उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नूरपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक मामला सामने आया है। यहां के शांत माने जाने वाले ग्राम आजमपुर में उस वक्त अफरा-तफरी और भारी दहशत का माहौल पैदा हो गया, जब दो युवकों ने सरेआम तमंचे से फायरिंग कर दी। इस दुस्साहसिक घटना ने पूरे इलाके की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिनदहाड़े हुई इस फायरिंग की गूंज से न केवल ग्रामीण सहम गए, बल्कि आसपास के इलाकों में भी इस घटना की चर्चा आग की तरह फैल गई है।Read also:-बिजनौर: 10 सितंबर को पीड़ित महिलाओं को मिलेगा त्वरित न्याय, जनपद दौरे पर आ रहीं राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्षा विजया राहटकर
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कैसे शुरू हुआ खौफ का यह तांडव? मिली जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्राम आजमपुर में सब कुछ सामान्य दिनों की तरह चल रहा था। गांव के लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। बच्चे खेल रहे थे और बुजुर्ग चौपालों पर बैठे थे। तभी अचानक गांव की शांति को चीरते हुए गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दी। अचानक हुई इस फायरिंग से लोग सकते में आ गए। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक गोलियां क्यों चलने लगीं।
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जब तक लोग संभल पाते, तब तक यह स्पष्ट हो गया कि दो हथियारबंद युवकों ने गांव के भीतर घुसकर इस दहशतगर्द वारदात को अंजाम दिया है। गोलियों की आवाज सुनकर महिलाएं और बच्चे अपने-अपने घरों की तरफ भागने लगे, जिससे पूरे गांव में एक भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। गलियों में सन्नाटा पसर गया और हर तरफ सिर्फ खौफ का साया मंडराने लगा। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि खुलेआम कानून को चुनौती देने वाला कृत्य था।
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ग्रामीणों का अदम्य साहस और बदमाशों का दुस्साहस इस दहशत के बीच गांव के कुछ साहसी युवाओं और ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने इन हमलावरों को घेरने और पकड़ने का त्वरित निर्णय लिया। जैसे ही ग्रामीणों की भीड़ आरोपियों की तरफ बढ़ने लगी, आरोपियों को यह अहसास हो गया कि वे अब बुरी तरह घिर चुके हैं।
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ग्रामीणों ने दोनों युवकों में से एक की पहचान 'फैसल' के रूप में की है। जब ग्रामीणों ने फैसल और उसके अज्ञात साथी को दबोचने का पूरा प्रयास किया, तो स्थिति और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। खुद को घिरता देख फैसल ने सारी हदें पार करते हुए अपनी जेब से एक देसी तमंचा (अवैध हथियार) निकाल लिया और उसे सीधे निहत्थे ग्रामीणों की भीड़ पर तान दिया।
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कल्पना कीजिए उस खौफनाक मंजर की, जब एक अपराधी सरेआम निहत्थे नागरिकों के सीने पर बंदूक तान देता है। फैसल ने ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी दी और फायर करने का प्रयास भी किया। तमंचे की नली अपनी तरफ देखकर ग्रामीणों के कदम एक पल के लिए ठिठक गए। इसी क्षणिक हिचकिचाहट और दहशत का पूरा फायदा उठाते हुए दोनों आरोपी युवक मौके से भाग निकलने में कामयाब रहे।
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फरार होने की कहानी और मौके का सन्नाटा प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आरोपी गांव की संकरी गलियों का फायदा उठाते हुए तेजी से फरार हो गए। उनके हाथ में लहराता हुआ हथियार देखकर किसी की भी उनके पीछे अकेले भागने की हिम्मत नहीं हुई। आरोपियों के आंखों से ओझल होते ही गांव में तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। इस पूरी घटना के बाद से गांव का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। लोग अपने घरों के दरवाजे बंद करके बैठे हैं और हर किसी के चेहरे पर एक अनजाना खौफ साफ पढ़ा जा सकता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि अगर वे लोग थोड़ा और करीब होते या फैसल ने ट्रिगर दबा दिया होता, तो आज गांव में किसी बेगुनाह की जान जा सकती थी और एक बड़ा खून-खराबा हो सकता था।
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पुलिस की तत्काल एंट्री और जांच प्रक्रिया सूचना मिलते ही नूरपुर थाने की पुलिस बिना कोई समय गंवाए भारी लाव-लश्कर के साथ ग्राम आजमपुर पहुंच गई। पुलिस की गाड़ियों के सायरन से गांव की खामोशी टूटी। पुलिस के आला अधिकारियों ने भी घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया।
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जांच दल ने उन जगहों की गहनता से पड़ताल की जहां से फायरिंग की गई थी। इसके साथ ही, पुलिस ने घटना के चश्मदीदों, गांव के प्रधान और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के विस्तृत बयान दर्ज किए हैं। शुरुआती जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इस फायरिंग के पीछे की मुख्य वजह क्या थी? क्या यह किसी पुरानी रंजिश का नतीजा है, आपसी विवाद है, या फिर महज इलाके में अपना दबदबा और खौफ कायम करने की एक घटिया कोशिश?
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अवैध हथियारों (तमंचा संस्कृति) पर उठते गंभीर सवाल यह घटना एक बार फिर उस 'तमंचा संस्कृति' की तरफ इशारा करती है, जो समाज के लिए एक नासूर बनती जा रही है। सवाल यह उठता है कि इन युवकों के पास यह अवैध हथियार (तमंचा) और जिंदा कारतूस कहां से आए? युवाओं के हाथों में किताबों और रोजगार की जगह अवैध हथियारों का होना न सिर्फ पुलिस प्रशासन के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय है।
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स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से कड़े शब्दों में मांग की है कि इस घटना में शामिल दोनों आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी हो और उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में कठोरतम कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक आरोपी सलाखों के पीछे नहीं होंगे, तब तक गांव में शांति और सुरक्षा का भाव वापस नहीं लौट सकेगा।
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आगे की कार्रवाई और पुलिस का सख्त रवैया नूरपुर पुलिस ने फिलहाल पूरे मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। फरार आरोपी फैसल और उसके अज्ञात साथी की तलाश में पुलिस की कई विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। पुलिस न केवल आजमपुर बल्कि आसपास के तमाम गांवों और संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। इसके साथ ही मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि आरोपियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सके।
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क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारियों द्वारा भी इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। चौराहों पर चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे और उन्हें उनके किए की कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
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फिलहाल, बिजनौर का आजमपुर गांव इस खौफनाक वारदात के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है। सभी की निगाहें अब नूरपुर पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन बेखौफ अपराधियों को पकड़कर इलाके में दोबारा कानून का इकबाल और जनता का विश्वास कायम कर पाती है।