खबरीलाल डेस्क
रिश्तों का खून कैसे पैसे और ज़मीन के लालच में सफेद हो जाता है, इसकी एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली दास्तान उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आई है। रक्षा करने वाली खाकी वर्दी पहनने वाले एक पुलिसकर्मी की मौत अब सवालों के घेरे में है। जनपद सहारनपुर के थाना फतेहपुर में तैनात हेड कांस्टेबल सोनू सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उनकी पत्नी ने जो खुलासे किए हैं, उसने पुलिस महकमे और आम जनमानस में सनसनी फैला दी है।
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​मृतक सिपाही की पत्नी मनीषा उत्तम ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मेरठ को 31 अगस्त 2026 को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपकर अपने पति की मौत को एक 'सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या' करार दिया है। यह पूरी खूनी पटकथा 15 करोड़ रुपये की एक पुश्तैनी ज़मीन के इर्द-गिर्द बुनी गई बताई जा रही है। एक साल के मासूम बच्चे को गोद में लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर एक बेवा की यह गुहार कानून-व्यवस्था और पारिवारिक मूल्यों पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
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क्या है पूरा मामला? (Background of the Dispute)
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​प्रार्थना पत्र के अनुसार, मनीषा उत्तम (निवासी 1239 गावड़ी वाला मोहल्ला, मलियाना, थाना टी०पी० नगर, मेरठ) का विवाह 7 मार्च 2022 को जसवंत सिंह के पुत्र सोनू सिंह के साथ संपन्न हुआ था। शादी के बाद उनका एक पुत्र हुआ, जिसकी उम्र वर्तमान में करीब 1 वर्ष है। मृतक सोनू सिंह सहारनपुर जनपद में हेड कांस्टेबल के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे, जबकि उनकी पत्नी मनीषा वर्तमान में मिजोरम राज्य के जिला सिहाया स्थित 'एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल' में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं।
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​विवाद की असली जड़ मलियाना (परगना व तहसील मेरठ) में स्थित पुश्तैनी कृषि भूमि है। दस्तावेजों के मुताबिक, खसरा संख्या 1413 मि० (क्षेत्रफल 1.3920 हेक्टेयर) में प्रार्थीनी के ससुर जसवंत सिंह का नाम बतौर विरासतन सहखातेदार के रूप में दर्ज है।
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15 करोड़ का सौदा और 7 करोड़ का कागजी खेल

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​शिकायत में एक बहुत बड़ा आर्थिक खुलासा किया गया है। ससुर जसवंत सिंह ने अन्य सहखातेदारों के साथ मिलकर उक्त बेशकीमती कृषि भूमि का सौदा 'पारसनाथ स्टेट डेवलपर्स' के साथ करीब पंद्रह करोड़ (15,00,00,000) रुपये में तय किया था। इस भारी-भरकम सौदे के बाबत 08 अगस्त 2025 को एक एग्रीमेंट (अनुबंध) भी निष्पादित किया गया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि सरकारी टैक्स और अन्य चीजों से बचने के लिए, या किसी अन्य मंशा से, इस एग्रीमेंट में ज़मीन की बिक्री कीमत मात्र 7 करोड़ रुपये ही दर्शाई गई थी।
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​जब यह करोड़ों का सौदा हुआ, तो बेटे सोनू सिंह (मृतक) ने अपने पिता और भाइयों से इस धन में से अपने वैधानिक हिस्से की मांग की। बस यहीं से परिवार में खटास आ गई। आरोप है कि ससुर जसवंत सिंह, जेठ देवेंद्र सिंह और जेठ मनोज कुमार ने सोनू को हिस्सा देने से साफ इनकार कर दिया और उनके साथ बुरी तरह गाली-गलौज व मारपीट की घटना को अंजाम दिया।
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मौत से पहले का डर: "मुझे अपने परिवार पर विश्वास नहीं"

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​संपत्ति के इस हिंसक विवाद के बाद सोनू सिंह गहरे मानसिक अवसाद में चले गए थे। प्रार्थना पत्र में मनीषा ने बताया है कि उनके पति ने फोन पर उन्हें इस खौफनाक घटना की पूरी जानकारी दी थी। सोनू ने अपनी पत्नी से स्पष्ट शब्दों में कहा था कि "अब मेरे परिवार के लोग किसी भी समय मेरे साथ कोई भी घटना कारित कर सकते हैं, मुझे अब उनपर विश्वास नहीं रहा।"। पति का यह डर आगे चलकर एक भयानक सच में तब्दील हो गया।
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बीमारी का रहस्य और अस्पतालों का चक्कर (क्रोनोलॉजी)

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​पत्नी द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, सोनू सिंह की हत्या को एक बीमारी का रूप देने की कोशिश की गई:
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    06 अगस्त 2026: सोनू सिंह की हालत अचानक बेहद नाजुक हो गई। उन्हें उनका बड़ा भाई देवेंद्र कुमार अपने साथ दिल्ली ले गया और राजधानी हॉस्पिटल (मेन मार्केट, कोंडली, दिल्ली) में भर्ती कराया। आरोप है कि जानबूझकर सही इलाज नहीं कराया गया और 2 दिन बाद ही उन्हें वहां से डिस्चार्ज करा लिया गया।
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    11 अगस्त 2026: हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने पर दिल्ली में ही डॉ० अंकुर जिन्दल को OPD में दिखाया गया।
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    12 अगस्त 2026: जब सोनू मरणासन्न स्थिति में पहुंच गए, तब रात 8 बजकर 5 मिनट पर उन्हें मेरठ के के०एम०सी० (KMC) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
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    13 अगस्त 2026: इलाज के दौरान शाम 4 बजकर 20 मिनट पर सोनू सिंह की रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।
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बेरहमी की हद: न मौत की खबर दी, न अंतिम दर्शन करने दिए

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पत्नी मनीषा का आरोप है कि उनके ससुराल वालों ने साजिश के तहत उन्हें पति के बीमार होने और मृत्यु होने की कोई सूचना नहीं दी। एक पत्नी को अपने पति की चिता को अग्नि दिए जाने से पहले अंतिम दर्शन करने का मौका भी नहीं दिया गया। मनीषा की गैर-मौजूदगी में ही आनन-फानन में सोनू का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्हें इस हृदयविदारक घटना की जानकारी अपनी माता के माध्यम से प्राप्त हुई।
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जब बदहवास मनीषा मिजोरम से मेरठ पहुंचीं और ससुराल वालों से सवाल-जवाब किए, तो उनके साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। ससुरालियों ने मारपीट की, भद्दी गालियां दीं और धक्के मारकर यह कहते हुए घर से निकाल दिया कि "जब तेरा पति नहीं रहा तो यहाँ पर तेरा रहने का क्या मतलब"।
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यूपी 112 की मदद और संपत्ति हड़पने का आखिरी दांव
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अपनी जान को खतरा देख मनीषा ने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। थाना पुलिस के हस्तक्षेप से उन्हें अपना कुछ सामान वापस मिला, लेकिन अधिकांश स्त्रीधन और महत्वपूर्ण सामान अभी भी ससुराल वालों के ही कब्जे में है।
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मृतक के परिवार ने साजिश का आखिरी ताना-बाना 24 अगस्त 2026 को बुना। ससुर जसवंत सिंह ने सोनू के हिस्से वाले मकान को अपने बड़े बेटे मनोज कुमार के नाम 'दान पत्र' (Gift Deed) के माध्यम से निष्पादित कर दिया। इस कदम का एकमात्र उद्देश्य 1 वर्षीय अनाथ मासूम और विधवा पत्नी के कानूनी हक को हमेशा के लिए मारना था।
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SSP से न्याय की आस

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आज एक पुलिसकर्मी की बेवा अपने 1 साल के दुधमुंहे बच्चे को सीने से लगाए दर-दर की ठोकर खाने को विवश है। मनीषा उत्तम ने मेरठ एसएसपी (SSP) को दिए अपने शिकायती पत्र में अपनी और अपने बच्चे की जान-माल का खतरा जताते हुए, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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अब देखना यह है कि क्या मेरठ पुलिस अपने ही विभाग के एक दिवंगत साथी की मौत की निष्पक्ष जांच कर, उसकी विधवा और अनाथ बच्चे को करोड़ों के इस खूनी खेल में इंसाफ दिला पाएगी? या फिर 15 करोड़ के सौदे की चमक में एक सिपाही की मौत का सच हमेशा के लिए दफन हो जाएगा? पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं।
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अस्वीकरण (Disclaimer)

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महत्वपूर्ण सूचना: यह समाचार पूरी तरह से शिकायतकर्ता (मनीषा उत्तम) द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मेरठ को सौंपे गए आधिकारिक प्रार्थना पत्र और मीडिया को जारी किए गए प्रेस नोट में दर्ज दावों और आरोपों पर आधारित है।
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    ​इस लेख में उल्लिखित सभी आरोप (जैसे- हत्या की साजिश, संपत्ति विवाद, और दुर्व्यवहार) वादी पक्ष के अपने बयान हैं।
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    ​हमारा न्यूज़ पोर्टल/संस्थान इन आरोपों की सत्यता या प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
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    ​यह मामला वर्तमान में पुलिस जांच के अधीन है। किसी भी व्यक्ति या पक्ष को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक कि माननीय न्यायालय या सक्षम जांच एजेंसी द्वारा अंतिम फैसला न सुना दिया जाए। यह रिपोर्ट केवल जनहित और सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।
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