पुणे/मुंबई: भारतीय खेलों के परिदृश्य में अब केवल क्रिकेट का ही दबदबा नहीं है, बल्कि 'एंडरेंस' (सहनशक्ति) और अदम्य साहस वाले खेलों में भी भारतीय एथलीट अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे शहर में भारतीय ट्रायथलॉन की बढ़ती ताकत, प्रतिभा और जुनून का एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला।READ ALSO:-अमेरिकन एक्सप्रेस और NMACC का महा-गठबंधन: कला, संस्कृति और लग्जरी का नया अध्याय, कार्ड मेंबर्स के लिए खुलेंगे VIP सुविधाओं के द्वार
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पुणे के प्रतिष्ठित श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बालेवाड़ी में 14 से 16 अगस्त तक 'इंडियन ट्रायथलॉन फेडरेशन मिनी ऑरेंज नेशनल एंड एज-ग्रुप ट्रायथलॉन चैंपियनशिप' का भव्य आयोजन किया गया। इस महाकुंभ में देश के कोने-कोने से आए रिकॉर्ड 449 एथलीटों ने हिस्सा लिया। यह आंकड़ा न केवल भारतीय ट्रायथलॉन के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ (Swimming, Cycling, Running) के इस बेहद कठिन त्रिकोणीय खेल के प्रति युवाओं का क्रेज किस कदर बढ़ रहा है।
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शाश्रुति नकाड़े: पैरा-ट्रायथलॉन की नई 'गोल्डन गर्ल'
\r\n\r\nइस पूरी चैंपियनशिप का सबसे बड़ा और प्रेरणादायक आकर्षण महाराष्ट्र की प्रतिभावान एथलीट शाश्रुति विनायक नकाड़े रहीं। शारीरिक चुनौतियों को अपनी मानसिक दृढ़ता से पछाड़ते हुए शाश्रुति ने महिलाओं की PTS4_5 श्रेणी में शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम कर लिया।
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शाश्रुति की यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं है; यह उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो शारीरिक बाधाओं के बावजूद आसमान छूने का सपना देखते हैं। उनकी सफलता ने पैरा-ट्रायथलॉन में भारत की मजबूत पहचान दर्ज कराई है। खेल पंडितों और जानकारों का मानना है कि शाश्रुति जैसे एथलीटों का यह प्रदर्शन पेरिस पैरालंपिक के बाद अब आगामी लॉस एंजिल्स (LA) 2028 पैरालंपिक खेलों की दिशा में भारतीय पैरा-स्पोर्ट की उम्मीदों को एक नई और सकारात्मक ऊर्जा दे रहा है।
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चैंपियनशिप के प्रमुख आंकड़े (एक नज़र में):
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n आंकड़े / जानकारी \r\n | \r\n
|---|---|
| \r\n कुल एथलीटों की भागीदारी \r\n | \r\n \r\n 449 (रिकॉर्ड स्तर) \r\n | \r\n
| \r\n पैरा-ट्रायएथलीटों की संख्या \r\n | \r\n \r\n 81 \r\n | \r\n
| \r\n महिलाओं की हिस्सेदारी \r\n | \r\n \r\n कुल प्रतिभागियों का 24.5% \r\n | \r\n
| \r\n ग्रासरूट भागीदारी (Kids/Junior) \r\n | \r\n \r\n कुल प्रतिभागियों का लगभग 33% (एक-तिहाई) \r\n | \r\n
| \r\n आयोजन स्थल \r\n | \r\n \r\n बालेवाड़ी स्टेडियम, पुणे \r\n | \r\n
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पैरा-स्पोर्ट्स का बढ़ता दायरा: 81 पैरा-एथलीटों ने पेश की मिसाल
\r\n\r\nपुणे में आयोजित यह चैंपियनशिप मुख्य रूप से अपने 'समावेशी' (Inclusive) ढांचे के लिए जानी जाएगी। प्रतियोगिता में 81 पैरा-ट्रायएथलीटों ने हिस्सा लिया, जो एक बेहद उत्साहजनक आंकड़ा है। एक समय था जब भारत में पैरा-स्पोर्ट्स को उतनी तवज्जो नहीं मिलती थी, लेकिन आज ट्रैक से लेकर स्विमिंग पूल तक, पैरा-एथलीट मुख्यधारा के खेलों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
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इन 81 खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि ट्रायथलॉन जैसा शारीरिक रूप से थका देने वाला खेल भी उनके हौसलों के आगे छोटा है। फेडरेशन द्वारा पैरा-एथलीटों के लिए विशेष श्रेणियों (जैसे PTS4_5) का आयोजन इस खेल को देश में और अधिक पेशेवर व अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बना रहा है।
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आधी आबादी का पूरा दम: महिलाओं ने तोड़ी रूढ़ियां
\r\n\r\nकिसी भी खेल का असली विकास तब माना जाता है जब उसमें महिलाओं की भागीदारी मजबूत हो। इस चैंपियनशिप में कुल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत रही। एंडरेंस (Endurance) स्पोर्ट्स में महिलाओं का यह बढ़ता आंकड़ा उन पुरानी रूढ़ियों को तोड़ रहा है जो मानती थीं कि ऐसे कठिन खेल केवल पुरुषों के लिए हैं। शाश्रुति नकाड़े जैसी विजेता जब पोडियम पर खड़ी होती हैं, तो वे देशभर की हजारों लड़कियों को अपने फिटनेस शूज पहनने और मैदान में उतरने के लिए प्रेरित करती हैं।
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भविष्य की नींव: किड्स और जूनियर एथलीटों का जलवा
\r\n\r\nइंडियन ट्रायथलॉन फेडरेशन (ITF) की सबसे बड़ी सफलता इस खेल को ग्रासरूट (निचले) स्तर तक ले जाना है। इस चैंपियनशिप में जूनियर, सब-जूनियर और KidsTRI वर्गों में लगभग एक-तिहाई (1/3) एथलीटों की भागीदारी दर्ज की गई। बच्चों और किशोरों का इतनी बड़ी संख्या में ट्रायथलॉन से जुड़ना यह स्पष्ट करता है कि भारत भविष्य के ओलंपियन तैयार करने की दिशा में सही कदम बढ़ा रहा है। 'कैच देम यंग' (Catch them young) की तर्ज पर इन छोटे बच्चों को अभी से पेशेवर ट्रेनिंग और राष्ट्रीय स्तर का एक्सपोजर मिल रहा है।
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फेडरेशन का विजन: खेल को घर-घर तक पहुंचाना
\r\n\r\nइस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इंडियन ट्रायथलॉन फेडरेशन के डेवलपमेंट ऑफिसर हरीश प्रसाद ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, "इतनी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों की रिकॉर्ड भागीदारी भारतीय ट्रायथलॉन के विकास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सकारात्मक पड़ाव है। जूनियर वर्ग, महिलाओं, सीनियर खिलाड़ियों और विशेषकर ParaTRI (पैरा-ट्रायथलॉन) में बढ़ती भागीदारी यह स्पष्ट रूप से बताती है कि यह खेल अब देशभर में अपना एक मजबूत और स्थायी आधार तैयार कर रहा है।"
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फेडरेशन का अगला लक्ष्य इसी मोमेंटम को बनाए रखना और राज्य स्तर पर ऐसी प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाना है, ताकि किसी भी छिपी हुई प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने से पहले ही न रुकना पड़े।
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पुणे के बालेवाड़ी कॉम्प्लेक्स में आयोजित यह मिनी ऑरेंज नेशनल चैंपियनशिप सिर्फ पदकों, टाइमिंग या रेस की कहानी नहीं थी। यह उन युवा और पैरा-एथलीटों की नई उम्मीदों का मंच था, जो आने वाले वर्षों में, विशेषकर LA 2028 में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराने का सपना देख रहे हैं। शाश्रुति नकाड़े की स्वर्णिम सफलता और 449 एथलीटों का पसीना इस बात की गवाही दे रहा है कि भारत अब एक 'स्पोर्टिंग नेशन' बनने की राह पर तेजी से दौड़ पड़ा है।