खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक दिल दहला देने वाली और दोस्ती के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के खतौली थाना क्षेत्र में एक युवक की उसके ही जिगरी दोस्तों ने बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी। कातिल इतने शातिर थे कि उन्होंने न केवल हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की, बल्कि किसी को शक न हो, इसलिए मृतक के परिवार वालों के साथ मिलकर उसे 10 दिनों तक पागलों की तरह ढूंढने का नाटक भी करते रहे। मुजफ्फरनगर पुलिस ने मंगलवार दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 29 अगस्त से लापता अतुल की हत्या का चौंकाने वाला खुलासा किया है।READ ALSO:-मेरठ में पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी का बेटा फिरोज उर्फ भूरा गिरफ्तार: सरेआम पिस्टल लहराकर दी थी जान से मारने की धमकी, वायरल वीडियो पर पुलिस का बड़ा एक्शन
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गायब होने की मिस्ट्री और परिवार की बेचैनी इस खौफनाक दास्तान की शुरुआत 29 अगस्त से होती है। खतौली थाना क्षेत्र के गांव भैंसी निवासी 22 वर्षीय अतुल अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। परिवार वालों ने उसे हर संभावित जगह पर तलाशा, रिश्तेदारों से पूछताछ की, लेकिन अतुल का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी। आखिरकार, थक हारकर 8 सितंबर को अतुल के भाई कपिल पुत्र संतरपाल ने खतौली थाने में अपने भाई की गुमशुदगी और अनहोनी की आशंका जताते हुए एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
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कातिल का 'मास्टरमाइंड' ड्रामा: SSP ऑफिस तक किया प्रदर्शन इस पूरे हत्याकांड में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात आरोपी सोनू का शातिर दिमाग था। 19 वर्षीय सोनू, अतुल का बहुत करीबी दोस्त था। हत्या को अंजाम देने के बाद सोनू ने अपने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दी। वह गांव में बिल्कुल सामान्य तरीके से रह रहा था।
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जब अतुल के परिवार वालों ने उसे ढूंढना शुरू किया, तो सोनू सबसे आगे रहा। वह दिन-रात परिवार वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अतुल की तलाश करने का नाटक करता रहा। हद तो तब हो गई जब अतुल की बरामदगी की मांग को लेकर परिवार वाले मुजफ्फरनगर SSP ऑफिस पहुंचे, तो हत्यारा सोनू भी उनके साथ वहां खड़ा था और पुलिस से जल्द से जल्द अतुल को ढूंढने की गुहार लगा रहा था। उसने यह सब इसलिए किया ताकि किसी भी सूरत में पुलिस या गांव वालों की शक की सुई उस पर न घूमे।
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पुलिस और SOG की एंट्री: ऐसे खुला खौफनाक राज मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरनगर के SSP संजय कुमार वर्मा ने खतौली पुलिस के साथ-साथ SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीम को भी इस ब्लाइंड केस को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंप दी। पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिर तंत्र का जाल बिछाया।
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जांच के दौरान पुलिस को एक बेहद अहम सुराग मिला। गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को बताया कि 29 अगस्त (जिस दिन अतुल गायब हुआ था) को उसे आखिरी बार उसके ही दोस्तों— सोनू (19) और तालिब (22) के साथ देखा गया था। यह सुराग मिलते ही पुलिस ने बिना देरी किए सोनू को हिरासत में ले लिया। शुरुआत में तो सोनू ने पुलिस को गुमराह करने की बहुत कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, तो सोनू टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
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हत्या की इनसाइड स्टोरी: आखिर क्यों बहाया दोस्त का खून? सोनू, तालिब और अतुल तीनों ही भैंसी गांव के रहने वाले थे। तीनों की उम्र 19 से 22 साल के बीच थी, तीनों अविवाहित थे और पिछले 5-6 सालों से बहुत गहरे दोस्त थे। तीनों एक साथ बढ़ई (Carpenter) का काम भी करते थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि खून की प्यास जाग उठी?
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पुलिस पूछताछ में सोनू ने बताया कि अतुल उसका दोस्त जरूर था, लेकिन उसकी एक गंदी आदत ने सोनू के अंदर नफरत का बीज बो दिया था। सोनू ने आरोप लगाया कि अतुल उसके बड़े भाई बबलू और उसकी छोटी बहन को लेकर गांव में अक्सर गलत और अश्लील बातें (कमेंटबाजी) करता था। इस बात को लेकर करीब तीन महीने पहले सोनू और अतुल के बीच भयंकर झगड़ा भी हुआ था। उस वक्त मामला शांत हो गया था, लेकिन अतुल ने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं। बहन की बदनामी से सोनू आगबबूला था और इसी वजह से उसने अतुल को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की कसम खा ली थी।
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बीयर पार्टी में रची गई खूनी साजिश और खौफनाक अंजाम एसएसपी के मुताबिक, 28 अगस्त की रात सोनू और उसका दूसरा साथी तालिब एक साथ बैठकर बीयर पी रहे थे। शराब के नशे में सोनू ने अपने दिल की भड़ास तालिब के सामने निकाली और उसी रात दोनों ने मिलकर अतुल की हत्या की फुलप्रूफ योजना बना डाली।
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अगले दिन, 29 अगस्त को योजना के तहत सोनू और तालिब ने अतुल से संपर्क किया। उन्होंने पूरी गर्मजोशी दिखाते हुए अतुल को 'अमरूद खाने' के बहाने खेतों की तरफ बुलाया। पुरानी दोस्ती के कारण अतुल को उन पर जरा भी शक नहीं हुआ और वह उनके साथ बाइक पर बैठ गया। दोनों उसे बाइक से हाईवे किनारे सुनसान खेतों की ओर ले गए।
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जैसे ही वे लोग गन्ने के एक घने खेत के पास पहुंचे, सोनू और तालिब ने अचानक अतुल पर हमला कर दिया। उन्होंने अपने साथ लाए चाकू से अतुल पर ताबड़तोड़ कई वार किए। खून से लथपथ अतुल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हत्या के बाद दोनों ने अतुल के शव को उसी गन्ने के खेत में गहराई में छिपा दिया। सबूत मिटाने के लिए सोनू ने अतुल का मोबाइल फोन अपने कब्जे में लिया, उसे बुरी तरह तोड़ा और पास ही बह रहे भैंसी नाले में फेंक दिया ताकि पुलिस लोकेशन ट्रेस न कर सके।
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गिरफ्तारी और सबूतों की बरामदगी SSP संजय कुमार वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दोनों हत्यारे पुलिस की भनक लगते ही शहर छोड़कर भागने की फिराक में थे। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के चलते उन्हें भागने का मौका नहीं मिला और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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पूछताछ के बाद पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर उस गन्ने के खेत में पहुंची, जहां उन्होंने शव को ठिकाने लगाया था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने अतुल का क्षत-विक्षत शव बरामद कर लिया है। इसके साथ ही हत्या में इस्तेमाल किया गया खून से सना चाकू भी बरामद कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अब घटनास्थल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है, ताकि इन दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
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इस घटना ने मुजफ्फरनगर के भैंसी गांव में मातम और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। हर कोई इस बात से हैरान है कि जिस दोस्त के साथ उठना-बैठना था, वही जान का दुश्मन कैसे बन गया।