उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में संभावित प्राकृतिक और औद्योगिक आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। इसी कड़ी में आगामी 18 सितंबर को जनपद की सभी पांच तहसीलों में भूकंप, औद्योगिक रासायनिक रिसाव और अग्नि सुरक्षा से संबंधित एक विशाल मॉक ड्रिल (पूर्वाभ्यास) का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने के लिए गुरुवार को जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में एक अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने सभी संबंधित विभागों को बेहतर आपसी समन्वय स्थापित करने और पूरी मुस्तैदी के साथ मॉक ड्रिल को अंजाम देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
पांचों तहसीलों में तय किए गए मुख्य केंद्र जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मॉक ड्रिल 18 सितंबर की सुबह 10:00 बजे से जिले की पांचों तहसीलों में एक साथ शुरू की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग संवेदनशील स्थान और संस्थान चिन्हित किए गए हैं। बिजनौर सदर तहसील में यह अभ्यास नूरपुर रोड स्थित विवेक कॉलेज में किया जाएगा। वहीं, धामपुर तहसील में 100 शय्या (बेड) वाले संयुक्त चिकित्सालय को इस ड्रिल का मुख्य केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा चांदपुर तहसील क्षेत्र में गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नगीना तहसील में एम.एम. इंटर कॉलेज और नजीबाबाद तहसील में आदर्श नगर स्थित इंडियन ऑयल डिपो में यह विशेष सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया जाएगा।
आपदा से निपटने में परखी जाएगी विभागों की मुस्तैदी इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी बड़ी आपदा के समय प्रशासन और विभिन्न बचाव एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया (Response Time) और उनकी कार्यक्षमता को बारीकी से परखना है। बैठक के दौरान बताया गया कि इस बड़े स्तर के पूर्वाभ्यास में स्वास्थ्य विभाग, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), होमगार्ड, एनसीसी (NCC) कैडेट्स, जिला अग्निशमन विभाग (Fire Brigade), रेड क्रॉस सोसाइटी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, अस्पताल प्रबंधन, आपदा विशेषज्ञ, सूचना विभाग, पुलिस विभाग और नागरिक सुरक्षा संगठन सहित कई अन्य विभाग व संस्थाएं सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगी।

डीएम के सख्त निर्देश: गंभीरता से लिया जाए पूर्वाभ्यास जिलाधिकारी जसजीत कौर ने समीक्षा बैठक में कड़े शब्दों में कहा कि इस मॉक ड्रिल को केवल एक विभागीय औपचारिकता न मानकर पूरी गंभीरता से लिया जाए। किसी भी आपदा के समय लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, इसलिए सभी विभागों का परस्पर समन्वय सटीक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने संसाधनों और बचाव उपकरणों की जांच पहले ही कर लें, ताकि आपात स्थिति के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी या मानवीय चूक का सामना न करना पड़े। इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के साथ-साथ अन्य सभी संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी और कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।