मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले में गुरुवार की शाम अफवाहों और गलतफहमी के चलते एक बड़ा बवाल होते-होते बच गया। जिले के भावनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गढ़ रोड पर स्थित एक होटल में उस समय अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया, जब कुछ लोगों को यह भ्रामक सूचना मिली कि एक युवक किसी 'नाबालिग' लड़की को लेकर होटल के कमरे में ठहरा हुआ है। सूचना के फैलते ही हिंदू संगठन से जुड़े कई कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और उन्होंने होटल के बाहर व अंदर भारी हंगामा शुरू कर दिया। लगभग तीन घंटे तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे ने पुलिस-प्रशासन की सांसें अटका दीं। हालांकि, बाद में पुलिस की निष्पक्ष जांच में यह पूरी सूचना महज एक अफवाह साबित हुई।READ ALSO:-बिजनौर: महिलाओं के हुनर और हौसले को मिली नई उड़ान, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने दिया 'महा लखपति दीदी' बनने का विजन
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अफवाह से भड़की चिंगारी और होटल में हंगामा
\r\n\r\nघटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम को अचानक क्षेत्र में यह बात आग की तरह फैल गई कि गढ़ रोड स्थित एक निजी होटल में एक युवक के साथ एक नाबालिग किशोरी मौजूद है। जैसे ही यह अपुष्ट सूचना हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं तक पहुंची, वे बड़ी संख्या में एकजुट होकर सीधे उस होटल में जा धमके।
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होटल पहुंचते ही भीड़ ने तीखी नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। वहां मौजूद होटल के कर्मचारियों और मैनेजर ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का काफी प्रयास किया कि उनके होटल में सभी नियमों का पालन करते हुए ही कमरे दिए जाते हैं और कोई भी अनैतिक कार्य नहीं हो रहा है, लेकिन आक्रोशित भीड़ किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थी। मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा था और स्थिति तनावपूर्ण होने लगी थी।
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काली नदी चौकी पुलिस का त्वरित हस्तक्षेप
\r\n\r\nहोटल में बढ़ते बवाल और हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए सबसे पहले पास की ही काली नदी पुलिस चौकी से दो पुलिसकर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद भीड़ को शांत करने का प्रयास किया और सीधे उस कमरे की ओर गए जहां युवक मौजूद था।
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पुलिसकर्मियों ने युवक को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाला और हिरासत में लेते हुए अपने साथ ले जाने लगे। इस दौरान, घबराए हुए युवक ने बार-बार पुलिस को यह समझाने का प्रयास किया कि वह कोई अपराध नहीं कर रहा है। उसने पुलिस को बताया कि वे दोनों अच्छे दोस्त हैं, बालिग हैं और अपनी मर्जी से कुछ समय बिताने के लिए होटल आए थे। लेकिन, बाहर मौजूद भीड़ के आक्रोश को देखते हुए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिसकर्मी युवक को पूछताछ के लिए काली नदी चौकी ले आए।
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एसएसआई मोहम्मद उवैस की एंट्री और भीड़ का छंटना
\r\n\r\nहंगामे की गंभीरता को देखते हुए भावनपुर थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक (SSI) मोहम्मद उवैस भी भारी पुलिस बल के साथ होटल पहुंच गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मौके पर पहुंचते ही हंगामा कर रहे लोगों के तेवर ढीले पड़ गए और भीड़ वहां से धीरे-धीरे खिसकने लगी।
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एसएसआई उवैस ने सबसे पहले होटल परिसर को अपने नियंत्रण में लिया। इसके बाद पुलिस टीम ने उस कमरे का दरवाजा खुलवाया जिसमें युवती मौजूद थी। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में युवती को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने होटल मैनेजर को तलब किया और होटल का वह रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिया जिसमें ठहरने वाले सभी अतिथियों का रिकॉर्ड और पहचान पत्र (ID) दर्ज होते हैं। रजिस्टर, मैनेजर और युवती को भी विस्तृत पूछताछ के लिए काली नदी पुलिस चौकी लाया गया।
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पुलिस चौकी पर खुली सच्चाई: रजिस्टर की एंट्री ने किया दूध का दूध, पानी का पानी
\r\n\r\nकाली नदी चौकी पर जब पुलिस ने गहनता से मामले की जांच शुरू की, तो पूरी तस्वीर ही बदल गई। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में युवती ने स्पष्ट रूप से बताया कि वह कोई नाबालिग बच्ची नहीं है, बल्कि एक बालिग नागरिक है। उसने बेबाकी से पुलिस को बयान दिया कि वह युवक की अच्छी दोस्त है और किसी दबाव या बहकावे में नहीं, बल्कि अपनी पूर्ण सहमति और मर्जी से उसके साथ होटल में आई थी।
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पुलिस ने जब होटल से जब्त किए गए रजिस्टर की जांच की, तो युवती के बयान पूरी तरह सच साबित हुए। रजिस्टर में युवक और युवती दोनों के वैध पहचान पत्र (आधार कार्ड) की प्रतियां संलग्न थीं, जिसमें स्पष्ट था कि दोनों की उम्र 18 वर्ष से अधिक है (यानी दोनों बालिग हैं)। इतना ही नहीं, जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि युवक और युवती दोनों एक ही धर्म और एक ही सजातीय समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया कि 'नाबालिग' और 'लव जिहाद' जैसी बातें महज एक गलतफहमी और कोरी अफवाह थीं।
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परिजनों की नाराजगी और पुलिस की समझाइश
\r\n\r\nसच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों (युवक और युवती) के परिजनों से संपर्क साधा और उन्हें पूरा घटनाक्रम बताते हुए काली नदी चौकी पर बुला लिया। जब युवती के परिजन चौकी पहुंचे, तो उन्होंने अपनी बेटी को इस तरह पुलिस चौकी लाए जाने और बेवजह का तमाशा बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
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परिजनों का तर्क था कि जब बच्चे बालिग हैं और उनके पास वैध पहचान पत्र हैं, तो बिना किसी अपराध के उन्हें इस तरह सार्वजनिक रूप से परेशान क्यों किया गया। इस बात को लेकर कुछ देर के लिए पुलिस अधिकारियों और परिवार के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने बहुत ही धैर्यपूर्वक परिजनों को समझाया कि उन्होंने यह कार्रवाई सिर्फ बच्चों की सुरक्षा और बाहर जमा भीड़ के संभावित खतरे को टालने के लिए की थी। काफी देर की समझाइश के बाद परिजन शांत हुए।
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क्या बोले पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO)?
\r\n\r\nइस पूरे मामले के पटाक्षेप के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी अपना बयान जारी किया है। स्थिति को स्पष्ट करते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) सदर देहात सुधीर कुमार ने कहा:
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\r\n\r\n\r\n"गढ़ रोड स्थित होटल में एक किशोरी के होने की सूचना पर कुछ लोगों द्वारा हंगामा किया जा रहा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिसे किशोरी बताया जा रहा था, वह पूरी तरह से बालिग है और अपनी मर्जी से अपने दोस्त (युवक) के साथ होटल आई थी। होटल के रजिस्टर में दोनों की वैध आईडी (ID) भी दर्ज मिली है। दोनों के परिवारों को थाने बुलाकर पूरी स्थिति से अवगत कराया गया और इसके बाद युवक-युवती को सकुशल उनके परिजनों की सुपुर्दगी में घर भेज दिया गया है। मामले में कोई भी कानूनी अपराध नहीं पाया गया है।"\r\n
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इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर किसी भी नतीजे पर पहुंचना कितना गलत हो सकता है। बिना किसी ठोस जानकारी के किया गया यह हंगामा न सिर्फ दो परिवारों के लिए मानसिक परेशानी का कारण बना, बल्कि पुलिस का भी कीमती समय इसमें बर्बाद हुआ। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना सीधे पुलिस को दें, लेकिन स्वयं कानून हाथ में लेने या बेवजह हंगामा करने से बचें।