खबरीलाल डेस्क
पूरे देश में पिछले कई दिनों से जारी जानलेवा उमस, पसीने वाली चिपचिपी गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक ऐसा पूर्वानुमान जारी किया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को सतर्क कर दिया है। 5 सितंबर 2026 का दिन मौसम के लिहाज से पूरे भारत के लिए बेहद उथल-पुथल और विनाशकारी साबित होने वाला है। मौसम विभाग ने सैटेलाइट इमेजरी और वायुमंडलीय दबाव के बदलते पैटर्न का गहन विश्लेषण करने के बाद देश के 23 राज्यों के लिए एक साथ भारी बारिश, वज्रपात (आकाशीय बिजली) और खौफनाक आंधी का 'हाई अलर्ट' (High Alert) जारी कर दिया है।READ ALSO:-मिर्जापुर: द मूवी’ में फिर गूंजा बंदूकों का भौकाल, मुन्ना की वापसी ने बढ़ाया रोमांच; 3 घंटे 17 मिनट की फिल्म में कहां अटक गई कहानी?
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इस मौसमी बदलाव का सबसे डरावना पहलू हवाओं की वह विनाशकारी गति है, जो 75 किलोमीटर प्रति घंटे (kmph) तक पहुंच सकती है। इतनी तेज रफ्तार से चलने वाली हवाएं बड़े-बड़े पेड़ों को जड़ से उखाड़ने, बिजली के खंभों को गिराने और कच्चे मकानों की छतों को उड़ा ले जाने की पूरी क्षमता रखती हैं। मानसून के इस अचानक लौटे रौद्र रूप ने किसानों से लेकर शहरवासियों तक, सभी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि 5 सितंबर को आपके राज्य, आपके शहर और आपके मोहल्ले में आसमान से कैसी आफत बरसने वाली है।
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किन 23 राज्यों पर टूटेगा आसमान से कहर? (The Target Zone) भारत मौसम विज्ञान विभाग के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी भरी मानसूनी हवाओं के आपस में टकराने के कारण यह भयानक मौसमी परिस्थिति उत्पन्न हुई है। जिन 23 राज्यों में मौसम पूरी तरह से बिगड़ने वाला है, उनकी सूची काफी लंबी है। इनमें उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर व लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र (विशेषकर विदर्भ), छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, असम, मेघालय, त्रिपुरा, दक्षिण भारत के केरल, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं। इन राज्यों में 5 सितंबर की सुबह से ही बादलों की गड़गड़ाहट और तेज हवाओं का दौर शुरू हो जाएगा।
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उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR: उमस से मिलेगी राहत, लेकिन बरसेगी आफत दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के करोड़ों लोग जो पिछले हफ्ते से भयानक उमस झेल रहे हैं, उनके लिए यह मौसमी बदलाव राहत लेकर आएगा। दिल्ली में काले घने बादलों की आवाजाही के बीच तेज बारिश होने की पूरी संभावना है। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।
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हालाँकि, सबसे ज्यादा खराब स्थिति देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश (UP) की होने वाली है। आईएमडी (IMD) ने पश्चिमी और पूर्वी यूपी के कई प्रमुख जिलों को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, नवाबों के शहर लखनऊ, कानपुर, संगम नगरी प्रयागराज, गोरखपुर और वाराणसी सहित दर्जनों जिलों में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने का खतरा सबसे ज्यादा है, जो हर साल यूपी में कई लोगों की जान ले लेता है। 6 से 8 सितंबर के बीच पूर्वी यूपी में यह मौसमी सिस्टम और भी ज्यादा उग्र रूप धारण कर लेगा।
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बिहार और पूर्वी भारत: 50-60 किमी की आंधी से उड़ेंगे छप्पर पूर्वी भारत के राज्यों, विशेषकर बिहार के लिए 5 सितंबर का दिन किसी खौफनाक सपने से कम नहीं होने वाला है। मौसम विभाग की सैटेलाइट रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 25 से भी अधिक जिलों में मौसम अपनी चरम सीमा पर जाकर तबाही मचा सकता है। राजधानी पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी दी गई है।
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इतनी तेज हवाओं के साथ जब मूसलाधार बारिश होगी, तो शहरी इलाकों में भीषण जलभराव (Waterlogging) और ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों के ढहने का खतरा बहुत बढ़ जाएगा। इसके अलावा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी इसी तरह का खतरनाक मौसम बना रहेगा।
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देवभूमि और पहाड़ी राज्यों में मंडराया 'मौत' का साया (Landslide Alert) बारिश का सबसे भयानक और जानलेवा रूप अगर कहीं देखने को मिलता है, तो वह हैं हमारे पहाड़ी राज्य। लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने पहाड़ों की मिट्टी को पहले ही बहुत कमजोर और खोखला कर दिया है।
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    उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल, धार्मिक नगरी हरिद्वार और चमोली जिलों में बादलों के फटने जैसी स्थिति और भूस्खलन (Landslide) का सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।
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    हिमाचल प्रदेश और कश्मीर: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, मंडी और सोलन के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 5 से 10 सितंबर के बीच व्यापक और अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी है। पहाड़ों से गिरने वाले मलबे के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग कभी भी बंद हो सकते हैं, इसलिए पर्यटकों को इन 5 दिनों में पहाड़ों का रुख बिल्कुल न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान: 65 kmph का अंधड़ और ओलावृष्टि मध्य भारत में, विशेषकर मध्य प्रदेश (MP) और छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मौसम का सिस्टम बहुत ज्यादा सक्रिय है। 5 और 6 सितंबर को इन दोनों राज्यों के कई हिस्सों में 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने का अनुमान है। कुछ इलाकों में ओले (Hailstorm) भी गिर सकते हैं, जो खड़ी फसलों के लिए सीधे तौर पर मौत का फरमान हैं। वहीं, रेगिस्तानी राज्य राजस्थान के जयपुर, शिक्षा नगरी कोटा, झीलों के शहर उदयपुर और भरतपुर समेत कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
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IMD की 5 सूत्रीय सख्त इमरजेंसी एडवाइजरी (Safety Guidelines) मौसम की इस नजाकत और गंभीरता को देखते हुए, मौसम विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने आम जनता के लिए कुछ बेहद जरूरी सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं:
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    पेड़ों और खंभों से रहें दूर: 75 kmph की आंधी के दौरान गलती से भी किसी बड़े पेड़, बिजली के ट्रांसफार्मर, होर्डिंग या जर्जर इमारत के नीचे शरण न लें। आकाशीय बिजली हमेशा सबसे ऊंची चीजों पर ही गिरती है।
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    घर के अंदर ही रहें सुरक्षित: 5 सितंबर को यदि बहुत ज्यादा जरूरी न हो, तो घर से बाहर न निकलें। सफर के दौरान अगर तूफान आ जाए, तो अपनी गाड़ी को किसी सुरक्षित और खुले स्थान पर रोक लें।
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    किसानों के लिए विशेष चेतावनी: खेतों में काम कर रहे किसानों को हिदायत दी गई है कि आसमान में काले बादल घिरते ही तुरंत सुरक्षित पक्के स्थान पर चले जाएं। यदि फसल कट चुकी है, तो उसे ओलावृष्टि से बचाने के लिए तिरपाल से अच्छी तरह ढक दें।
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    इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग: तेज आंधी और बिजली कड़कने के दौरान घर के सभी कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (टीवी, फ्रिज, एसी) के प्लग निकाल दें, क्योंकि हाई वोल्टेज के कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
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    जलभराव और अंडरपास: शहरों में वाहन चालकों को पानी से भरे अंडरपास या सड़कों पर गाड़ी डालने से सख्त मना किया गया है, क्योंकि वहां खुले मैनहोल या गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है।
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5 सितंबर को मौसम का यह बिगड़ा हुआ मिजाज एक प्राकृतिक आपदा का रूप ले सकता है। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की थोड़ी सी सतर्कता और जागरूकता ही किसी भी बड़े जान-माल के नुकसान को टालने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। सावधान रहें, सुरक्षित रहें!
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