खबरीलाल डेस्क
देश की राजधानी दिल्ली, जिसे देश का दिल कहा जाता है, एक बार फिर महिलाओं के खिलाफ हुए एक जघन्य अपराध के कारण शर्मसार हुई है। 16 दिसंबर 2012 की वह काली रात जब पूरे देश ने 'निर्भया' के साथ हुई बर्बरता को देखा था, उसके जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि अब एक और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। एक 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ चलती स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की वारदात को अंजाम दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिस्टम के तमाम दावों और कड़े कानूनों के बावजूद आखिर क्यों बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, यह सवाल हर किसी के जेहन में गूंज रहा है।READ ALSO:-बिजनौर में साधुओं के भेष में शातिर लुटेरों का खेल बेनकाब, मौत का डर दिखाकर करते थे वारदात; दो आरोपी गिरफ्तार
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घर से नाराजगी और बारिश की वह खौफनाक रात पुलिस से प्राप्त जानकारी और दर्ज एफआईआर (FIR) के अनुसार, यह पूरी खौफनाक घटना 4 अगस्त की रात की है। पीड़िता, जो कि 11वीं कक्षा की छात्रा है, किसी पारिवारिक बात को लेकर अपने घरवालों से नाराज हो गई थी। गुस्से और भावुकता में आकर उसने घर छोड़ दिया और अपने चचेरे भाई के घर जाने के लिए निकल पड़ी। उस रात मौसम बेहद खराब था, भारी बारिश हो रही थी और चारों तरफ घुप्प अंधेरा छाया हुआ था। बारिश और अंधेरे की वजह से नाबालिग छात्रा रास्ता भटक गई और गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक (Pari Chowk) पर पहुंच गई। रात के अंधेरे में अकेली, घबराई हुई और बारिश में भीगती उस बच्ची को मदद की सख्त दरकार थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसकी यह मजबूरी दरिंदों के लिए एक मौका बन जाएगी।
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 बस का नंबर UP-83 है, यह यूपी के फिरोजाबाद में रजिस्टर्ड है।

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मदद के बहाने बुना गया मौत का जाल उसी दौरान परी चौक से एक स्लीपर बस गुजरी। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि घटना वाले दिन इस स्लीपर बस में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। बस का ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप बस को सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप में मरम्मत के लिए लेकर गए थे। जब बस की मरम्मत पूरी हो गई, तो दोनों खाली बस को लेकर दिल्ली के तिमारपुर (Timarpur) इलाके में स्थित पार्किंग की ओर जा रहे थे। जब यह खाली बस परी चौक पहुंची, तो बारिश में अकेली खड़ी छात्रा ने मदद की उम्मीद में बस को रुकने का इशारा किया।
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ड्राइवर और कंडक्टर ने बस रोकी। छात्रा ने जब उनसे मदद मांगी, तो दोनों ने उसे यह कहकर बस में बैठा लिया कि वे नोएडा सेक्टर 63 की तरफ जा रहे हैं और उसे उसके गंतव्य के पास छोड़ देंगे। सुनसान रात में मदद मिलने की उम्मीद से मासूम छात्रा बस में सवार हो गई। लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह बस उसके लिए एक चलता-फिरता नरक बनने वाली है।
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चलती बस में 47 किलोमीटर तक दरिंदगी का खौफनाक खेल छात्रा के बस में सवार होने के कुछ दूर बाद ही बस के अंदर का माहौल बदल गया। खाली बस पाकर कंडक्टर संदीप की नीयत खराब हो गई। उसने पहले छात्रा के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करना शुरू कर दिया। जब घबराई हुई नाबालिग ने इस गंदी हरकत का कड़ा विरोध किया, तो दोनों आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने छात्रा को डराया-धमकाया और जान से मारने की धमकी दी।
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इसके बाद चलती बस में ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने बारी-बारी से उस बेबस नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक, परी चौक से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट (Kashmiri Gate) तक बस ने करीब 47 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया। यह एक स्लीपर बस (Sleeper Bus) थी, जिसकी खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगे हुए थे। पर्दे गिरे होने के कारण बस के भीतर चल रहा यह खौफनाक खेल बाहर सड़क से गुजर रहे किसी भी राहगीर या पुलिस की गश्त टीम को दिखाई नहीं दिया।
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कश्मीरी गेट पर छोड़ा, लेकिन पीड़िता ने दिखाई गजब की हिम्मत दरिंदगी को अंजाम देने के बाद, दोनों आरोपी देर रात पीड़िता को कश्मीरी गेट बस अड्डे (ISBT) के पास रिंग रोड पर बदहवास हालत में उतारकर बस समेत वहां से फरार हो गए। इतनी बड़ी और खौफनाक घटना से गुजरने के बाद कोई भी आम इंसान टूट जाता, लेकिन इस नाबालिग छात्रा ने गजब की हिम्मत दिखाई। वह खामोश होकर नहीं बैठी, बल्कि उसने न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया। घबराई हुई और दर्द से कराहती छात्रा तुरंत कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस अधिकारियों को अपने साथ हुई पूरी दरिंदगी की आपबीती सुनाई।
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एक नाबालिग के साथ चलती बस में गैंगरेप की बात सुनते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारी तुरंत हरकत में आए। दिल्ली पुलिस ने तुरंत पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई और उसके बाद पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और सामूहिक दुष्कर्म की संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
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सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तिमारपुर से दबोचे गए आरोपी मामला दर्ज होते ही पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई टीमें गठित कर दीं। चूंकि घटना रात के अंधेरे में हुई थी और बस खाली थी, इसलिए पुलिस के पास सुराग बेहद कम थे। लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी और कई स्तरों पर जांच शुरू की। परी चौक से लेकर कश्मीरी गेट तक के रूट पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को खंगाला गया। इंटेलिजेंस और सर्विलांस टीमों की मदद ली गई।
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घंटों की कड़ी मशक्कत और सीसीटीवी कैमरों की कड़ियों को जोड़ने के बाद पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा। पुलिस को पता चला कि वारदात को अंजाम देने के बाद वह स्लीपर बस दिल्ली के तिमारपुर इलाके में स्थित एक बस पार्किंग में खड़ी की गई है। पुलिस की एक विशेष टीम ने तुरंत तिमारपुर पार्किंग पर छापा मारा और वहां से घटना में शामिल ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को धर दबोचा। पुलिस ने उस स्लीपर बस को भी अपने कब्जे में ले लिया है जिसमें यह जघन्य अपराध हुआ था।
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वर्तमान में पुलिस दोनों दरिंदों से सख्ती से पूछताछ कर रही है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने बस की गहनता से तलाशी ली है और वहां से उंगलियों के निशान, बालों के सैंपल और अन्य कई अहम वैज्ञानिक साक्ष्य (Forensic Evidence) जुटाए हैं, जो अदालत में इन आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कानून के प्रावधानों के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी गई है।
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2012 के 'निर्भया कांड' की खौफनाक यादें हुईं ताजा इस घटना ने 16 दिसंबर 2012 के उस काले दिन की यादों को एक बार फिर से ताजा कर दिया है। उस रात दिल्ली की सड़कों पर चलती एक चार्टर्ड बस में एक 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा (जिसे बाद में देश ने 'निर्भया' नाम दिया) के साथ छह दरिंदों ने बेहद क्रूर और अमानवीय तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया था और उसे बुरी तरह घायल करके सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया ने कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया था।
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निर्भया कांड ने पूरे देश को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर कन्याकुमारी तक सड़कों पर अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस घटना के बाद देश के कानूनों में बड़े बदलाव किए गए। लंबे कानूनी संघर्ष, कई अपीलों और पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद, अंततः 20 मार्च 2020 को सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में निर्भया के चार दोषियों (मुकेश, पवन, विनय और अक्षय) को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था।
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लेकिन, आज कश्मीरी गेट पर उतरी इस 11वीं की छात्रा के साथ हुए हादसे ने यह साबित कर दिया है कि फांसी की सजा और सख्त कानूनों का खौफ भी कुछ मानसिक रूप से बीमार अपराधियों को ऐसे जघन्य अपराध करने से नहीं रोक पा रहा है। आज भी जब एक लड़की रात के वक्त किसी बस में सफर करती है, तो उसकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही होती है। इस घटना ने प्रशासन, पुलिस और समाज सभी के सामने एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया है कि आखिर हमारी बेटियां अपने ही शहर की सड़कों पर सुरक्षित कब होंगी?