श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर पूरी दुनिया में भारत का डंका बजा दिया है। जब पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के जश्न में डूबा था, ठीक उसी समय अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने एक नया रक्षक पैदा किया। इसरो ने 4 सितंबर की सुबह करीब 2 बजकर 55 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) के दूसरे लॉन्च पैड से एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
\r\n\r\nइस मिशन के तहत 'नॉटी ब्वॉय' (Naughty Boy) के नाम से मशहूर GSLV-F17 रॉकेट के जरिए भारत के सबसे एडवांस जियो-इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 (GISAT-1A) को उसकी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इस सैटेलाइट को इसके काम करने के अचूक तरीके के कारण 'बाज' (Baaz) नाम दिया गया है। यह प्रक्षेपण न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के लिहाज से, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा रक्षा के नजरिए से एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nMission Success!
\r\n— ISRO (@isro) September 3, 2026
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\r\nGSLV-F17 has successfully accomplished its mission, placing EOS-05 into the intended orbit.
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\r\nSharing a few memorable moments from the lift-off.
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\r\nFor more information:https://t.co/VneB2jgZoY#GSLVF17 #EOS05 #ISRO pic.twitter.com/kv0zB6V5Vi
'बाज' की उड़ान: दुश्मनों के लिए काल, भारत के लिए ढाल
\r\n\r\nइसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देश को संबोधित करते हुए बताया कि धरती से करीब 3600 (वास्तव में 36,000) किलोमीटर ऊपर जियो सिंक्रोनस ऑर्बिट (Geosynchronous Orbit) में 'एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट 05' को सटीक रूप से स्थापित कर दिया गया है। यह GSLV रॉकेट की 19वीं सफल उड़ान है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nLIFT-OFF!
\r\n— ISRO (@isro) September 3, 2026
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\r\nGSLV-F17 carrying EOS-05 lifts off from Satish Dhawan Space Centre, SHAR, Sriharikota.
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\r\nLivestreaming:https://t.co/uCaGCKcwuC
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क्या है इस सैटेलाइट की खासियत?
\r\n\r\nयह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियो सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजा गया है। आमतौर पर अर्थ ऑब्जर्वेशन (रिमोट सेंसिंग) सैटेलाइट पृथ्वी के काफी करीब (Low Earth Orbit) परिक्रमा करते हैं और किसी एक विशेष स्थान की तस्वीर कई दिनों में केवल एक बार ही क्लिक कर पाते हैं। लेकिन EOS-05 या 'बाज' की कार्यप्रणाली बिल्कुल अलग है।
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यह 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित होने के कारण पृथ्वी के घूर्णन के साथ-साथ चलेगा, जिसका मतलब है कि यह हमेशा भारतीय उपमहाद्वीप के ठीक ऊपर स्थिर रहेगा।
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- \r\n हर 30 मिनट में रियल टाइम अपडेट: यह सैटेलाइट हर 30 मिनट में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और उसकी सीमाओं की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें क्लिक करेगा।\r\n \r\n
- \r\n 700 मिलीमीटर का ताकतवर टेलीस्कोप: इस सैटेलाइट में 700 मिमी का एक विशाल टेलीस्कोप लगा है जो विजिबल (Visible), नियर-इन्फ्रारेड (NIR), और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड (SWIR) बैंड में तस्वीरें और डेटा कलेक्ट करने में सक्षम है। इसका सीधा मतलब यह है कि रात के अंधेरे में या खराब मौसम में भी दुश्मनों की कोई भी हरकत इस सैटेलाइट की नजरों से बच नहीं सकेगी।\r\n \r\n
राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का नया 'कमांड सेंटर'
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1. बॉर्डर सिक्योरिटी (Border Security):
\r\n\r\nभारत की सीमाएं चीन और पाकिस्तान जैसे अस्थिर पड़ोसियों से लगती हैं, जहां घुसपैठ और सैन्य जमावड़े का खतरा हमेशा बना रहता है। 'बाज' सैटेलाइट के चालू होने के बाद, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पार होने वाली किसी भी हलचल की जानकारी महज कुछ मिनटों में मिल जाएगी। बंकर बनाना हो, हथियारों की आवाजाही हो या आतंकियों की घुसपैठ—सब कुछ अब इसरो के कैमरों में कैद होगा।
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2. आपदा प्रबंधन में संजीवनी (Disaster Management):
\r\n\r\nकेवल दुश्मनों पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रकोप से बचने में भी यह सैटेलाइट 'संजीवनी' का काम करेगा। यह सैटेलाइट बाढ़ (Floods), भयंकर चक्रवाती तूफानों (Cyclones), और जंगलों में लगने वाली आग (Forest Fires) जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पल-पल का रियल-टाइम अपडेट देगा। इससे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य सरकारों को बचाव कार्य तेजी से चलाने में मदद मिलेगी।
\r\n\r\n3. कृषि और पर्यावरण की निगरानी:
\r\n\r\nकिसानों के लिए भी यह एक वरदान है। यह सैटेलाइट फसलों की वास्तविक स्थिति, मिट्टी में नमी (Soil Moisture), और जंगलों के आवरण का सटीक आंकलन करेगा। इससे कृषि विभाग को मौसम और उपज से जुड़ी भविष्यवाणियां करने में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी।
\r\n\r\nलॉन्चिंग रॉकेट GSLV-F17 की ताकत
\r\n\r\nजिस रॉकेट ने इस 2367 किलोग्राम वजनी भारी-भरकम 'बाज' सैटेलाइट को अंतरिक्ष तक पहुंचाया है, वह कोई आम रॉकेट नहीं है। GSLV-F17 एक तीन स्टेज (Three-Stage) वाला शक्तिशाली रॉकेट है, जिसकी कुल ऊंचाई लगभग 51.7 मीटर है।
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- \r\n लॉन्च के समय इसका लिफ्टऑफ वजन (Liftoff Weight) 420.5 टन था।\r\n \r\n
- \r\n इस रॉकेट की सबसे बड़ी खूबी इसकी तीसरी क्रायोजेनिक स्टेज है, जो स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। 2000 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले इस భారీ सैटेलाइट को रॉकेट के शीर्ष (Nose) पर सुरक्षित रखा गया था और सही समय पर इसे इसके ऑर्बिट में छोड़ दिया गया।\r\n \r\n
असफलताओं की राख से उठकर लिखी सफलता की दास्तान
\r\n\r\nइसरो की यह सफलता यूं ही नहीं मिली है, इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत, निराशा और फिर से उठ खड़े होने का जज्बा शामिल है।
\r\n\r\n2021 की वो कसक:
\r\n\r\nअगस्त 2021 में, ISRO ने GSLV-F10 रॉकेट के जरिए EOS-03 मिशन लॉन्च किया था। लेकिन उड़ान के 307वें सेकंड में ऑनबोर्ड कंप्यूटर ने मिशन को रोक दिया था। मिशन के क्रायोजेनिक अपर स्टेज में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण वह महत्वपूर्ण मिशन फेल हो गया था। आज का यह नया मिशन (GSLV-F17/EOS-05) उसी अधूरे सपने को पूरा करने के लिए भेजा गया है।
\r\n\r\n2025 और 2026 के झटके:
\r\n\r\nपिछले कुछ समय से इसरो का समय थोड़ा कठिन चल रहा था। 12 जनवरी 2026 को, इसरो ने PSLV-C62 रॉकेट को 16 सैटेलाइट के साथ लॉन्च किया था, लेकिन लॉन्च के तीसरे चरण में 'गड़बड़ी' (Anomaly) के कारण सैटेलाइट अपने सही ऑर्बिट में नहीं पहुंच सके। यह साल 2026 का एकमात्र लॉन्च था जो असफल रहा था। इससे पहले मई 2025 में भी PSLV-C61 को EOS-09 के साथ लॉन्च किया गया था, जो मोटर प्रेशर की समस्या के कारण नाकाम हो गया था।
\r\n\r\nइन लगातार झटकों के बाद, पूरे 8 महीने के लंबे गैप के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने दिन-रात एक करके GSLV-F17 को तैयार किया। मिशन की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए, आज की लॉन्चिंग से ठीक पहले ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने तिरुमाला तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में जाकर माथा टेका था और मिशन की 100% सफलता के लिए प्रार्थना की थी। उनकी प्रार्थना और वैज्ञानिकों की अथक मेहनत आखिरकार रंग लाई।
\r\n\r\nआत्मनिर्भर भारत की अंतरिक्ष में ऊंची उड़ान
\r\n\r\nइस सफल प्रक्षेपण ने साबित कर दिया है कि भारतीय वैज्ञानिक हार मानना नहीं जानते। EOS-05 सैटेलाइट का सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित होना भारत की अंतरिक्ष कूटनीति (Space Diplomacy) और रणनीतिक बढ़त (Strategic Edge) को कई गुना बढ़ा देगा। यह मिशन प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन का एक जीता-जागता प्रमाण है। अब वह दिन दूर नहीं जब अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत दुनिया के किसी भी विकसित देश से पीछे नहीं बल्कि उनके समकक्ष खड़ा नजर आएगा। खबरीलाल की पूरी टीम की तरफ से इसरो के सभी वैज्ञानिकों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई!
\r\n\r\nडिस्क्लेमर (Disclaimer):
\r\n\r\nयह समाचार लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, इसरो (ISRO) द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस रिलीज और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध तकनीकी जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अंतरिक्ष मिशन, रॉकेट की गति, उपग्रह की कक्षा और लॉन्चिंग से जुड़े तकनीकी आंकड़े सांकेतिक और अनुमानित हो सकते हैं। खबरीलाल न्यूज़ पोर्टल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी गोपनीय डेटा का दावा नहीं करता है। लेख का मुख्य उद्देश्य आम जनता तक विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़ी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को सरल भाषा में पहुंचाना है।