मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग इलाके में इस साल गणेशोत्सव के दौरान केवल आस्था और भक्ति का ही सैलाब नहीं उमड़ रहा है, बल्कि यहां से मानवता और जीवनदान का एक बहुत बड़ा संदेश भी दिया जा रहा है। मुंबई के लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल और ग्लेनेईगल्स अस्पताल (Gleneagles Hospital) के संयुक्त तत्वावधान में एक अनूठी पहल की गई है। यहां 'ऑर्गन्स ऑफ होप' (Organ of Hope) नाम से एक विशाल फाइबरग्लास की मूर्ति स्थापित की गई है, जिसने अपने आकार और उद्देश्य के चलते 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

15.59 मीटर ऊंची फाइबरग्लास मूर्ति का रिकॉर्ड लालबाग में स्थापित यह 'ऑर्गन ऑफ होप' मानव शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों को दर्शाती है। इस फाइबरग्लास मूर्ति की कुल ऊंचाई 15.59 मीटर (लगभग 51 फीट) है। इसे 'अंगों की सबसे बड़ी फाइबरग्लास मूर्ति' के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई है। इस विशालकाय संरचना में हृदय, लिवर, किडनी और फेफड़े जैसे प्रमुख अंगों को बेहद कलात्मक ढंग से उकेरा गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आम जनता को यह समझाना है कि मृत्यु के बाद भी एक इंसान कई लोगों को नया जीवन दे सकता है।

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अंगदान के प्रति भ्रांतियां दूर करने की मुहिम गणेशोत्सव के दौरान लालबाग में देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। इस विशाल जनसमूह को जागरूक करने के लिए यह मंच चुना गया है। अभियान से जुड़े सैकड़ों स्वयंसेवक पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। वे अंगदान (Organ Donation) से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी दे रहे हैं और समाज में फैली भ्रांतियों व गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वयंसेवक लोगों को प्रेरित कर रहे हैं कि वे घर जाकर अपने परिवार के साथ इस गंभीर और पुनीत विषय पर चर्चा करें।

अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकला संदेश ग्लेनेईगल्स अस्पताल के सीईओ डॉ. बिपिन चेवाले ने इस उपलब्धि पर कहा कि इस अभियान का मुख्य मकसद अंगदान जैसे महत्वपूर्ण विषय को अस्पताल के कमरों से निकालकर सीधे समाज के बीच ले जाना है। वहीं, लालबागचा राजा मंडल के सुधीर सालवी ने इस मुहिम की सराहना करते हुए इसे जरूरतमंदों को 'जीवन का उपहार' देने वाली एक महान पहल बताया। उनके अनुसार, 'ऑर्गन ऑफ होप' सिर्फ एक फाइबर की संरचना नहीं है, बल्कि यह उन हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अंगों के इंतजार में अस्पतालों में भर्ती हैं।

छात्रों और संस्थाओं का मिल रहा भारी समर्थन इस महाभियान को सफल बनाने में कई गैर-सरकारी संगठनों और शिक्षण संस्थानों ने हाथ मिलाया है। इनमें झेडटीसीसी (ZTCC), मोहन फाउंडेशन, नर्मदा किडनी फाउंडेशन, वर्मा ट्रस्ट, डोनेट लाइफ लुनावा हेल्पिंग हैंड्स और आईएससीसीएम (ISCCM) मुंबई सिटी ब्रांच जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय, एसएनडीटी माटुंगा, कीर्ति कॉलेज और खालसा कॉलेज के शिक्षक और विद्यार्थी भी इस मुहिम में वॉलंटियर के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं।

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