उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को फर्जी और संगीन मुकदमों में फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। कोतवाली शहर पुलिस ने इस वसूली गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले में प्रकाश में आए दो नए अभियुक्तों, मोहम्मद आसिफ और दिलशाद, को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जांच में यह साफ हुआ है कि यह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाता था और समाज में डर का माहौल पैदा कर रहा था।

कैसे काम करता था यह वसूली गिरोह? पुलिस की विवेचना और अब तक संकलित साक्ष्यों के अनुसार, इस पूरे संगठित गिरोह का संचालन जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा करता था। यह गैंग सबसे पहले लोगों के आपसी विवादों, पुरानी रंजिशों और जमीन से जुड़े मामलों की गुप्त रूप से जानकारी जुटाता था। इसके बाद, एक पक्ष को मोहरा बनाकर दूसरे पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए जाते थे।

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गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। आरोप है कि मुकदमों में 'समझौते' के नाम पर टारगेट किए गए व्यक्ति से भारी धनराशि या अन्य अनुचित लाभ की मांग की जाती थी। जब कोई व्यक्ति इनकी अवैध मांग पूरी करने से इनकार कर देता था, तो उस पर दबाव बनाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल कर दुष्कर्म, गैंगरेप, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और एससी-एसटी (SC/ST) एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिए जाते थे। इसके अलावा, न्यायालय में सीधे परिवाद भी दाखिल कराए जाते थे ताकि पीड़ित हर तरफ से कानूनी दांवपेच में फंस जाए।

6 सितंबर को दर्ज हुआ था पहला मुकदमा, 5 जा चुके हैं जेल पुलिस के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 6 सितंबर 2026 को मोहम्मद अहसान नामक व्यक्ति ने कोतवाली शहर में एक लिखित तहरीर दी। अहसान ने आरोप लगाया था कि यह गिरोह कई लोगों को झूठे मुकदमों में फंसा रहा है और मुकदमे वापस लेने के एवज में रुपयों की उगाही कर रहा है।

इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए थाना कोतवाली शहर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) और 308(5) के तहत मुकदमा (अपराध संख्या 706/2026) दर्ज किया। मामले की जांच शुरू होते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सबसे पहले गिरोह के मास्टरमाइंड जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा, अफजाल, गुड्डी, कुंती और प्रीति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस गिरोह में महिलाओं की सक्रिय भूमिका ने पुलिस को भी चौंका दिया था।

पूछताछ में हुए अहम खुलासे और आगे की कार्रवाई अब विवेचना के दौरान इस गिरोह के दो अन्य सक्रिय सदस्यों, मोहम्मद आसिफ और दिलशाद, के नाम सामने आने पर पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस हिरासत में हुई पूछताछ के दौरान अभियुक्त दिलशाद ने जमीन विवाद और फर्जी मुकदमों के जरिए लोगों पर दबाव बनाने से जुड़े कई अहम राज खोले हैं। वहीं, दूसरे अभियुक्त मोहम्मद आसिफ ने भी पूछताछ में मुख्य सरगना बब्बू लंगड़ा, नौशाद और अफजाल से अपने गहरे संपर्क होने की बात कबूल की है और कुछ मुकदमों में अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की है।

पुलिस अधीक्षक (यातायात) बिजनौर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस संगठित गिरोह के खिलाफ विवेचना अभी भी जारी है। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन लोगों ने अब तक कितने निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जांच के दौरान गिरोह से जुड़े जो भी अन्य व्यक्ति या मददगार प्रकाश में आएंगे, उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।