हरिद्वार में शुक्रवार को सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आते ही करीब 20 साल पुराना निठारी कांड फिर चर्चा में आ गया है। नोएडा के निठारी में 2006 में सामने आए इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
कोली उस समय नोएडा के सेक्टर-31 स्थित एक मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। इसी मकान के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद उसका नाम जांच में सामने आया और वह कई हत्याओं के मामलों में आरोपी बना।

लेकिन निठारी कांड की कहानी का सबसे बड़ा मोड़ बाद में आया। जिस व्यक्ति को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा तक सुनाई गई, उसे 2023 में 12 मामलों में बरी कर दिया गया।
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में बरी किए जाने को बरकरार रखा। फिर नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›और अब, बरी होने के करीब एक साल के भीतर, हरिद्वार में उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक उसका शव भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। मौके से सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात भी सामने आई है और पुलिस मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
तो सवाल फिर वही है—निठारी कांड आखिर था क्या? सुरेंद्र कोली का नाम इसमें कैसे आया? उसे मौत की सजा क्यों मिली? और फिर अदालतों ने उसे बरी क्यों कर दिया?
2006 में आखिर हुआ क्या था?
निठारी कांड की कहानी नोएडा के सेक्टर-31 के D-5 मकान से जुड़ी है। यह मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, 2005 से ही निठारी इलाके में महिलाओं और बच्चों के लापता होने की शिकायतें सामने आने लगी थीं।
मार्च 2005 में बच्चों को D-5 और आसपास की जगह के बीच मानव हाथ दिखाई देने की बात भी रिकॉर्ड में दर्ज है। फिर 3 दिसंबर 2006 को नाले की सफाई के दौरान सड़क के सामने मानव हाथ दिखाई दिया। इसके बाद मामला तेजी से खुलने लगा।

29 दिसंबर 2006 को पुलिस ने एक लड़की के लापता होने से जुड़े मामले में सुरेंद्र कोली को हिरासत में लिया। उसी दिन मोनिंदर सिंह पंढेर को भी D-5 के बाहर से हिरासत में लिया गया। पुलिस और गवाह जब D-5 के पास पहुंचे तो वहां पहले से बड़ी भीड़ जमा थी और आसपास खुदाई चल रही थी।
खुदाई और जांच के दौरान मानव अवशेष मिलने की खबर सामने आई। इसके बाद निठारी सिर्फ नोएडा की एक स्थानीय घटना नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
कितने लोगों के लापता होने की बात सामने आई?
निठारी मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई गुमशुदगी के मामले आपस में जोड़े गए। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ 19 FIR दर्ज की थीं। इनमें 19 लड़कियों से जुड़े कथित अपराधों की जांच शामिल थी। बाद में CBI ने कई मामलों में जांच आगे बढ़ाई और अलग-अलग मुकदमे चलाए।
मामले की भयावहता इसलिए भी ज्यादा चर्चा में रही क्योंकि लापता होने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा महिलाएं थीं।
जांच के दौरान हत्या, अपहरण और यौन अपराध जैसे गंभीर आरोप सामने आए। निठारी से जुड़ी रिपोर्टिंग में मानव अवशेष मिलने की घटनाओं ने मामले को देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया।
सुरेंद्र कोली पर क्या आरोप थे?
सुरेंद्र कोली पर आरोप था कि वह लापता होने वाले लोगों को D-5 मकान तक लाता था और उनके खिलाफ गंभीर अपराध करता था। अभियोजन की कहानी में उसके कथित इकबालिया बयान और उसकी निशानदेही पर हुई बरामदगी महत्वपूर्ण सबूत थे।

शुरुआती दौर में इन सबूतों को अदालतों ने गंभीरता से लिया। एक मामले में ट्रायल कोर्ट ने कोली को हत्या, बलात्कार और अन्य अपराधों का दोषी माना। उसे मौत की सजा सुनाई गई। बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा।
मौत की सजा तक कैसे पहुंचा मामला?
निठारी से जुड़े एक मामले में 2009 में कोली को दोषी ठहराकर मौत की सजा दी गई थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखी।
उस समय अदालत ने अभियोजन के इकबालिया बयान, बरामदगी और DNA से जुड़े सबूतों पर भरोसा किया था। यानी उस समय न्यायिक स्थिति यह थी कि कोली दोषी था और उसकी मौत की सजा कायम थी। लेकिन बाद में कहानी बदलती गई।
फिर मौत की सजा उम्रकैद में कैसे बदली?
2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दया याचिका पर फैसला होने में हुई देरी को देखते हुए उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि उस समय कोली को अपराध से बरी नहीं किया गया था। सिर्फ मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया था। उसकी दोषसिद्धि तब भी कायम थी। इसके बाद भी निठारी से जुड़े बाकी मामलों में उसके खिलाफ मुकदमे चलते रहे।
असली कानूनी मोड़ 2023 में आया
निठारी कांड की कहानी का सबसे बड़ा बदलाव अक्टूबर 2023 में आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को निठारी से जुड़े 12 मामलों में बरी कर दिया।
अदालत के सामने अभियोजन के सबूतों की विश्वसनीयता का सवाल था। कथित इकबालिया बयान और बरामदगी को लेकर कई कानूनी सवाल उठे।

यानी जिस व्यक्ति को पहले कई मामलों में दोषी माना गया था, उन्हीं मामलों में बाद की न्यायिक जांच में अभियोजन के सबूत पर्याप्त नहीं पाए गए। यहीं से यह सवाल भी उठा कि क्या शुरुआती जांच में गंभीर चूक हुई थी?
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में क्या कहा?
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में कोली की बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा। लेकिन एक मामला अभी भी बचा हुआ था। यह वही मामला था जिसमें उसकी दोषसिद्धि पहले सुप्रीम कोर्ट तक जाकर बरकरार रह चुकी थी।
यानी स्थिति बेहद अलग थी—12 मामलों में बरी, लेकिन एक मामले में पुरानी दोषसिद्धि अभी कायम। फिर कोली ने सुप्रीम कोर्ट में curative petition दाखिल की।
नवंबर 2025 में आखिरी मामला भी खत्म हो गया
11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कोली की curative petition स्वीकार कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी पुरानी दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया और उसे उन आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर वह किसी दूसरे मामले में जरूरी नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि जिस मामले में उसकी दोषसिद्धि पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही कायम रखी थी, उसी को बाद में curative jurisdiction में पलट दिया गया।
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण बात कही कि गंभीर संदेह अपने आप में दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। अभियोजन को अपराध संदेह से परे साबित करना होता है।
आखिर अदालत ने सबूतों पर सवाल क्यों उठाए?
यह निठारी कांड की सबसे अहम कानूनी परत है। 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जांच की कई कमियों पर चर्चा हुई। अदालत ने यह देखा कि अभियोजन के कुछ प्रमुख सबूतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए थे।
सबसे अहम मुद्दों में कथित इकबालिया बयान और बरामदगी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह भी दर्ज है कि जांच में घर और आसपास मौजूद कुछ महत्वपूर्ण गवाहों और संभावित सुरागों की पर्याप्त जांच नहीं हुई।
फैसले में जांच की कमियों और एक सरकारी समिति द्वारा उठाए गए organ-trade angle जैसे material lead को पर्याप्त रूप से आगे न बढ़ाने का भी उल्लेख है।
यानी अदालत के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं था कि “अपराध हुआ या नहीं?” सवाल यह था कि “क्या सुरेंद्र कोली के खिलाफ पेश किए गए सबूत इतने भरोसेमंद हैं कि उसके खिलाफ दोषसिद्धि कायम रखी जा सके?” अंतिम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसका जवाब नहीं में दिया।
क्या बरी होने का मतलब यह है कि निठारी में कोई अपराध हुआ ही नहीं?
यह सबसे जरूरी बात है जिसका जवाब है नहीं।
सुरेंद्र कोली को बरी करने का फैसला यह नहीं कहता कि निठारी में मानव अवशेष नहीं मिले थे या लोग लापता नहीं हुए थे। निठारी में मानव अवशेष मिलने और कई लोगों के लापता होने का रिकॉर्ड अदालतों के सामने था।
बरी होने का सवाल अलग था—क्या उपलब्ध कानूनी सबूतों के आधार पर सुरेंद्र कोली को उन अपराधों का दोषी साबित किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में आखिरी मामले में उसकी दोषसिद्धि इसलिए रद्द की क्योंकि अभियोजन की evidentiary foundation दोषसिद्धि कायम रखने के लिए पर्याप्त नहीं थी। यानी घटना और आरोपी की कानूनी दोषसिद्धि—दो अलग सवाल हैं।
फिर 2026 में सुरेंद्र कोली की मौत कैसे हुई?
अब वापस आज की खबर पर लौटते हैं। 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में सुरेंद्र कोली मृत मिला। पुलिस के मुताबिक उसका शव भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला।
वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चला रहा था। मौके से सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात पुलिस ने कही है। मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
यानी जिस सुरेंद्र कोली का नाम कभी देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आया था, उसकी आखिरी सार्वजनिक कहानी एक चाय की दुकान से जुड़ी मिली।
लेकिन उसकी मौत की परिस्थितियों पर अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस और फोरेंसिक जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
निठारी कांड की कहानी में सबसे बड़ा सवाल क्या बचा?
करीब दो दशक बाद निठारी कांड की कहानी का एक बड़ा हिस्सा अदालतों में खत्म हो चुका है, लेकिन इस मामले से जुड़े कई सवाल आज भी चर्चा में हैं।
2005-06 में लोग लापता होते रहे। दिसंबर 2006 में मानव अवशेष मिले। जांच हुई। कई मामले दर्ज हुए। सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया गया। उसे मौत की सजा मिली। बाद में सजा उम्रकैद में बदली। फिर 12 मामलों में बरी हुआ और अंत में नवंबर 2025 में आखिरी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
यानी निठारी कांड की कहानी सिर्फ अपराध की कहानी नहीं रही। यह जांच, सबूत, फोरेंसिक प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था की भी कहानी बन गई। और आज, हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत ने इस पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
निठारी कांड: पूरी कहानी एक नजर में
- 2005-06: निठारी क्षेत्र से बच्चों और महिलाओं के लापता होने की शिकायतें सामने आईं।
- दिसंबर 2006: D-5 मकान के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद मामला सामने आया।
- 29 दिसंबर 2006: सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर हिरासत में लिए गए।
- 2009: कोली को एक मामले में मौत की सजा मिली।
- 2011: सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखी।
- 2015: मौत की सजा उम्रकैद में बदली।
- 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी किया।
- जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में बरी होने को बरकरार रखा।
- 11 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर कोली को बरी किया।
- 18 सितंबर 2026: हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।