खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए 'राष्ट्रीय जनगणना 2027' के दूसरे और अंतिम चरण के शेड्यूल में संशोधन कर दिया गया है। जनगणना निदेशालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, अब यूपी में दूसरे चरण की घर-घर गणना का कार्य 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक संपन्न कराया जाएगा।READ ALSO:-बिजनौर में लाउडस्पीकर पर पुलिस का बड़ा एक्शन! धार्मिक स्थलों से उतारे गए स्पीकर, SP केके बिश्नोई ने बताया पूरा अभियान
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इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है, क्योंकि इसमें पहली बार सामाजिक संरचना को गहराई से समझने के लिए जातिगत जनगणना (Caste Census) को भी शामिल किया जा रहा है।
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जनगणना 2027: नए शेड्यूल की पूरी समय-सारणी

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कार्य/प्रक्रिया
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पूर्व निर्धारित तिथि
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नई संशोधित तिथि
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राज्य स्तरीय प्रशिक्षण (State Training)
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16 सितंबर से शुरू (सितंबर अंत तक)
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नागरिक स्वगणना (Self-Enumeration)
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16 नवंबर से 30 नवंबर तक
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घर-घर जाकर गणना (Door-to-Door Census)
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9 फरवरी से 28 फरवरी 2027
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1 दिसंबर से 4 जनवरी
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जनगणना संदर्भ समय (Reference Time)
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1 मार्च 2027
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5 जनवरी (रात 12:00 बजे)
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आंकड़ों का पुनरीक्षण (Data Revision)
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5 जनवरी से 9 जनवरी तक
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चुनाव के कारण क्यों बदला गया शेड्यूल?

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पूर्व में जनगणना के दूसरे चरण का कार्यक्रम 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक प्रस्तावित था, जिसके लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों की चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक अमले की व्यस्तता को देखते हुए सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है।
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चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। यदि जनगणना और चुनाव की तिथियां आपस में टकरातीं, तो दोनों कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती थी। इसी स्थिति से बचने के लिए जनगणना को चुनाव आचार संहिता और मतदान की प्रक्रियाओं से पहले ही संपन्न कराने का निर्णय लिया गया है।
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स्वगणना (Self-Enumeration): खुद दर्ज कर सकेंगे परिवार की जानकारी

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जनगणना प्रक्रिया को तकनीकी रूप से आधुनिक और सुगम बनाने के लिए नागरिकों को स्वगणना (Self-Enumeration) का विकल्प दिया जा रहा है।
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    अवधि: 16 नवंबर से 30 नवंबर तक देश और प्रदेश के नागरिकों को यह मौका मिलेगा।
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    प्रक्रिया: नागरिक ऑनलाइन वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां दर्ज कर सकेंगे।
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    लाभ: इससे गणना कर्मियों का समय बचेगा और आंकड़ों में गलतियों की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।
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जातिगत गणना समेत पूछे जाएंगे 40 महत्वपूर्ण सवाल

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जनगणना का यह दूसरा और अंतिम चरण केवल आबादी की संख्या गिनने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें प्रदेश के हर नागरिक के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और जनसांख्यिकी प्रोफाइल को दर्ज किया जाएगा। गणना कर्मी घर-घर जाकर नागरिकों से लगभग 40 सवालों के जवाब मांगेंगे:
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1. भाषा एवं साक्षरता:

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    मातृभाषा और अन्य सीखी गई भाषाओं का ज्ञान।
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    शैक्षणिक योग्यता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति।
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2. रोजगार एवं आजीविका:

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    मुख्य व्यवसाय, उद्योग, व्यापार या सेवा का स्वरूप।
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    रोजगार की स्थिति (सरकारी, निजी, स्वरोजगार या दैनिक मजदूरी)।
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3. निवास एवं प्रवास (Migration):

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    जन्म स्थान, पूर्व निवास स्थान और वर्तमान स्थायी निवास का पता।
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4. सामाजिक एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरण:

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    जातिगत विवरण: पहली बार परिवार के सदस्यों की सामाजिक जाति का स्पष्ट आंकड़ा जुटाया जाएगा।
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    परिवार की संरचना: परिवार में बच्चों की संख्या और बुजुर्गों की स्थिति।
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    स्वास्थ्य एवं पहचान: कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, बैंक खातों की कुल संख्या।
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    पहचान संबंधी दस्तावेज: मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर (यदि उपलब्ध हो) और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा डेटा।
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प्रशासनिक तैयारी: 6 लाख से अधिक कर्मी संभालेंगे कमान

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उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में जनगणना को त्रुटिहीन तरीके से पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं:
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    कर्मचारियों की तैनाती: इस अंतिम चरण को पूरा करने के लिए प्रदेश भर में 6 लाख से अधिक गणना कर्मियों (Enumerators & Supervisors) की ड्यूटी लगाई जाएगी।
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    सघन प्रशिक्षण: राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश में राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण 16 सितंबर से शुरू होकर इसी माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।
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    क्षेत्रीय ब्लॉक: पूरे प्रदेश को छोटे-छोटे ब्लॉक में विभाजित किया गया है ताकि कोई भी घर या ढाणी छूट न पाए।
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पहला चरण: 6 करोड़ मकानों की हो चुकी है सूचीकरण

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जनगणना का पहला चरण (हॉसलिस्टिंग एवं मकान सूचीकरण) सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा चुका है:
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    समय सीमा: पहला चरण 22 मई से 20 जून के बीच पूरा किया गया था (जिसमें 7 से 21 मई तक स्वगणना का अवसर दिया गया था)।
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    मानव संसाधन: पहले चरण में लगभग 5 लाख कर्मचारियों ने कार्य किया था।
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    कवरेज: प्रदेश के 1.04 लाख गांवों और 14,983 शहरी वार्डों में स्थित 3,90,717 मकान सूचीकरण ब्लॉकों में सर्वे पूरा किया गया।
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    मकानों की संख्या: इस दौरान कुल 6 करोड़ मकानों का पंजीकरण किया गया।
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30 करोड़ के पार पहुंच सकती है उत्तर प्रदेश की आबादी!

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पहला चरण पूरा होने के बाद आए आंकड़ों के आधार पर अगर एक परिवार में औसतन 5 सदस्य माने जाएं, तो उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 30 करोड़ के आसपास पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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यदि यह आंकड़ा सही साबित होता है, तो उत्तर प्रदेश दुनिया के कई बड़े देशों की कुल आबादी से भी बड़ा राज्य बन जाएगा। हालांकि, प्रदेश की वास्तविक, सटीक और प्रामाणिक आबादी का अंतिम आंकड़ा 5 से 9 जनवरी तक होने वाले आंकड़ों के पुनरीक्षण (Data Revision) के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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जनगणना 2027 का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

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यूपी में चुनाव से ठीक पहले जातिगत जनगणना के आंकड़े जुटाना और जनगणना संपन्न कराना राज्य की राजनीति और नीति-निर्माण पर गहरा प्रभाव डालेगा:
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    सटीक नीतियां: जातिगत और आर्थिक आंकड़ों से सरकार को वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    संसाधनों का आवंटन: शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के बजट आवंटन में नए जनसंख्या आंकड़े अहम भूमिका निभाएंगे।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    पारदर्शिता: डिजिटल माध्यम और स्वगणना से इस बार फर्जीवाड़े और दोहरी प्रविष्टियों पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
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  6. \r\n
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उत्तर प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की जाती है कि वे 16 नवंबर से शुरू हो रही स्वगणना सुविधा का लाभ उठाएं अथवा 1 दिसंबर से आने वाले गणना कर्मियों को सही और सटीक विवरण देकर इस राष्ट्रीय महाअभियान में अपना योगदान दें।