देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। आने वाले समय में आपको टोल टैक्स चुकाने के लिए टोल प्लाजा पर अपनी गाड़ी रोकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह घोषणा की है कि फरवरी 2027 तक भारत पूरी तरह से डिजिटल और बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था की ओर बढ़ जाएगा। नई तकनीक लागू होने से यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में हुई घोषणा मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार अब एक अत्याधुनिक और पूरी तरह से तकनीक-आधारित टोलिंग सिस्टम की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके तहत मौजूदा फास्टैग (FASTag) तकनीक को 'ऑटोमैटिक नंबर-प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) तकनीक के साथ जोड़ा जाएगा। गडकरी ने भरोसा जताया कि नंबर प्लेट स्कैनिंग और फास्टैग के इस संयुक्त उपयोग से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि देश के टोल राजस्व में भी सालाना 10,000 करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
फास्टैग से आई पारदर्शिता, खत्म हुआ नकद लेनदेन अपने संबोधन के दौरान नितिन गडकरी ने टोल संग्रह के आधुनिकीकरण में अब तक मिली सफलताओं का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि साल 2016 में जब पहली बार फास्टैग को लॉन्च किया गया था, तब इसका मुख्य उद्देश्य टोल भुगतानों को आधुनिक बनाना और यात्रियों के सफर को आरामदायक करना था। साल 2021 में सभी वाहनों के लिए फास्टैग अनिवार्य किए जाने के बाद से राष्ट्रीय राजमार्गों पर नकद लेनदेन लगभग खत्म हो गया है और राजस्व वसूली में पहले से कहीं अधिक पारदर्शिता आई है।
वेटिंग टाइम होगा शून्य, सामान्य गति से दौड़ेंगी गाड़ियां गडकरी ने पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा, "पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को 12 मिनट से लेकर 30 मिनट तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था। लेकिन फास्टैग के आने के बाद से इस वेटिंग टाइम में 80 से 90 प्रतिशत तक की कमी आई है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सरकार इस बचे हुए इंतजार के समय को भी पूरी तरह खत्म करने जा रही है, ताकि गाड़ियां बिना रुके अपनी सामान्य गति से बेधड़क हाईवे पर आगे बढ़ सकें।
वाहनों की पहचान और निगरानी होगी सटीक यह प्रस्तावित नई प्रणाली फास्टैग डेटा और वाहनों की नंबर प्लेट दोनों का एक साथ उपयोग करेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की पहचान करना और उनकी सटीक निगरानी करना बेहद आसान हो जाएगा। वर्तमान में फास्टैग रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर काम करता है, जो लिंक किए गए बैंक खाते से ऑटोमैटिक टोल काट लेता है। गडकरी के इस बड़े बयान से साफ है कि डिजिटल तकनीक आने वाले समय में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन व्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह से बदलने जा रही है।