं होगी और उन्हें त्वरित न्याय मिल सकेगा। विशेष रूप से वे महिलाएं, जो थानों के चक्कर काट-काट कर निराश हो चुकी हैं, वे इस जनसुनवाई को एक आखिरी और मजबूत उम्मीद के रूप में देख रही हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यप्रणाली और उसका प्रभाव

\r\n\r\n
राष्ट्रीय महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करने के लिए किया गया है। जब भी आयोग की अध्यक्षा या सदस्य किसी जिले में जनसुनवाई के लिए जाते हैं, तो उनके पास सिविल कोर्ट (Civil Court) के समान शक्तियां होती हैं। इसका अर्थ यह है कि वे किसी भी अधिकारी को समन जारी कर सकती हैं, किसी भी सरकारी रिकॉर्ड की मांग कर सकती हैं और मामले की तुरंत जांच के आदेश दे सकती हैं। श्रीमती विजया राहटकर के नेतृत्व में आयोग ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाई है। बिजनौर में होने वाली यह जनसुनवाई इसी नीति का हिस्सा है, जिसका मकसद केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर महिलाओं की पीड़ा को समझना और उसका स्थायी समाधान निकालना है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

महिलाओं से की गई विशेष अपील

\r\n\r\n
जिला प्रशासन और प्रोबेशन विभाग ने बिजनौर की सभी माताओं और बहनों से अपील की है कि यदि वे किसी भी प्रकार की प्रताड़ना, अन्याय या विभागीय लापरवाही का शिकार हैं, तो वे बेझिझक 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे से पहले विकास भवन सभागार पहुंचें। महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे अपनी शिकायत के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज, पूर्व में दी गई शिकायतों की प्रतियां और पहचान पत्र साथ लेकर आएं, ताकि मामले की सुनवाई और निस्तारण में कोई तकनीकी अड़चन न आए। यह जनसुनवाई महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक बेहद सार्थक कदम है, जो यह संदेश देता है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है।