नई दिल्ली (News Desk): अगर आप अपने नए घर के लिए या परिवार से अलग होने के बाद एक नया एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद निराशाजनक खबर है। देश में नए एलपीजी कनेक्शन की सुविधा फिलहाल शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। ग्लोबल मार्केट में मचे उथल-पुथल और सप्लाई चेन के चरमराने के कारण, भारत सरकार ने एक कड़ा लेकिन जरूरी कदम उठाया है। सरकार का वर्तमान में पूरा ध्यान नए ग्राहकों को जोड़ने के बजाय, उन करोड़ों मौजूदा ग्राहकों की गैस जरूरतों को पूरा करने पर है, जिनके पास पहले से गैस कनेक्शन मौजूद है।
\r\n\r\nNDTV Profit की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के हवाले से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक देश में एलपीजी की सप्लाई की स्थिति पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक नए गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगी रहेगी।
\r\n\r\nआखिर क्यों लगाई गई नए गैस कनेक्शन पर रोक?
\r\n\r\nइस बड़े फैसले के पीछे की मुख्य वजह भारत के भीतर की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही भू-राजनीतिक (Geopolitical) उथल-पुथल है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से, विशेषकर खाड़ी देशों से आयात (Import) करता है।
\r\n\r\nमार्च 2026 की शुरुआत में ही सरकार ने हालात को भांपते हुए नए कनेक्शन जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी थी। उस समय पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव चरम पर पहुँचने लगा था। इसके तुरंत बाद अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने आग में घी का काम किया। लाल सागर और अन्य प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा का संकट पैदा हो गया, जिससे तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ गए और शिपिंग कंपनियों ने अपने रूट बदल दिए, जिसका सीधा असर भारत पहुंचने वाली एलपीजी की सप्लाई और उसकी कीमतों पर पड़ा। इन्ही बाहरी अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने मार्च से ही नए कनेक्शन बंद कर रखे हैं।
\r\n\r\nसरकार की 'कस्टमर फर्स्ट' नीति: मौजूदा ग्राहकों को बचाने की जद्दोजहद
\r\n\r\nकिसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे अहम होती है। भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे— या तो वह धड़ल्ले से नए कनेक्शन बांटती रहे और भविष्य में सभी के लिए गैस की किल्लत पैदा कर दे, या फिर नए कनेक्शन रोककर मौजूदा ग्राहकों के घरों का चूल्हा जलता रखे। सरकार ने समझदारी दिखाते हुए दूसरा विकल्प चुना।
\r\n\r\nअधिकारी के मुताबिक, "हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश के उन घरों में गैस की कोई कमी न हो जो पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर हैं। अगर हम इस संकट के बीच नए कनेक्शन बांटना जारी रखते हैं, तो मौजूदा सप्लाई सिस्टम कोलैप्स (Collapse) हो सकता है।" इसलिए, जब तक सप्लाई संकट के बादल पूरी तरह छंट नहीं जाते, नए उपभोक्ताओं को इंतजार ही करना पड़ेगा।
\r\n\r\nआत्मनिर्भरता की ओर कदम: 21 रिफाइनरियों को मिला 'महा-टारगेट'
\r\n\r\nबाहरी देशों पर निर्भरता के खतरे को देखते हुए सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। सप्लाई की रुकावट के डर को जड़ से खत्म करने के लिए घरेलू स्तर पर एलपीजी का उत्पादन युद्ध स्तर पर बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
\r\n\r\n13 अगस्त को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की 21 प्रमुख रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों (जिनमें IOCL, BPCL, HPCL और ONGC जैसे दिग्गज शामिल हैं) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में इन कंपनियों के लिए एलपीजी उत्पादन का अधिकतम स्तर (Maximum Production Level) तय किया गया है।
\r\n\r\nक्या है यह नया टारगेट?
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- \r\n इन 21 रिफाइनरियों को प्रतिदिन 63,810 टन एलपीजी उत्पादन करने का सख्त लक्ष्य दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n यह आंकड़ा कोई मामूली आंकड़ा नहीं है; यह भारत की रोजाना एलपीजी खपत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है।\r\n \r\n
- \r\n सबसे खास बात यह है कि यह उत्पादन क्षमता वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तय किए गए घरेलू एलपीजी उत्पादन लक्ष्य के दोगुने से भी ज्यादा है।\r\n \r\n
इस मेगा-प्लान का सीधा सा अर्थ यह है कि सरकार भविष्य में किसी भी 'ग्लोबल शॉक' से बचने के लिए देश के भीतर गैस का एक विशाल बफर स्टॉक (Buffer Stock) तैयार कर रही है। ताकि अगर युद्ध या किसी अन्य कारण से बाहरी सप्लाई रुक भी जाए, तो भारत के नागरिकों को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
\r\n\r\nविकल्प की ओर बढ़ते कदम: PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को मिल रहा भारी बढ़ावा
\r\n\r\nएक तरफ जहां एलपीजी सिलेंडर वाले नए कनेक्शन पर रोक है, वहीं सरकार इस आपदा को अवसर में बदलते हुए PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) के विस्तार पर पूरा जोर लगा रही है। शहरी इलाकों और महानगरों में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।
\r\n\r\nनए उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
\r\n\r\nजो लोग नए गैस कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं, सरकार उन्हें परोक्ष रूप से PNG अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। PNG के कई फायदे हैं:
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- \r\n सिलेंडर बुक करने का झंझट खत्म: गैस सीधे पाइप से घर आती है।\r\n \r\n
- \r\n सप्लाई में रुकावट नहीं: यह 24 घंटे उपलब्ध रहती है और एलपीजी सिलेंडरों की तरह इसके खत्म होने का डर नहीं रहता।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा: यह हवा से हल्की होती है, इसलिए लीकेज की स्थिति में यह सिलेंडर गैस (LPG) की तरह फर्श पर जमा नहीं होती, बल्कि उड़ जाती है।\r\n \r\n
- \r\n सस्ती: लंबी अवधि में यह एलपीजी के मुकाबले अधिक किफायती साबित होती है।\r\n \r\n
महंगाई की मार: कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े
\r\n\r\nघरेलू गैस कनेक्शन पर तो रोक लगी ही है, इसके साथ ही कमर्शियल सेक्टर (व्यावसायिक क्षेत्र) को भी महंगाई का झटका लगा है। 1 सितंबर को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा कर दिया है।
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- \r\n कीमत में उछाल: 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।\r\n \r\n
- \r\n हालांकि यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव लगातार बना हुआ है। इसका सीधा असर रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा चलाने वालों पर पड़ता है, जो आगे चलकर आम जनता के लिए खाने-पीने की चीजों को महंगा कर सकता है।\r\n \r\n
\r\n\r\nआम जनता के लिए आगे क्या?
\r\n\r\nजिन लोगों को तत्काल नए कनेक्शन की आवश्यकता है (जैसे नए शादीशुदा जोड़े, किराएदार, या काम के सिलसिले में शहर बदलने वाले लोग), उनके लिए यह समय थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नए कनेक्शन की सुविधा कब बहाल होगी।
\r\n\r\nऐसे में आपके पास क्या विकल्प हैं?
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- \r\n PNG के लिए आवेदन: यदि आपके इलाके में पाइप वाली गैस की लाइन आ चुकी है, तो तुरंत उसका कनेक्शन लें। यह वर्तमान में सबसे सुरक्षित और सुलभ विकल्प है।\r\n \r\n
- \r\n इलेक्ट्रिक कुकिंग: जब तक एलपीजी कनेक्शन नहीं मिलता, तब तक इंडक्शन कुकटॉप (Induction Cooktop), इलेक्ट्रिक हीटर या माइक्रोवेव का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक आधुनिक और एलपीजी से स्वतंत्र विकल्प है।\r\n \r\n
अंत में, सरकार का यह कदम भले ही नए उपभोक्ताओं के लिए कठोर प्रतीत हो रहा हो, लेकिन राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह एक अनिवार्य फैसला है। जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते और भारत का अपना 'बफर स्टॉक' पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, नए एलपीजी कनेक्शन का सपना फिलहाल 'वेटिंग लिस्ट' में ही रहेगा। जनता को मौजूदा संसाधनों का संयम से उपयोग करना होगा और सरकार के अगले आदेश की प्रतीक्षा करनी होगी।