बिजनौर (10 सितंबर): समाज में महिलाओं की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन कितनी मुस्तैदी से काम कर रहा है, इसका जायजा लेने के लिए गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की माननीय अध्यक्षा श्रीमती विजया रहाटकर बिजनौर पहुंचीं। बिजनौर कलेक्ट्रेट स्थित ऐतिहासिक 'महात्मा विदुर सभागार' में उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक बेहद अहम और मैराथन समीक्षा बैठक की। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्रीमती रहाटकर ने स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं का विकास सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर हर गांव और हर घर तक पहुंचना चाहिए। बैठक में जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर सहित तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।READ ALSO:-बिजनौर में नए SP का दिखा कड़क अंदाज: 48 घंटे में बरामद की किसान की चोरी हुई भैंसें, योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का दिखा असर
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कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा: POSH एक्ट पर फोकस
\r\n\r\nबैठक के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। ऐसे में कार्यस्थल पर उन्हें सुरक्षित और भयमुक्त माहौल प्रदान करना प्रशासन और नियोक्ताओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान—जैसे स्कूल, विद्यालय, अस्पताल, होटल, फैक्ट्रियां और अन्य ऐसे प्रतिष्ठान जहां 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां अनिवार्य रूप से 'पॉश एक्ट' (POSH Act - Prevention of Sexual Harassment at Workplace) के तहत 'आंतरिक शिकायत समिति' (Internal Complaints Committee - ICC) का गठन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि यह कमेटियां केवल कागजों पर न हों, बल्कि पूरी तरह से सक्रिय हों और महिलाओं को इनके बारे में जागरूक किया जाए।
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मिशन 2030: बाल विवाह मुक्त बनेगा भारत
\r\n\r\nसमाज की सबसे बड़ी कुरीतियों में से एक बाल विवाह पर चिंता व्यक्त करते हुए अध्यक्षा श्रीमती विजया रहाटकर ने एक बड़े लक्ष्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक पूरे देश को बाल विवाह (Child Marriage) से पूरी तरह मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
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इस दिशा में बिजनौर प्रशासन को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभी से कमर कसनी होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस राष्ट्रीय लक्ष्य का कम से कम 10 प्रतिशत कार्य इसी वर्ष (2026) में पूरा किया जाना चाहिए। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने, ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी सौंपने और शिकायत मिलने पर त्वरित एवं कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर पुरुष की तरक्की और समाज की प्रगति में महिलाओं की समान भागीदारी होती है, और बाल विवाह जैसी प्रथाएं बेटियों के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं।
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स्वास्थ्य, पोषण और स्वरोजगार पर विशेष मंथन
\r\n\r\nमहिलाओं को केवल कानूनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक और शारीरिक रूप से भी सशक्त बनाने की आवश्यकता है। अध्यक्षा ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्रियों के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ अभियान तेज करने को कहा।
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इसके साथ ही स्वरोजगार (Self-Employment) और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर चर्चा की गई। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए महिलाओं को कुटीर उद्योगों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
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योजनाओं की ऑडिट और त्रैमासिक समीक्षा के निर्देश
\r\n\r\nयोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली लापरवाही पर लगाम कसने के लिए अध्यक्षा ने जिलाधिकारी की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन माह में 'जेंडर इक्वलिटी' (Gender Equality) और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर एक नियमित समीक्षा बैठक आहूत की जाए।
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उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की केवल समीक्षा ही न हो, बल्कि उनका नियमित ऑडिट (Regular Audit) भी किया जाए। इससे यह पता चलेगा कि योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच रहा है या नहीं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया।
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पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन से परखी गई जमीनी हकीकत
\r\n\r\nबैठक के दौरान पुलिस विभाग और प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों द्वारा महिलाओं से संबंधित योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट एक विस्तृत पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से प्रस्तुत की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने एक-एक बिंदु का बारीकी से अध्ययन किया और जहां कमियां नजर आईं, वहां अधिकारियों को तुरंत सुधार के लिए निर्देशित किया।
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इन प्रमुख योजनाओं की हुई सघन समीक्षा: बैठक में महिला कल्याण से जुड़ी कई अहम योजनाओं की अद्यतन स्थिति (Current Status) प्रस्तुत की गई और उन्हें जन-जन तक पहुंचाने के दिशा-निर्देश दिए गए:
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- \r\n प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता के वितरण की समीक्षा।\r\n \r\n
- \r\n सुकन्या समृद्धि योजना: बेटियों के सुरक्षित भविष्य और उच्च शिक्षा के लिए डाकघरों व बैंकों में खोले जा रहे खातों की प्रगति।\r\n \r\n
- \r\n पेंशन योजनाएं: वृद्धावस्था पेंशन और निराश्रित महिला (विधवा) पेंशन के लाभार्थियों का सत्यापन और समय पर भुगतान।\r\n \r\n
- \r\n आवास योजनाएं: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं में महिलाओं के नाम पर संपत्तियों के पंजीकरण की स्थिति।\r\n \r\n
- \r\n वन स्टॉप सेंटर (One Stop Center): हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और पुलिस सहायता प्रदान करने वाले केंद्रों की कार्यप्रणाली।\r\n \r\n
- \r\n PWDVA एक्ट 2005: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) के तहत दर्ज मामलों में त्वरित न्याय प्रक्रिया।\r\n \r\n
- \r\n जी राम जी योजना: ग्रामीण आजीविका से जुड़ी इस योजना के तहत महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।\r\n \r\n
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'विदुर ब्रांड' किट की भेंट और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
\r\n\r\nसमीक्षा बैठक और तमाम गंभीर चर्चाओं के बाद कार्यक्रम का समापन एक सकारात्मक और आत्मीय माहौल में हुआ। बिजनौर जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी जसजीत कौर ने माननीय अध्यक्षा श्रीमती विजया रहाटकर को जिले के प्रसिद्ध 'विदुर ब्रांड' (Vidur Brand) उत्पादों की एक विशेष किट स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की। वहीं, दूसरी ओर राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से भी जिलाधिकारी बिजनौर को महिला सशक्तिकरण के प्रतीक स्वरूप एक विशेष भेंट प्रदान की गई।
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इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी जसजीत कौर के अलावा पुलिस अधीक्षक (SP), मुख्य विकास अधिकारी (CDO), जिला प्रोबेशन अधिकारी, महिला थाना प्रभारी सहित पुलिस व प्रशासनिक महकमे के कई आला अधिकारी और राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम के सदस्य मौजूद रहे। यह बैठक बिजनौर जिले में महिला सुरक्षा और विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।