शकील अहमद
रिपोर्ट: शकील अहमद (बिजनौर)
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अब सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में बड़ा बवंडर खड़ा कर रहे हैं। पूर्व सांसद और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता मलूक नागर द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया है। इस बयान के विरोध की आग अब बिजनौर जिले में भी पूरी तरह फैल चुकी है।
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​बिजनौर स्थित समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर पाल और धनगर समाज के प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं की एक आपातकालीन और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मलूक नागर के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की गई। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पूर्व सांसद ने जल्द से जल्द सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो इस विरोध प्रदर्शन को जिला स्तर से उठाकर राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दे दिया जाएगा।
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​सहारनपुर जनसभा का घटनाक्रम और विवाद की मुख्य वजह

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​विवाद की शुरुआत सहारनपुर में आयोजित एक राजनीतिक जनसभा के दौरान हुई। आरोप है कि इस जनसभा में मंच पर राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद थे। इसी दौरान मंच से संबोधन करते हुए पूर्व सांसद मलूक नागर ने समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल को लेकर कुछ आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया।
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​इस घटना का वीडियो और खबर जैसे ही सोशल मीडिया और मीडिया माध्यमों के जरिए सामने आई, पाल और धनगर समाज के लोगों में नाराजगी की लहर दौड़ गई। समाज के प्रबुद्ध जनों का कहना है कि किसी सार्वजनिक मंच से किसी स्थापित राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना न केवल राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि यह एक सम्मानित समुदाय की गरिमा पर भी सीधा प्रहार है।
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​बिजनौर सपा कार्यालय में जुटे समाज के दिग्गज: तीखे तेवर
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​बिजनौर के सपा कार्यालय पर आयोजित इस बैठक में पाल और धनगर समाज के अलावा समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। बैठक की अध्यक्षता और मुख्य संचालन समाज के वरिष्ठ नेताओं द्वारा किया गया।
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​बैठक में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि श्यामलाल पाल केवल एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि वे पाल और धनगर समाज के एक सम्मानित और अग्रणी चेहरा हैं। सार्वजनिक मंच से उनके विरुद्ध इस प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाना यह दर्शाता है कि बयान देने वाले नेता में सामाजिक मर्यादा और राजनीतिक शुचिता का अभाव है।
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​बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए मलूक नागर के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया। समाज के लोगों का कहना था कि जब शीर्ष नेतृत्व के सामने इस तरह की भाषा का प्रयोग होता है और उस पर कोई रोक नहीं लगाई जाती, तो इससे समाज के युवाओं और आम नागरिकों में गलत संदेश जाता है।
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​'यह व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, पूरे समाज का अपमान': नेन सिंह पाल

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​बैठक के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नेन सिंह पाल ने मलूक नागर और उनके बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
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"सहारनपुर की जनसभा में जयंत चौधरी जी की मौजूदगी में पूर्व सांसद मलूक नागर ने हमारे प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल जी के खिलाफ जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, वह बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। मलूक नागर को यह समझ होना चाहिए कि श्यामलाल पाल जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के लाखों पाल और धनगर समाज के स्वाभिमान का प्रतीक हैं। उनके खिलाफ बोले गए अपशब्द पूरे समाज का अपमान हैं। हम इस तरह की अमर्यादित राजनीति को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
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​नेन सिंह पाल ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं और राजनीतिक विरोध भी स्वाभाविक है, लेकिन किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाना या अपमानजनक टिप्पणी करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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​पाल और धनगर समाज की प्रमुख मांगें

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​बिजनौर में आयोजित इस बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने एकसुर में शासन, प्रशासन और संबंधित नेताओं के सामने अपनी मांगें रखीं:
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    सार्वजनिक रूप से माफी: पूर्व सांसद मलूक नागर अविलंब मीडिया और सार्वजनिक मंच के माध्यम से सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल एवं पूरे पाल-धनगर समाज से बिना शर्त माफी मांगें।
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    उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच: सहारनपुर में दिए गए बयान के पूरे प्रकरण की शासन और पुलिस प्रशासन द्वारा उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
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    कानूनी कार्रवाई: सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कदम उठाए जाएं।
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    राजनीतिक मर्यादा की बहाली: राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी समाज या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस प्रकार की अशोभनीय भाषा न बोली जाए।
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​माफी न मिलने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

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​बैठक के अंत में पाल समाज के नेताओं ने कड़े लहजे में अंतिम चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अभी यह विरोध केवल बैठकों और ज्ञापनों तक सीमित है। लेकिन यदि मलूक नागर ने अपनी हठधर्मिता जारी रखी और समय रहते सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना नहीं की, तो पाल और धनगर समाज सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।
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​नेताओं ने चेतावनी दी कि बिजनौर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे प्रदेश के हर जिले और तहसील स्तर तक फैलाया जाएगा। पुतला दहन, धरना-प्रदर्शन और घेराव जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बयान देने वाले नेता और प्रशासन की होगी।
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​फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिजनौर ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में तपिश बढ़ गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद पर मलूक नागर या उनकी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।