खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में मुजफ्फरनगर जिले की सिविल लाइन थाना पुलिस को एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। मुजफ्फरनगर, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जिला है, वहां पिछले कुछ समय से सिंथेटिक ड्रग्स और नशीली दवाओं की तस्करी की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। तस्कर युवाओं को नशे की लत लगाकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे। लेकिन, मुजफ्फरनगर पुलिस की सतर्कता और सटीक मुखबिरी ने मौत का यह सामान बांटने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। पुलिस ने करोड़ों रुपये की कीमत की नशीली दवाओं की खेप पकड़ी है, जिसे एक सफेद रंग की बिना नंबर वाली लग्जरी कार के जरिए सप्लाई किया जा रहा था।READ ALSO:-गाजियाबाद में 'मोरल पुलिसिंग' का आतंक: हिजाब पहनी मुस्लिम दोस्त के साथ घूमने पर हिंदू युवक की सरेआम पिटाई, आरोपियों ने दी भद्दी गालियां
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चेकिंग के दौरान कैसे खुली पोल: एसडी तिराहे से माल रोड तक का पीछा

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इस पूरे ऑपरेशन को बहुत ही सूझबूझ और तत्परता के साथ अंजाम दिया गया। मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार वर्मा ने एक विशेष पत्रकार वार्ता का आयोजन कर इस पूरी घटना का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने पेश किया।
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एसएसपी ने बताया कि जिले में अपराध नियंत्रण और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। सिविल लाइन थाना प्रभारी इंद्रजीत सिंह के कुशल नेतृत्व में पुलिस टीमें विभिन्न चौराहों पर मुस्तैद थीं। इसी दौरान, उपनिरीक्षक (SI) अरुण चाहर अपनी टीम के साथ रेलवे रोड पर संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग कर रहे थे। तभी एसडी तिराहे की दिशा से एक सफेद रंग की बलेनो कार आती हुई दिखाई दी। पुलिस की नजर कार पर इसलिए गई क्योंकि उस पर कोई नंबर प्लेट नहीं लगी थी।
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जब पुलिस ने टॉर्च और हाथ के इशारे से कार को रुकने का संकेत दिया, तो चालक घबरा गया। रुकने के बजाय उसने कार की रफ्तार तेज कर दी और पुलिस बैरिकेडिंग को चकमा देते हुए माल रोड की ओर भागने लगा। पुलिस टीम ने तुरंत अपनी गाड़ियों से इस संदिग्ध बलेनो कार का पीछा किया। कुछ ही दूरी पर पुलिस ने घेराबंदी करके कार को रोक लिया और उसमें बैठे संदिग्धों को हिरासत में ले लिया।
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कार से मिला 'नशे का जखीरा': 72 हजार कैप्सूल और सैकड़ों इंजेक्शन

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जब पुलिस ने पकड़ी गई बलेनो कार की तलाशी ली, तो अंदर का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। नशीली दवाओं की इस खेप को बहुत ही शातिराना तरीके से कार के अंदर छिपाकर रखा गया था। कार की पिछली सीट पर दो बड़े कार्टून रखे हुए थे, जबकि डिग्गी में एक कार्टून और एक बैग छिपाकर रखा गया था।
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बरामदगी का विवरण:

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    भूरे रंग के कैप्सूल: जांच के दौरान दो कार्टूनों से स्पास्मोविल (Spasmovil) कंपनी के भूरे रंग के 47,976 ट्रामाडोल (Tramadol) कैप्सूल बरामद हुए। इन कैप्सूलों का कुल वजन लगभग 28.78 किलोग्राम आंका गया है।
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    नीले रंग के कैप्सूल: कार की डिग्गी से मिले एक अन्य कार्टून से नीले रंग के 23,976 ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए गए, जिनका वजन लगभग 14.13 किलोग्राम था।
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    कुल ट्रामाडोल: इस प्रकार तस्करों के पास से कुल 72,000 प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल जब्त किए गए हैं।
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    नशीले इंजेक्शन: कार से बरामद हुए बैग की तलाशी लेने पर उसमें से एविल (Avil) कंपनी के 50 इंजेक्शन और पैंटासिल (Pentasil) कंपनी के 499 इंजेक्शन (कुल 549 इंजेक्शन) बरामद हुए। नशेड़ी इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल नशे के प्रभाव को बढ़ाने के लिए कॉकटेल के रूप में करते हैं।
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गिरफ्तार आरोपी और उनका काला नेटवर्क

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पुलिस ने कार में सवार तीन तस्करों को मौके से ही धर दबोचा। पूछताछ के दौरान इनकी पहचान एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के गुर्गों के रूप में हुई है, जो मेरठ और मुजफ्फरनगर के बीच सक्रिय थे।
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गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम और पते:

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    दीपक: पुत्र रोहताश, निवासी तीर्थ कॉलोनी (रेलवे स्टेशन के पास, खतौली)। इसका मूल निवास ग्राम कुतुबपुर, थाना छपार (मुजफ्फरनगर) है।
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    कलीम: पुत्र अशफाक, निवासी बधौली, थाना खरखौदा (जनपद मेरठ)।
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    जुनैद: पुत्र इकबाल, निवासी मुफ्ती कय्यूम मदरसा के पास, जूस वाली गली, लोहिया नगर (जनपद मेरठ)।
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पुलिस की पूछताछ (फर्द विवरण) में इन आरोपियों ने अपने जुर्म को कबूल किया है। आरोपियों ने बताया कि वे इन प्रतिबंधित नशीली दवाओं को गुपचुप तरीके से ब्लैक मार्केट (काले बाजार) से थोक भाव में खरीदते थे। इसके बाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ और आसपास के जिलों में जहां-जहां युवाओं और नशेड़ियों के बीच इसकी मांग होती थी, वहां इसे कई गुना अधिक (ऊंचे) दामों पर सप्लाई कर देते थे। बिना नंबर की गाड़ी का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा था ताकि पुलिस की नजरों और सीसीटीवी कैमरों से बचा जा सके।
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पुलिस की आगे की रणनीति: बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की तलाश

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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की कार्रवाई केवल इन तीन तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस अब इस पूरे रैकेट के 'बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज' (Backward and Forward Linkages) खंगाल रही है।
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    बैकवर्ड लिंकेज: ये दवाइयां किस दवा कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर या मेडिकल स्टोर से ब्लैक में खरीदी गईं?
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    फॉरवर्ड लिंकेज: मुजफ्फरनगर और आसपास के किन-किन इलाकों, कॉलेज परिसरों या ठेकों पर इनकी सप्लाई की जानी थी? पुलिस सर्विलांस टीम की मदद से आरोपियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है, ताकि इस गिरोह के सरगना और अन्य सफेदपोश लोगों तक पहुंचा जा सके।
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कड़ी कानूनी कार्रवाई: NDPS एक्ट के तहत भेजा गया जेल

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नशीली दवाओं की इस बड़ी खेप को जब्त करने के बाद पुलिस ने सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। बरामद दवाओं के नमूने (Samples) अलग-अलग लेकर उन्हें सील कर दिया गया है, जिन्हें फोरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेजा जाएगा।
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    NDPS एक्ट: तीनों आरोपियों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में धारा 8/21/22 एनडीपीएस एक्ट (स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम - NDPS Act) के तहत बेहद संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
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    मोटर वाहन अधिनियम: तस्करी में इस्तेमाल की जा रही सफेद रंग की बलेनो कार को पुलिस ने धारा 207 मोटर वाहन (MV) अधिनियम के तहत सीज (जब्त) कर दिया है।
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इस सफल ऑपरेशन में शामिल पुलिस टीम

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मुजफ्फरनगर पुलिस की इस शानदार सफलता के पीछे पूरी टीम की मेहनत और सटीक सूचना तंत्र का हाथ रहा। इस बड़े ऑपरेशन को सफल बनाने में निम्नलिखित पुलिस अधिकारियों और जवानों की अहम भूमिका रही:
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    प्रभारी निरीक्षक: इंद्रजीत सिंह (थाना सिविल लाइन)
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    उपनिरीक्षक (SI): अरुण चाहर
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    कांस्टेबल: अंकित कुमार, सैनी कुमार, मोहित कुमार, सुधीर कुमार, ब्रह्मदेव सिंह, याकूब अली, सनी और पंकज भाटी।
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    रिजर्व कांस्टेबल: अनमोल सिंह।
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मुजफ्फरनगर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल नशे के सौदागरों में हड़कंप मच गया है, बल्कि स्थानीय जनता और अभिभावकों ने भी पुलिस के इस सराहनीय कदम की भरपूर प्रशंसा की है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी ड्रग माफिया को बख्शा नहीं जाएगा।