खबरीलाल डेस्क
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में अपराधियों और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ नगर कोतवाली पुलिस और बदमाशों के बीच एक भीषण मुठभेड़ हो गई। यह मुठभेड़ कोई आम पुलिस कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह उन दरिंदों को पकड़ने के लिए थी, जिन्होंने कुछ समय पहले एक नाबालिग दलित किशोरी के साथ खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। इस मुठभेड़ में पुलिस ने 15-15 हजार रुपये के दो इनामी बदमाशों को दबोच लिया है। पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी है, जबकि उसका दूसरा साथी पुलिस की सघन कॉम्बिंग के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।
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खौफनाक वारदात की पृष्ठभूमि (18 अगस्त 2026 की घटना)

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इस मुठभेड़ की जड़ें 18 अगस्त 2026 की उस सनसनीखेज वारदात से जुड़ी हैं, जिसने पूरे मुजफ्फरनगर को झकझोर कर रख दिया था। नगर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामलीला टिल्ला इलाके में एक नाबालिग दलित किशोरी का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद दरिंदों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए सख्त से सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और आरोपियों की तलाश में पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गईं।
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पुलिस की लगातार दबिश के कारण कुछ आरोपी तो पकड़े गए, लेकिन मुख्य वांछित अपराधी फिरोज और उस्मान लगातार पुलिस को चकमा दे रहे थे। इन दोनों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए मुजफ्फरनगर पुलिस ने इन पर 15-15 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया था।
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मुठभेड़ की पूरी कहानी: ऐसे हुआ आमना-सामना

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मंगलवार की देर शाम मुजफ्फरनगर पुलिस अपने नियमित गश्त और सघन चेकिंग अभियान पर थी। मुजफ्फरनगर नगर कोतवाली क्षेत्र में पानीपत-खटीमा मार्ग पर रेलवे अंडरपास के पास पुलिस बैरिकेडिंग लगाकर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम की नजर एक मोटरसाइकिल पर पड़ी जिस पर नंबर प्लेट नहीं थी। उस पर दो संदिग्ध युवक सवार थे। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया। लेकिन, पुलिस की वर्दी और बैरिकेडिंग देखते ही बदमाशों के होश उड़ गए। रुकने के बजाय उन्होंने बाइक की रफ्तार तेज कर दी और पुलिस को चकमा देकर भागने का प्रयास किया।
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​भागने की इस हड़बड़ाहट में रेलवे अंडरपास के पास उनकी मोटरसाइकिल फिसल गई और दोनों बदमाश सड़क पर गिर पड़े। जब उन्हें लगा कि अब वे पुलिस के चारों तरफ से घिर चुके हैं और भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है, तो उन्होंने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की इस हरकत के बाद पुलिस ने भी आत्मरक्षा में संयम बरतते हुए जवाबी फायरिंग की। पुलिस द्वारा की गई इस फायरिंग में खालापार निवासी मुख्य आरोपी फिरोज के पैर में सटीक गोली लगी, जिससे वह चीखता हुआ वहीं गिर पड़ा।
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कैसे हुई उस्मान की गिरफ्तारी? जंगल में चला कॉम्बिंग ऑपरेशन

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फिरोज के पैर में गोली लगने के बाद उसका दूसरा साथी उस्मान घबरा गया। वह अंधेरे और उबड़-खाबड़ रास्तों का फायदा उठाते हुए पास के ही घने जंगल की तरफ भाग निकला। लेकिन मुजफ्फरनगर पुलिस ने भी हार नहीं मानी। मौके पर तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर पूरे जंगल को चारों तरफ से घेर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने एक महा-कॉम्बिंग अभियान (Search Operation) चलाया। घंटों की मशक्कत और चप्पे-चप्पे की तलाशी के बाद आखिरकार पुलिस ने उस्मान को भी जंगल की झाड़ियों से दबोच लिया।
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हथियारों की बरामदगी और अस्पताल में भर्ती

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गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने मुठभेड़ स्थल की तलाशी ली। पकड़े गए बदमाशों के कब्जे से पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया एक अवैध तमंचा, कई खोखा (चले हुए कारतूस), जिंदा कारतूस और एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल बरामद की है। यह मोटरसाइकिल संभवतः चोरी की हो सकती है या पहचान छिपाने के उद्देश्य से इसकी नंबर प्लेट हटाई गई थी। मुठभेड़ में घायल हुए इनामी बदमाश फिरोज को पुलिस ने तुरंत अपने कब्जे में लिया और प्राथमिक उपचार के लिए मुजफ्फरनगर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की कोई चूक न हो।
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पुलिस अधिकारियों का बयान: "अपराध कबूला, आगे की कार्रवाई जारी"

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इस पूरी घटना और कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए नई मंडी के क्षेत्राधिकारी (CO) राजू कुमार साव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी फिरोज और उस्मान रामलीला टिल्ला क्षेत्र में हुए नाबालिग दलित किशोरी से गैंगरेप मामले के बचे हुए वांछित अपराधी थे। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में ही इन दोनों अभियुक्तों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और दलित युवती के साथ गैंगरेप की खौफनाक घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।
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​सीओ राजू कुमार साव ने आगे बताया, "आरोपियों को तत्काल चिकित्सा परीक्षण और इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। इस पूरे प्रकरण में अन्य कई बिंदुओं पर भी हमारी टीमें गहनता से जांच कर रही हैं। अब तक की जांच और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में शामिल मुख्य आरोपियों समेत कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।"
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विवेचना में सामने आ रहे नए नाम, किसी को नहीं बख्शा जाएगा

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पुलिस का स्पष्ट कहना है कि मामले की फाइल अभी बंद नहीं हुई है। विवेचना (Investigation) के दौरान अगर कुछ और लोगों की भूमिका (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से) इस वारदात में सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी उतनी ही सख्ती से कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की यह त्वरित और सख्त कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
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यूपी पुलिस का कड़ा संदेश

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मुजफ्फरनगर में हुई यह पुलिस मुठभेड़ प्रदेश के अन्य अपराधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। 'ऑपरेशन लंगड़ा' (अपराधियों के पैर में गोली मारकर गिरफ्तार करने का पुलिसिया तरीका) के तहत यूपी पुलिस लगातार खूंखार अपराधियों पर नकेल कस रही है। आम जनता और विशेषकर पीड़ित परिवार ने पुलिस की इस कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से इन दरिंदों को जल्द से जल्द फांसी की सजा मुकर्रर की जाएगी, ताकि समाज में एक नजीर पेश की जा सके और भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसी घिनौनी वारदात को अंजाम देने की जुर्रत न करे।
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Disclaimer (अस्वीकरण):

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यह समाचार रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी, प्रेस ब्रीफिंग और विभिन्न न्यूज़ सोर्सेज से प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। खबर का उद्देश्य पाठकों तक सटीक जानकारी पहुँचाना है। मामले की अंतिम सुनवाई और फैसला माननीय न्यायालय के अधीन है। न्यूज़ पोर्टल किसी भी प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता है।