राजधानी दिल्ली से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के साउथ कैंपस के ठीक पास स्थित पॉश और छात्र-बाहुल्य रिहायशी इलाके सत्य निकेतन (Satya Niketan) में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक बड़ा हादसा हुआ। यहाँ एक कमर्शियल और रेजिडेंशियल इस्तेमाल वाली हॉस्टल की बिल्डिंग अचानक मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इमारत के अंदर बड़ी संख्या में छात्रों के रहने की जानकारी सामने आ रही है, जिससे मलबे में कई बच्चों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है।
\r\n\r\nभारी बारिश बनी हादसे की मुख्य वजह?
\r\n\r\nप्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इस लगातार होती बारिश के कारण पुरानी और कमजोर हो चुकी इमारतों की नींव पर काफी दबाव पड़ रहा था। रविवार दोपहर जब यह हादसा हुआ, तब अचानक इमारत से तेज आवाज आई और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
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हाइवे और मुख्य मार्गों के नजदीक होने के कारण इस इलाके में छात्रों के लिए भारी संख्या में पीजी (PG) और प्राइवेट हॉस्टल संचालित किए जाते हैं। जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वहाँ भी एक बड़ा हॉस्टल चल रहा था जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के छात्र रहते थे।
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राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) युद्धस्तर पर जारी
\r\n\r\nघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग (Fire Department) की कई गाड़ियां और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF/Civil Defence) की टीमें तुरंत मौके पर पहुँच गईं। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी हालात का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर मौजूद हैं।
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- \r\n स्थानीय लोगों की मदद: गनीमत यह रही कि हादसा होने के तुरंत बाद आसपास के स्थानीय लोग मौके पर दौड़ पड़े और उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर राहत कार्य शुरू कर दिया।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षित रेस्क्यू: शुरुआती बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीमों की मदद से मलबे से एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।\r\n \r\n
- \r\n आसपास की इमारतें खाली कराई गईं: किसी भी संभावित बड़े खतरे को टालने और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने गिरी हुई इमारत के आसपास की अन्य रिहायशी और हॉस्टल की इमारतों को भी तुरंत खाली करवा लिया है।\r\n \r\n

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लापरवाही के बड़े सवाल: प्रशासनिक तंत्र पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
\r\n\r\nसत्य निकेतन जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले और शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में इस तरह से बिल्डिंग का गिरना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
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- \r\n अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी: दिल्ली के कई इलाकों में बिना नक्शा पास कराए या मानकों की अनदेखी करके अवैध रूप से हॉस्टल और पीजी चलाए जा रहे हैं। क्या इस इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) कराया गया था?\r\n \r\n
- \r\n प्रशासनिक सुस्ती: लगातार हो रही बारिश के मौसम में ऐसे पुराने या जर्जर भवनों की पहचान करके उन्हें समय रहते खाली क्यों नहीं कराया गया?\r\n \r\n
- \r\n छात्रों की सुरक्षा: डीयू के साउथ कैंपस के आसपास हज़ारों छात्र किराए के कमरों और पीजी में रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?\r\n \r\n

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मलबे में तलाश जारी, प्रशासन की पैनी नजर
\r\n\r\nफिलहाल राहत और बचाव कर्मियों द्वारा पोकलेन मशीनों और गैस कटर की मदद से मलबे को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। अंधेरा होने से पहले मलबे में फंसे हर एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे के वक्त इमारत के भीतर कुल कितने छात्र मौजूद थे, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि अंदर अभी और भी लोग फंसे हो सकते हैं।
\r\n\r\nसत्य निकेतन की यह घटना दिल्ली प्रशासन और मकान मालिकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। प्राकृतिक आपदाओं या भारी बारिश के नाम पर होने वाले ऐसे हादसों में मासूम छात्रों की जिंदगी दांव पर लग जाती है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द ऐसे सभी हॉस्टल्स और इमारतों की जांच करे ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके। हमारी संवेदनाएं प्रभावित छात्रों और उनके परिजनों के साथ हैं।