मेरठ/करनाल। उत्तर प्रदेश में इन दिनों एक नई कहावत अपराधियों के बीच आम हो गई है- "अपराध करोगे, तो गाड़ी पलट सकती है।" योगी सरकार में उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का खौफ इस कदर बढ़ चुका है कि बड़े-बड़े माफिया और गैंगस्टर अब जेल से बाहर आने या पुलिस कस्टडी में जाने से खौफ खा रहे हैं। ताजा मामला गैंगस्टर राकेश उर्फ पंपू का है। कभी दूसरों के लिए खौफ का कारण रहा यह कुख्यात अपराधी अब खुद अपनी जान को लेकर इतना डरा हुआ है कि उसने अदालत के सामने हाथ जोड़कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।READ ALSO:-मौसम अलर्ट: 4 सितंबर को 25 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का खतरा, UP-बिहार समेत कई राज्यों में IMD की चेतावनी
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शामली के चर्चित अंकित बालियान हत्याकांड की साजिश रचने के मुख्य आरोपित पंपू को यह डर सता रहा है कि यूपी पुलिस उसे रिमांड पर लेकर जाएगी और रास्ते में उसका भी वही हश्र होगा, जो विकास दुबे या अतीक अहमद का हुआ था। इसी खौफ के चलते उसने करनाल कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
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गैंगस्टर पंपू की कोर्ट से 3 प्रमुख मांगें
\r\n\r\nगैंगस्टर राकेश उर्फ पंपू ने करनाल कोर्ट में अपने वकीलों के माध्यम से जो मांगें रखी हैं, वे स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यूपी पुलिस का एनकाउंटर मॉडल अपराधियों के दिमाग पर किस तरह हावी है। उसने कोर्ट से अपील की है कि:
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- \r\n बेड़ियों और हथकड़ी का इस्तेमाल: उसे यूपी पुलिस की रिमांड के दौरान हथकड़ी और भारी बेड़ियों में जकड़ कर रखा जाए, ताकि पुलिस यह दावा न कर सके कि उसने भागने की कोशिश की थी।\r\n \r\n
- \r\n पूरी वीडियोग्राफी: रिमांड के दौरान जेल से लेकर कोर्ट और थाने तक, उसकी पूरी आवाजाही की निरंतर वीडियोग्राफी करवाई जाए।\r\n \r\n
- \r\n हथियारबंद सुरक्षा घेरा: उसे साधारण पुलिस नहीं, बल्कि भारी हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों के कड़े सुरक्षा घेरे (कॉर्डन) के बीच ही यूपी लाया और ले जाया जाए।\r\n \r\n
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पंपू का डर बेबुनियाद नहीं: कस्टडी में मारे गए दिग्गजों की फेहरिस्त
\r\n\r\nपंपू का यह डर हवा-हवाई नहीं है। उत्तर प्रदेश के पिछले कुछ वर्षों के क्राइम ग्राफ और पुलिस की कार्यप्रणाली पर नजर डालें, तो पता चलता है कि बड़े-बड़े बाहुबली और माफिया पुलिस कस्टडी या जेल के भीतर सुरक्षित नहीं रह पाए हैं। पंपू ने अपनी याचिका में इन्हीं घटनाओं का हवाला दिया है:
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- \r\n विकास दुबे (जुलाई 2020): बिकरू कांड में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले खूंखार अपराधी विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। रास्ते में बारिश के बीच पुलिस की गाड़ी पलट गई। पुलिस के अनुसार, विकास ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी फायरिंग (मुठभेड़) में वह मारा गया। इस "गाड़ी पलटने" की घटना ने पूरे देश में तहलका मचा दिया था।\r\n \r\n
- \r\n अतीक अहमद और अशरफ (अप्रैल 2023): प्रयागराज पुलिस की कस्टडी में मेडिकल के लिए ले जाए जा रहे पूर्व सांसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को लाइव कैमरे के सामने तीन युवकों ने गोलियों से भून दिया था।\r\n \r\n
- \r\n संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा (जून 2023): पश्चिमी यूपी के सबसे कुख्यात शूटर्स में से एक और मुख्तार अंसारी के करीबी संजीव जीवा को लखनऊ कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान वकीलों की ड्रेस में आए एक शूटर ने सरेआम गोली मार दी थी।\r\n \r\n
- \r\n मुन्ना बजरंगी (जुलाई 2018): कभी पूर्वांचल में खौफ का दूसरा नाम रहे मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल के भीतर ही एक अन्य कैदी (सुनील राठी) द्वारा गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी।\r\n \r\n
- \r\n मुकीम काला (मई 2021): पश्चिमी यूपी का एक और बड़ा नाम, मुकीम काला, चित्रकूट जेल के अंदर हुए एक भयंकर गैंगवार में मारा गया था।\r\n \r\n
- \r\n अन्य हाई-प्रोफाइल मौतें: मार्च 2024 में बांदा जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। नवंबर 2022 में एनआईए (NIA) के डिप्टी एसपी तंजील अहमद के हत्यारे मुनीर अहमद की सोनभद्र जेल में बीमारी से मौत हो गई। इसके अलावा अमर दुबे और मनोज लगड़ा जैसे कई अपराधी भी पुलिस मुठभेड़ या कस्टडी के दौरान मारे जा चुके हैं।\r\n \r\n
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यह लंबी सूची देखकर ही पंपू को अपनी मौत साफ़ नज़र आ रही है। उसे डर है कि विरोधियों या खुद पुलिस के हाथों उसकी 'फाइल' भी हमेशा के लिए बंद की जा सकती है।
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यूपी एसटीएफ (UP STF) का काल: चुन-चुन कर ढेर किए गए शार्पशूटर
\r\n\r\nकस्टडी से इतर, यूपी एसटीएफ ने भी मैदान में अपराधियों की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछले कुछ वर्षों में एसटीएफ ने कई ऐसे कुख्यात बदमाशों को मार गिराया है, जिन पर लाखों का इनाम था:
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- \r\n मई 2026 में एसटीएफ ने मुनीर गैंग के सबसे खतरनाक शार्पशूटर जुबैर को मुठभेड़ में मार गिराया।\r\n \r\n
- \r\n मई 2023 में पश्चिमी यूपी के आतंक अनिल दुजाना को एसटीएफ ने ढेर कर दिया।\r\n \r\n
- \r\n अप्रैल 2023 में उमेश पाल हत्याकांड के वांछित असद (अतीक अहमद का बेटा) और उसके साथी शूटर गुलाम को झांसी में मार गिराया गया।\r\n \r\n
- \r\n इसके अलावा मार्च 2022 में वाराणसी में मनीष सिंह उर्फ सोनू, जुलाई 2020 में बाराबंकी में टिंकू कपाला, और जनवरी 2025 में अरशद गिरोह के चार खतरनाक बदमाश मुठभेड़ में मारे गए (इस मुठभेड़ में इंस्पेक्टर सुनील ने भी अपना बलिदान दिया था)।\r\n \r\n
- \r\n पांच लाख का इनामी खूंखार डकैत गौरी यादव, मुख्तार अंसारी का शूटर अनुज कन्नौजिया और गोरखपुर का कुख्यात विनोद उपाध्याय भी पुलिस की गोलियों का शिकार हो चुके हैं।\r\n \r\n
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अधिकारियों का सख्त संदेश: "सीमा पार करने से पहले सोचना होगा"
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश पुलिस के उच्चाधिकारी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अपराधियों के साथ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। एसटीएफ चीफ अमिताभ यश का कहना है, "प्रदेश में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ हमारी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। जो भी अपराधी पुलिस या कानून को चुनौती देगा, उस पर हमेशा की तरह कड़ा शिकंजा कसा जाएगा। हमारी सभी यूनिट्स अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं।"
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वहीं, एडीजी जोन भानु भास्कर ने भी अपराधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है, "कानून हाथ में लेने वाले किसी भी बदमाश से पूरी तरह से कानूनी दायरे में ही निपटा जा रहा है। यूपी में अब ऐसा माहौल बन गया है कि अपराध करने से पहले या दूसरे राज्यों के बदमाशों को उत्तर प्रदेश की सीमा पार करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा। जहां तक शामली के अंकित हत्याकांड के आरोपित का सवाल है, वह जल्द ही कार्रवाई के दायरे में आ जाएगा। हमारी सभी टीमें मुस्तैदी से अपना काम कर रही हैं।"
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गैंगस्टर राकेश उर्फ पंपू की करनाल कोर्ट में दी गई यह अर्जी सिर्फ एक अपराधी का डर नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में बदले हुए सिस्टम का एक बड़ा प्रमाण है। एक समय था जब अपराधी खुलेआम घूमते थे और आम जनता डरती थी; आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने अपराधियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अपराध का रास्ता अब सीधा जेल या फिर श्मशान की ओर जाता है।
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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत पंपू की इन मांगों पर क्या फैसला सुनाती है और यूपी पुलिस उसे किस तरह से रिमांड पर लेकर आती है।
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