खबरीलाल डेस्क
मेरठ (खबरीलाल डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार की सुबह एक परिवार के लिए ऐसा मनहूस पल लेकर आई, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अपनी बड़ी बहन को स्कूल बस में बैठाने के लिए दादी की उंगली पकड़कर गए 3 साल के एक मासूम बच्चे की उसी स्कूल बस के पहिए के नीचे आने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह हृदय विदारक घटना मेरठ के मवाना स्थित परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के बढ़ला गांव में हुई है। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, वहीं पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज होकर परिजनों ने थाने के सामने शव रखकर कई घंटों तक यातायात बाधित रखा।READ ALSO:-खराब रास्ता, ऑर्डर कैंसल करने की बात और फिर बंधक बनाकर पिटाई: मेरठ में डिलीवरी बॉय के साथ खौफनाक सुलूक, पुलिस जांच में जुटी
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किसान परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: घटना की पृष्ठभूमि जानकारी के अनुसार, परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बढ़ला गांव निवासी प्रिंस चौधरी पेशे से एक साधारण किसान हैं और खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। प्रिंस चौधरी के परिवार में उनकी पत्नी, 6 साल की एक बेटी जसवीर और 3 साल का एक छोटा बेटा नवनीत था। जसवीर पास के ही भावना इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा दो (Class 2) की छात्रा है। रोजाना की तरह गुरुवार की सुबह भी जसवीर को स्कूल ले जाने के लिए स्कूल की बस गांव में आई थी। सुबह के लगभग 8 बज रहे थे और गांव में सब कुछ सामान्य था। कोई नहीं जानता था कि अगले ही पल इस परिवार पर दुखों का इतना बड़ा पहाड़ टूटने वाला है।
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 मेरठ में स्कूल बस के सामने आने से मासूम बच्चे की मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। - Dainik Bhaskar

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दादी की आंखों के सामने घटा मौत का खौफनाक मंजर रोजमर्रा की तरह गुरुवार सुबह भी बच्चों की दादी उर्मिला देवी अपनी 6 साल की पोती जसवीर को स्कूल बस में बैठाने के लिए गांव के बाहर मुख्य सड़क तक गईं। उनके साथ उनका 3 साल का पोता नवनीत भी अपनी दीदी को बाय करने के लिए जिद करके साथ आ गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, दादी उर्मिला देवी ने सड़क के किनारे नवनीत को सुरक्षित खड़ा कर दिया और खुद जसवीर का हाथ पकड़कर उसे स्कूल बस के दरवाजे तक ले गईं।
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जैसे ही जसवीर बस के अंदर दाखिल हुई और दादी वापस मुड़ीं, उसी वक्त बस के ड्राइवर ने बिना कंडक्टर की मदद लिए और बिना बाहर देखे बस को लापरवाही से आगे बढ़ा दिया। इसी बीच, छोटा नवनीत बस के पीछे-पीछे चलने लगा। मासूम नवनीत को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह मौत के कितने करीब जा रहा है। अचानक बस का विशालकाय अगला पहिया मासूम नवनीत के ऊपर चढ़ गया।
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चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़ जैसे ही बस का पहिया बच्चे के ऊपर से गुजरा, मौके पर मौजूद ग्रामीणों और दादी उर्मिला देवी की चीखें निकल गईं। लोगों ने तुरंत शोर मचाकर बस के ड्राइवर को रुकने का इशारा किया। ड्राइवर ने ब्रेक लगाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 3 साल का मासूम नवनीत खून से लथपथ होकर सड़क पर बेसुध पड़ा था।
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आनन-फानन में बदहवास परिजन और ग्रामीण बच्चे को लेकर पास के ही एक निजी अस्पताल की तरफ दौड़े। हर किसी को उम्मीद थी कि शायद मासूम की सांसे लौट आएं, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद नवनीत को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि बस का पहिया सीधे बच्चे के महत्वपूर्ण अंगों पर चढ़ गया था, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई थी। इस खबर ने उर्मिला देवी और पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
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पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल और थाने पर हंगामा मासूम नवनीत की मौत की खबर जैसे ही बढ़ला गांव में फैली, वहां मातम के साथ-साथ भयंकर आक्रोश भी फैल गया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। परिजनों का गुस्सा स्कूल प्रबंधन और बस ड्राइवर की घोर लापरवाही के साथ-साथ पुलिस प्रशासन पर भी फूट पड़ा।
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गुस्साए परिजन और ग्रामीण बच्चे का शव लेकर सीधे परीक्षितगढ़ थाने पहुंचे और आरोपी ड्राइवर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। परिजनों का गंभीर आरोप है कि वे शव लेकर थाने में बैठे रहे, लेकिन लगभग 2 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस ने मामले का कोई संज्ञान नहीं लिया और न ही कोई उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की।
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सड़क पर रखा मासूम का शव और लगा लंबा जाम पुलिस के इस कथित ढुलमुल और असंवेदनशील रवैये से आक्रोशित होकर ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने थाने के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर मासूम बच्चे का शव रख दिया और सड़क के दोनों ओर जाम लगा दिया। जाम लगने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारी ग्रामीण लगातार पुलिस प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय की गुहार लगा रहे थे। उनका साफ कहना था कि जब तक आरोपी ड्राइवर की गिरफ्तारी और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं लिया जाता, वे सड़क से नहीं हटेंगे।
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प्रशासनिक अधिकारियों की दौड़-भाग और समझौते की पटकथा थाने के बाहर हंगामा और सड़क जाम होने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति को बिगड़ता देख एसडीएम (SDM), सीओ (CO) और कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों को समझाना-बुझाना शुरू किया।
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अधिकारियों ने परिजनों को आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। घटना का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है, जिसमें पूरी घटना साफ तौर पर कैद हुई है और ड्राइवर की लापरवाही स्पष्ट नजर आ रही है। पुलिस अधिकारियों के काफी देर तक समझाने और कड़ी कार्रवाई के लिखित आश्वासन के बाद आखिरकार परिजनों ने जाम खोला।
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पोस्टमार्टम से इनकार और थाने का बयान इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस और स्कूल प्रबंधन के बीच बातचीत हुई। परीक्षितगढ़ थाना प्रभारी केदार नाथ सिंह ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने अपनी तरफ से वैधानिक कार्रवाई करते हुए बच्चे के शव का पंचनामा भर लिया था।
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हालांकि, थाना प्रभारी के अनुसार, पीड़ित परिवार और स्कूल प्रबंधन (भावना इंटरनेशनल स्कूल) के बीच बाद में आपसी समझौता हो गया। परिजनों ने अपने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम (Postmortem) कराने से साफ इनकार कर दिया। चूंकि परिजनों ने कोई आधिकारिक तहरीर देकर आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने से मना कर दिया और समझौता पत्र सौंप दिया, इसलिए पुलिस ने शव को बिना पोस्टमार्टम कराए ही परिजनों को सौंप दिया।
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स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल भले ही यह मामला आपसी समझौते के तहत पुलिस फाइलों में शांत हो गया हो, लेकिन इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर स्कूल बसों के संचालन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार, हर स्कूल बस में एक प्रशिक्षित ड्राइवर के साथ-साथ एक अटेंडेंट (कंडक्टर) का होना अनिवार्य है, जिसकी जिम्मेदारी बच्चों को सुरक्षित चढ़ाना और उतारना होती है।
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इस घटना में यदि बस कंडक्टर अपनी जिम्मेदारी निभाता और बस के बाहर खड़े होकर नजर रखता, तो शायद 3 साल के नवनीत की जान बच सकती थी। ड्राइवर द्वारा बिना आसपास देखे बस को आगे बढ़ा देना एक ऐसी आपराधिक लापरवाही है, जिसकी कीमत एक निर्दोष बच्चे को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधनों की जवाबदेही तय करे, ताकि भविष्य में किसी और उर्मिला देवी की आंखों के सामने उसके पोते की जान न जाए।