खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली (क्राइम/सिटी डेस्क): राजधानी दिल्ली में अनियोजित निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक बार फिर कई बेकसूर जिंदगियों पर भारी पड़ी है। दक्षिण दिल्ली के पॉश और छात्र-बाहुल्य क्षेत्र सत्य निकेतन (Satya Niketan) में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां अचानक एक चार मंजिला आवासीय इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इमारत के अंदर चल रहे पेइंग गेस्ट (PG) में रह रहे छात्र और अन्य लोग इस भयानक हादसे की चपेट में आ गए।READ ALSO:-मेरठ में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मिलेगी रफ्तार: औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सिटी बस सेवा के दो नए मार्गों का प्रस्ताव पेश
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प्रशासनिक अमला, पुलिस बल और आपातकालीन सेवाएं पिछले कई घंटों से लगातार मलबा हटाने और दबे हुए लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।
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कैसे हुआ हादसा? पलक झपकते ही खंडहर में बदली बिल्डिंग

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प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह घटना इतनी अचानक घटी कि किसी को भी संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला।
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    भयावह मंजर: अचानक जोरदार धमाके जैसी आवाज के साथ चार मंजिला इमारत भरभराकर नीचे बैठ गई। चंद सेकंड के भीतर पूरी बिल्डिंग मलबे के ढेर में बदल गई।
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    धूल का गुबार और चीख-पुकार: इमारत गिरते ही आसपास के इलाके में काले धुएं और धूल का घना गुबार छा गया। कुछ पलों के लिए कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बाद मलबे के भीतर से दबे हुए लोगों की चीखें और मदद के लिए गुहार लगाने की आवाजें आने लगीं, जिसे सुनकर आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: 9 लोग सुरक्षित बचाए गए, 3 की मौत

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घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन और दमकल विभाग (Fire Department) की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को भी तुरंत मोर्चे पर लगा दिया गया।
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    सुरक्षित रेस्क्यू: बचाव टीमों ने अपनी पेशेवर सूझबूझ का परिचय देते हुए अब तक 9 लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया है, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा गया है।
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    दुखद मौतें: राहत कार्य के दौरान मलबे से अब तक 3 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिससे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
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    तलाशी अभियान जारी: आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कई लोग कंक्रीट और सरियों के भारी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। इसलिए जीवन की अंतिम उम्मीद के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी पूरी गति से जारी है।
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मशीनों के साथ हाथों से हटाया जा रहा है मलबा

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बचाव कार्यों में जुटी टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मलबा बहुत भारी और घना है। जरा सी भी लापरवाही मलबे के नीचे सुरक्षित बचे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
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यही कारण है कि एहतियात के तौर पर भारी पोकलेन या जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल बहुत ही नियंत्रित तरीके से किया जा रहा है। जैसे ही मलबे के भीतर से किसी के फंसे होने की आहट या संकेत मिलता है, बचावकर्मी मशीनों को रोककर अपने हाथों से कंक्रीट और ईंटें हटाने का काम करते हैं। फंसे हुए लोगों को समय पर सांस मिलती रहे, इसके लिए मलबे के बीच से ही ऑक्सीजन पाइप और रेस्क्यू सपोर्ट भी पहुंचाया जा रहा है।
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स्थानीय लोगों के गंभीर आरोप: जर्जर थी इमारत और चल रहा था निर्माण
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इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि यह हादसा केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का परिणाम है।
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    जर्जर हालत: स्थानीय लोगों के अनुसार, सत्य निकेतन की यह इमारत काफी पुरानी और अंदर से जर्जर हो चुकी थी। इसके बावजूद इसमें कमर्शियल रूप से पीजी चलाया जा रहा था।
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    अवैध निर्माण की आशंका: शुरुआती चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि इमारत के निचले हिस्से या बेसमेंट में कुछ आंतरिक निर्माण या तोड़फोड़ का काम चल रहा था, जिसके कारण इमारत की मुख्य नींव कमजोर हो गई और वह अचानक बैठ गई।
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प्रशासन ने इस मामले की गहनता से जांच के आदेश दे दिए हैं। यह भी खंगाला जा रहा है कि इस चार मंजिला इमारत के पास नगर निगम (MCD) के वैध नक्शे और व्यावसायिक अनुमति (PG License) थी या नहीं। लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले भवन स्वामी और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
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सत्य निकेतन में हुआ यह हादसा एक बार फिर दिल्ली जैसे महानगरों में अवैध निर्माण और कमर्शियल पीजी के नाम पर चल रही खिलवाड़ भरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरी प्राथमिकता मलबे के नीचे दबे बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है। प्रशासनिक और राहत टीमें मौके पर डटी हुई हैं।