खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली का राजनीतिक पारा एक बार फिर उफान पर है। मामला जुड़ा है जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक आम नागरिक पर हुए हमले से। गत 4 अगस्त 2026 को दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी जोन माने जाने वाले संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर उस समय भारी गहमागहमी और तनाव का माहौल बन गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेतृत्व और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर दिया।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई CJP के प्रमुख नेता सौरव दास और पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने की। उनके साथ भीम आर्मी के संस्थापक और सांसद चंद्रशेखर आजाद (रावण) भी अपने समर्थकों और आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के कार्यकर्ताओं के साथ पूरी ताकत से मौजूद रहे। सभी का एक सूत्रीय और कड़ा रुख था—आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बिना किसी देरी के तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उस पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) की धाराएं लगाई जाएं।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

क्या है पूरा विवाद और कैसे भड़की चिंगारी?

\r\n\r\n
​यह पूरा विवाद तब और अधिक गहरा गया जब सोशल मीडिया पर एक वायरल पॉडकास्ट क्लिप सामने आई। इस वायरल वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा दिए गए बयानों ने आग में घी का काम किया। रिपोर्ट्स और वायरल क्लिप के मुताबिक, जंतर-मंतर पर चल रहे एक प्रोटेस्ट के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार अपनी तरफ कैमरा करके वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। वायरल क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज खुद यह दावा करते हुए नजर आए कि बहस के दौरान झड़प बढ़ी और उन्होंने संजय कुमार के सिर पर अपने हाथ में पहने हुए कड़े से जोरदार वार कर दिया। इस हिंसक हमले में संजय कुमार का सिर बुरी तरह फट गया, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा और उनके सिर पर कई टांके लगाने पड़े।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि इतनी गंभीर घटना और सार्वजनिक रूप से किए गए खुलासे के बावजूद शुरुआती दौर में आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। वायरल क्लिप में यह भी आरोप लगाए गए कि इस पूरे मामले में कुछ खास राजनीतिक हस्तियों (जैसे कपिल मिश्रा और चिराग पासवान का नाम चर्चा में आया) का परोक्ष या अपरोक्ष समर्थन आरोपी को प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

दिल्ली पुलिस पर बरसे CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका:

\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

"गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस सो रही है"

\r\n\r\n
​संसद मार्ग थाने के बाहर मीडिया और समर्थकों के सैलाब के बीच CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए दो टूक शब्दों में कहा:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
\r\n
“जंतर-मंतर पर हमारे प्रोटेस्ट के दौरान हमारी साथी निशु के पिता संजय जी के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, उनका सिर फोड़ा गया। यह कोई छुपी हुई घटना नहीं थी, बल्कि खुलेआम सरेआम अंजाम दी गई। लगातार सौरव दास और हमारी पूरी टीम दिल्ली पुलिस से यह मांग करती रही कि इन उपद्रवी गुंडों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसा गंभीर मुकदमा दर्ज किया जाए, लेकिन दिल्ली पुलिस गहरी नींद में सोती रही।”
\r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​आशुतोष रांका ने आगे तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश की राजधानी दिल्ली के हालात ऐसे हो गए हैं कि अपराधी कैमरे के सामने खुद गर्व से यह कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने किसी का सिर फोड़ा है और उसे जान से मारने की कोशिश की थी, इसके बावजूद पुलिस राजनीतिक दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP शुरू दिन से ही निशु आजाद और उनके परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और जब तक न्याय नहीं मिल जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की एंट्री से बढ़ा सियासी दबाव

\r\n\r\n
​इस पूरे घटनाक्रम में भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद के संसद मार्ग थाने पहुंचने से मामला राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में आ गया है। चंद्रशेखर आजाद के आने से वहां मौजूद भीड़ का उत्साह और विरोध का स्वर दोनों तेज हो गए।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेताओं का स्पष्ट कहना था कि यदि कानून का राज जिंदा है, तो एक नागरिक के सिर पर कड़े से वार करने और उसे जान से मारने की खुलेआम धमकी देने वाले शख्स को अब तक सलाखों के पीछे होना चाहिए था। पुलिस की यह सुस्ती न्यायपालिका और कानून के शासन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

आगे क्या? (प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती)

\r\n\r\n
​CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के इस सामूहिक दबाव के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों पर भी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर संगीन धाराओं में चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत मारपीट का न रहकर राजधानी की दलित राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक निष्पक्षता का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। खबरीलाल इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे के हर अपडेट्स आप तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

\r\n\r\n
इस समाचार लेख में दी गई जानकारियां, नेताओं के बयान और घटनाक्रम से जुड़े तथ्य विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयानों पर आधारित हैं। खबरीलाल किसी भी पक्ष के दावों की सत्यता की पुष्टि अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से नहीं करता है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य पाठकों को निष्पक्ष और समयबद्ध जानकारी देना है। किसी भी कानूनी विवाद की स्थिति में न्यायिक संस्थाओं के आदेश ही अंतिम माने जाएंगे।