भजन सम्राट अनूप जलोटा ने मुंबई में आधुनिक तकनीक से लैस 'भक्तिद्वार टेलीविजन ऐप' लॉन्च किया है। मात्र ₹11 प्रति सप्ताह के सब्सक्रिप्शन वाले इस प्लेटफॉर्म पर धार्मिक सीरीज, भजन, प्रवचन और एआई आधारित आध्यात्मिक कंटेंट उपलब्ध होगा, जो तनावग्रस्त जीवन में शांति प्रदान करेगा।
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आज के डिजिटल युग में जहां हर तरफ मनोरंजन के अनगिनत साधन मौजूद हैं, वहीं मानसिक शांति और आध्यात्मिकता की तलाश भी तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मुंबई में एक बेहद खास ओटीटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत हुई है। आधुनिक तकनीक और सनातन संस्कृति के अनूठे संगम से तैयार 'भक्तिद्वार टेलीविजन ऐप' (Bhaktidwaar App) का मुंबई में भव्य शुभारंभ किया गया। इस ऐप की लॉन्चिंग और इसके लोगो (Logo) का अनावरण देश के जाने-माने भजन गायक और पद्मश्री से सम्मानित अनूप जलोटा के हाथों किया गया। इस मौके पर अनूप जलोटा ने इस प्लेटफॉर्म को केवल एक डिजिटल ऐप नहीं, बल्कि जीवन में आध्यात्म और मानसिक शांति से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बताया।

भक्तिद्वार के सारथी बने अनूप जलोटा
'भक्तिद्वार' की लॉन्चिंग के अवसर पर अनूप जलोटा ने ऐप की जमकर तारीफ की और इसके उद्देश्य को लोगों के सामने रखा। उन्होंने कहा, "मैं स्वयं भक्तिद्वार में प्रवेश कर चुका हूं। यह केवल एक ऐप नहीं है, बल्कि यह भक्ति, आनंद और सच्ची शांति का एक खुला द्वार है।" अपने भजनों से दशकों तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले अनूप जलोटा ने आज के समय की सबसे बड़ी समस्या 'तनाव' पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज का इंसान भारी तनाव, चिंता और मानसिक दबाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे मुश्किल समय में भगवान का स्मरण, मंत्र और भजन ही मनुष्य के मन को सच्ची और स्थायी शांति दे सकते हैं।
युवा पीढ़ी और आध्यात्मिकता का नया कनेक्शन
अक्सर यह माना जाता है कि धार्मिक कंटेंट केवल बुजुर्गों के लिए होता है, लेकिन अनूप जलोटा ने इस धारणा को तोड़ते हुए एक अहम बात कही। उन्होंने बताया, "आज की युवा पीढ़ी भी भक्ति संगीत और आध्यात्मिक कंटेंट को खूब पसंद कर रही है। युवा भी अपने करियर और भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर सुकून तलाश रहे हैं। जब व्यक्ति तनाव में होता है, तब भक्ति ही उसे सबसे ज्यादा सुकून देती है। भक्तिद्वार इसी सकारात्मक सोच और ऊर्जा को आगे बढ़ाने वाली एक शानदार पहल है।" मोबाइल और इंटरनेट के दौर में यह ऐप युवाओं को उनकी जड़ों और सनातन संस्कृति से जोड़े रखने का काम करेगा।
क्या है 'भक्तिद्वार' ऐप की खासियत और सब्सक्रिप्शन?
इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म को आम जनता की पहुंच में रखने के लिए इसका सब्सक्रिप्शन मॉडल बेहद सस्ता और आकर्षक रखा गया है। 'भक्तिद्वार' ऐप का आनंद उठाने के लिए यूजर्स को केवल ₹11 प्रति सप्ताह का मामूली शुल्क देना होगा। इतने कम खर्च में दर्शकों को उच्च गुणवत्ता वाला धार्मिक कंटेंट देखने को मिलेगा। इस प्लेटफॉर्म पर धार्मिक सीरीज, सदाबहार भजन, मंत्र, हनुमान चालीसा और अन्य चालीसा, जाने-माने संतों के प्रवचन और देश भर में होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजनों का लाइव प्रसारण (Live Streaming) उपलब्ध होगा।
इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी पहलू है। 'भक्तिद्वार' पर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित वीडियो और अत्याधुनिक एनिमेशन वाले आध्यात्मिक कार्यक्रम भी पेश किए जाएंगे। यह आधुनिक तकनीक का उपयोग करके धार्मिक कथाओं को एक नए और आकर्षक अंदाज में दर्शकों के सामने लाएगा, जिससे बच्चों और युवाओं की भी इसमें रुचि बढ़ेगी।
संस्थापक का विजन: 10 साल की कड़ी मेहनत का परिणाम
'भक्तिद्वार' रातों-रात तैयार किया गया कोई साधारण ऐप नहीं है। इस प्लेटफॉर्म को आकार देने के पीछे इसके संस्थापक दिनेश असोपा की करीब एक दशक (10 साल) की कड़ी मेहनत और गहन रिसर्च छिपी है। लॉन्चिंग के मौके पर दिनेश असोपा ने अपने विजन को साझा करते हुए कहा, "मेरा उद्देश्य सिर्फ बाजार में एक और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म उतारना नहीं था। मैं एक ऐसा विशुद्ध मंच तैयार करना चाहता था, जहां दर्शकों को बिना किसी भटकाव के भक्ति, आध्यात्म और सनातन संस्कृति से जुड़ी हर सामग्री एक ही जगह मिल सके।"
आध्यात्मिक ओटीटी की बढ़ती मांग
भारत में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक और आध्यात्मिक कंटेंट की मांग में भारी उछाल आया है। पारंपरिक टीवी चैनलों से आगे बढ़कर अब दर्शक अपनी सुविधानुसार स्मार्टफोन पर धार्मिक कंटेंट देखना चाहते हैं। 'भक्तिद्वार' इसी मांग को पूरा करने के लिए एक वन-स्टॉप डेस्टिनेशन (One-Stop Destination) के रूप में सामने आया है। ऐसे समय में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हिंसक और विवादित कंटेंट की भरमार है, 'भक्तिद्वार' जैसे ऐप परिवारों को एक साथ बैठकर सुरक्षित और सकारात्मक कंटेंट देखने का अवसर प्रदान करते हैं। अनूप जलोटा का समर्थन इस ऐप की विश्वसनीयता को और भी बढ़ा देता है।