लखनऊ / बायो-टेक डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चिकित्सा अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के क्षेत्र में एक नए और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई है। देवा रोड स्थित प्रतिष्ठित फूड एंड बायोसाइंसेज रिसर्च लैब (FBRL) ने स्वास्थ्य नवाचार (Health Innovation) को नई दिशा देने के लिए CSIR-IITR TDIC-BioNEST, Lucknow के साथ एक औपचारिक समझौते (Memorandum of Agreement - MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी अकादमिक और वैज्ञानिक अनुसंधान को जमीनी स्तर पर उतारने और आम जनता तक अत्याधुनिक चिकित्सा समाधान पहुंचाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
आज के समय में जब पूरी दुनिया प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (निवारक स्वास्थ्य देखभाल) और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) की ओर अग्रसर है, ऐसे में यह समझौता उत्तर भारत के मेडिकल रिसर्च इकोसिस्टम को एक नई ताकत प्रदान करेगा। आइए इस पूरी साझेदारी, इसके उद्देश्यों और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से समझते हैं।

इस समझौते के मुख्य उद्देश्य और हस्ताक्षरकर्ता
यह उच्च-स्तरीय समझौता वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता के बीच की खाई को पाटने के लिए किया गया है। MoA पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर टीडीआईसी-बायोनेस्ट (TDIC-BioNEST) की हेड डॉ. रचना कुमार और एफबीआरएल (FBRL) की प्रबंध निदेशक डॉ. शिप्रा भारद्वाज द्वारा किए गए।

इस साझेदारी के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन स्तंभों पर फोकस किया जाएगा:
नवीन डायग्नोस्टिक समाधान (Innovative Diagnostic Solutions): बीमारियों की शुरुआती और सटीक पहचान के लिए कम लागत वाली और तेज डायग्नोस्टिक किट्स व टूल्स विकसित करना।
साक्ष्य-आधारित मेडिकल फूड उत्पाद (Evidence-Based Medical Food Products): ऐसे चिकित्सीय खाद्य उत्पादों और पोषक तत्वों का निर्माण करना, जिन्हें कठोर नैदानिक परीक्षणों (Clinical Validations) द्वारा प्रमाणित किया गया हो ताकि मरीजों के स्वास्थ्य सुधार में तेजी लाई जा सके।
पर्सनलाइज्ड न्यूट्रिशन और हेल्थ टेक्नोलॉजी (Personalized Health Technologies): आधुनिक डेटा और बायोसाइंसेज का उपयोग करके व्यक्तियों की आनुवंशिक और जीवनशैली की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित स्वास्थ्य और पोषण योजनाएं तैयार करना।
इस सहयोग का मूल उद्देश्य प्रयोगशाला में होने वाले वैज्ञानिक आविष्कारों को व्यावहारिक और सुलभ समाधानों में बदलना है, जिससे समाज के हर वर्ग के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाया जा सके।

"हेल्थ फॉर ऑल" और "प्रीहैबिलिटेशन" का अनूठा दर्शन
इस साझेदारी के मूल विजन पर प्रकाश डालते हुए एफबीआरएल की प्रबंध निदेशक डॉ. शिप्रा भारद्वाज ने जोर देकर कहा कि उनकी संस्था का मुख्य ध्येय "हेल्थ फॉर ऑल" (Health for All) है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके संगठन की अनुसंधान और नवाचार पहल केवल व्यक्तिगत जरूरतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये शुद्ध भोजन (Pure Food), निवारक स्वास्थ्य (Preventive Health) और तनावमुक्त जीवनशैली पर शोध के माध्यम से व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को संबोधित करती हैं।

डॉ. भारद्वाज एक बेहद अनूठे और क्रांतिकारी सिद्धांत पर विश्वास करती हैं—“प्रीहैबिलिटेशन इज बेटर दैन रिहैबिलिटेशन” (Prehabilitation is better than rehabilitation)। इसका अर्थ यह है कि किसी बीमारी के होने के बाद उसके इलाज (पुनर्वास) पर जोर देने के बजाय, शरीर को पहले से ही इतना मजबूत और रोग-प्रतिरोधी बना लेना चाहिए कि बीमारी के होने की आशंका ही न्यूनतम हो जाए।

क्रोनोमेडिसिन और क्रोनोन्यूट्रिशन की ओर कदम: RHYTHMS पहल
निवारक स्वास्थ्य के इस विजन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए, डॉ. शिप्रा भारद्वाज ने एक विशिष्ट पहल की शुरुआत की है, जिसका नाम है—RHYTHMS – Centre for Chronomedicine and Chrononutrition।
यह केंद्र इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रोनोमेडिसिन (ISCM) और न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया (NCI) के सक्रिय सहयोग से स्थापित किया गया है। 'RHYTHMS' पहल का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित क्षेत्रों में अनुसंधान और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है:
सर्कैडियन स्क्रीनिंग (Circadian Screening): यह अध्ययन करना कि मानव शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) स्वास्थ्य और बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता को कैसे प्रभावित करती है।
क्रोनोन्यूट्रिशन (Chrononutrition): इस बात पर शोध करना कि भोजन करने का सही समय शरीर के चयापचय (Metabolism) और फिटनेस को कैसे अनुकूलित कर सकता है।
लक्षित रोग रोकथाम (Targeted Disease Prevention): प्राकृतिक जैविक लय के आधार पर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियां तैयार करना।
नेतृत्व और अकादमिक उत्कृष्टता का संगम
इस पूरे शोध अभियान का नेतृत्व करने वाली डॉ. शिप्रा भारद्वाज चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान में लगभग 20 वर्षों का समृद्ध अनुभव रखती हैं। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से अपनी डॉक्टोरल रिसर्च पूरी करने वाली डॉ. भारद्वाज को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।
उनके नाम पर 30 से अधिक शोध पत्र (Research Publications) और कई प्रतिष्ठित पुस्तकों के अध्याय दर्ज हैं। इसके अलावा, वह भावी स्वास्थ्य विशेषज्ञों को मार्गदर्शन देने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक स्वास्थ्य विभाग (Department of Public Health) में गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनका यह अकादमिक और व्यावहारिक अनुभव इस साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाता है।
बुनियादी ढांचा और भविष्य का रोडमैप
सीएसआईआर-आईआईटीआर (CSIR-IITR) के टीडीआईसी-बायोनेस्ट में स्थापित नया FBRL Innovation Centre इस शोध और नवाचार साझेदारी के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करेगा।
एफबीआरएल का मुख्य अनुसंधान केंद्र देवा रोड पर गोयला (Goila) में स्थित है, जो इस नए केंद्र के साथ मिलकर अपने तीन अन्य उप-केंद्रों (Sub-centres) के जरिए जमीनी स्तर पर काम करेगा। इस बहु-केंद्र अवसंरचना (Multi-centre Infrastructure) के माध्यम से संस्थान को प्रयोगशाला अनुसंधान से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और कम्युनिटी आउटरीच तक हर चरण में सुगमता मिलेगी।
आज के समय में जब लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं, तब इस प्रकार की सार्वजनिक-निजी शोध साझेदारियां (Public-Private Research Partnerships) देश के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निहायत जरूरी हैं। सीएसआईआर-आईआईटीआर की इन्क्यूबेशन क्षमता और एफबीआरएल के प्रिवेंटिव हेल्थ विजन का यह मेल लखनऊ को देश के मेडिकल और न्यूट्रिशन इनोवेशन मैप पर एक नई पहचान दिला रहा है।
FBRL – Research for Health, Innovation for All.