खबरीलाल डेस्क

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने वाले एक बड़े रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। शहर के घनी आबादी वाले ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के तारापुरी इलाके में एक सामान्य सी दिखने वाली दुकान के भीतर अवैध हुक्का बार संचालित किया जा रहा था। गुरुवार देर रात पुलिस की एक विशेष टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर जब लिसाड़ी रोड स्थित इस दुकान पर अचानक छापा मारा, तो भीतर का नजारा देखकर खुद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। बाहर से बंद दिखने वाले शटर के पीछे युवाओं की महफिल सजी थी और अलग-अलग फ्लेवर के हुक्के के कश लगाए जा रहे थे।

छापेमारी की पूरी कहानी: मुखबिर की सूचना और पुलिस का एक्शन

ब्रह्मपुरी थाना पुलिस को पिछले कुछ समय से लगातार गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि लिसाड़ी रोड स्थित तारापुरी इलाके में एक विशेष दुकान में शाम ढलते ही संदिग्ध गतिविधियों का दौर शुरू हो जाता है। मुखबिर ने पुलिस को पुख्ता जानकारी दी कि बाहर से परचून या सामान्य सामान बेचने का दिखावा करने वाली इस दुकान के पिछले हिस्से में बाकायदा एक हुक्का लाउंज तैयार किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस सटीक इनपुट के आधार पर गुरुवार देर रात पुलिस ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत सादे कपड़ों और वर्दी में एक टीम का गठन किया। जैसे ही पुलिस की गाड़ियां अचानक दुकान के बाहर रुकीं और टीम ने शटर उठाकर अंदर प्रवेश किया, वहां मौजूद युवाओं में हड़कंप मच गया।

भगदड़ का माहौल और 6 की गिरफ्तारी

पुलिस की अचानक हुई इस स्ट्राइक से हुक्का पी रहे और वहां मौजूद युवकों में भारी दहशत फैल गई। खुद को बचाने के लिए युवा दुकान के पिछले रास्तों और गलियों की तरफ भागने लगे। मौके पर भारी भगदड़ मच गई। अंधेरे और संकरी गलियों का फायदा उठाकर कई युवक तो भागने में सफल रहे, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के चलते मौके से छह युवकों को धर दबोचा गया।

तलाशी के दौरान पुलिस को मौके से कई हुक्के, अलग-अलग प्रकार के फ्लेवर्ड तंबाकू (मोलासेस), पाइप, चिलम और कोयला बरामद हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि पुलिस की गहन तलाशी में वहां से कोई भारी नशीला पदार्थ (जैसे चरस, अफीम या सिंथेटिक ड्रग्स) बरामद नहीं हुआ। पुलिस ने सारा सामान तुरंत जब्त कर लिया है और पकड़े गए युवकों को थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों का विवरण

क्र.सं.आरोपी का नामनिवास स्थान (मेरठ)
1फरहानरसीदनगर
2आनसतारापुरी
3समरखुशहाल कॉलोनी
4असदखुशहाल कॉलोनी
5हैदरमोहम्मद नगर
6जैदमोहम्मद नगर

महज 100 रुपये में बेचा जा रहा था जहर

पुलिस की प्रारंभिक जांच और पकड़े गए युवकों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह अवैध हुक्का बार मुख्य रूप से स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों और कम उम्र के युवाओं को अपना निशाना बना रहा था। इस धंधे को संचालित करने वाले लोग युवाओं को आकर्षित करने के लिए बेहद कम कीमत पर यह सुविधा दे रहे थे।

पूछताछ में पता चला है कि इस दुकान में हुक्का पीने के लिए प्रति व्यक्ति मात्र 100 रुपये का शुल्क लिया जाता था। इतने सस्ते दाम के कारण इलाके के युवा बड़ी संख्या में यहां इकट्ठा होने लगे थे। 100 रुपये के इस 'पैकेज' में उन्हें अलग-अलग फलों और कृत्रिम स्वादों (फ्लेवर) वाला हुक्का परोसा जाता था। यह कम कीमत वाला मॉडल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संचालक का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इस लत में फंसाकर अपना मुनाफा कमाना था।

दुकानदार शमशाद की भूमिका पर बना सस्पेंस

इस पूरी कार्रवाई के दौरान एक नाम जो सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है दुकान चलाने वाले शमशाद का। बताया जा रहा है कि यह दुकान शमशाद की ही है और उसी की शह पर यह पूरा अवैध कारोबार फल-फूल रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के वक्त शमशाद को भी मौके से हिरासत में लिया गया था।

हालांकि, बाद में उसे किसी कारणवश पुलिस ने छोड़ दिया। शमशाद की इस रिहाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि क्या शमशाद का कोई राजनीतिक या पुलिसिया रसूख है? पुलिस फिलहाल इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह हुक्का बार कितने महीनों या सालों से चल रहा था और क्या इसमें शमशाद के अलावा कोई और बड़ा फाइनेंसर भी शामिल है।

खाकी पर भी उठे सवाल: क्या गणेशपुरी चौकी की थी मिलीभगत?

इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की भूमिका है। यह हुक्का बार जिस इलाके में चल रहा था, वह गणेशपुरी पुलिस चौकी के ठीक नाक के नीचे आता है। स्थानीय निवासियों का दबी जुबान में कहना है कि यह अवैध हुक्का बार पिछले कई दिनों से धड़ल्ले से चल रहा था। हर शाम वहां युवाओं की भीड़ लगती थी, महंगी गाड़ियां और बाइकें खड़ी होती थीं।

यह लगभग असंभव है कि इलाके में होने वाली इतनी बड़ी संदिग्ध गतिविधि की भनक स्थानीय चौकी पुलिस को न हो। आरोप लग रहे हैं कि चौकी पुलिस की इस अवैध कारोबार के संचालकों से कथित तौर पर साठगांठ थी। कुछ स्थानीय लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि इस धंधे को निर्बाध रूप से चलाने के लिए पुलिसकर्मियों को बाकायदा 'महीना' (रिश्वत) पहुंचाया जा रहा था। हालांकि, अभी तक इन गंभीर आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन चर्चाओं ने पुलिस विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है।

उच्च अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश

मामले की गंभीरता और खाकी पर लग रहे आरोपों को देखते हुए अब पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गणेशपुरी चौकी के पुलिसकर्मियों की भूमिका की विस्तृत विभागीय जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि स्थानीय पुलिस को इस अवैध हुक्का बार की जानकारी थी और उन्होंने जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की या फिर रिश्वतखोरी का कोई भी तथ्य सामने आता है, तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। समाज में युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले ऐसे किसी भी तंत्र को बख्शा नहीं जाएगा और जो भी इसे संरक्षण देगा, वह भी कानून के शिकंजे से नहीं बच सकेगा।