उत्तर प्रदेश के मेरठ में बहुचर्चित गांधी बाग राजस्व ठेका रिश्वत कांड में फंसे कैंट बोर्ड के पूर्व मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। तीन लाख रुपये की कथित घूस लेने के आरोप में करीब साढ़े तीन महीने से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद डा. शर्मा को जमानत दे दी गई है। सोमवार को हाईकोर्ट के पोर्टल पर जमानत का आदेश अपलोड होने और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, देर शाम उन्हें डासना जेल से रिहा कर दिया गया।

शुक्रवार को हुई सुनवाई, सोमवार को आया आदेश सीबीआई (CBI) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से ही डा. सतीश शर्मा जेल में थे। बचाव पक्ष के वकीलों ने सबसे पहले सीबीआई कोर्ट में उनकी जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए 5 अगस्त को उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। सीबीआई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हाईकोर्ट में उनकी जमानत अर्जी पर विस्तृत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को जैसे ही हाईकोर्ट के पोर्टल पर जमानत आदेश अपलोड हुआ, उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

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क्या था पूरा मामला और कैसे हुई थी गिरफ्तारी? यह पूरा मामला मेरठ कैंट स्थित गांधी बाग के राजस्व ठेके से जुड़ा हुआ है। ठेकेदार विक्की कश्यप ने भ्रष्टाचार की शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि ठेके के एवज में उनसे रिश्वत की मांग की जा रही है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई की गाजियाबाद ब्रांच ने एक गुप्त योजना (जाल) बनाई।

30 मई की शाम को सीबीआई टीम ने डा. सतीश शर्मा के अंसल टाउन स्थित आवास पर अचानक छापेमारी की। इस दौरान टीम ने उन्हें ठेकेदार से 3 लाख रुपये की नकद रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने उन्हें अपनी विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में गाजियाबाद की डासना जेल भेज दिया गया था।

रिश्वत कांड के बाद गंवानी पड़ी थी कैंट बोर्ड की सदस्यता सीबीआई के इस बड़े एक्शन का असर डा. सतीश शर्मा के राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख पर भी पड़ा। 30 मई को जैसे ही उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) मेरठ को मिली, बोर्ड प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। इस गंभीर मामले से कैंट बोर्ड के अध्यक्ष और स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह को अवगत कराया गया।

भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने के बाद, कैंट बोर्ड की ओर से कैंट एक्ट की धारा 34 (Section 34 of Cantt Act) के तहत कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई। रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को भेजी गई, जिसके बाद मंत्रालय ने सख्त कदम उठाते हुए डा. सतीश शर्मा की कैंट बोर्ड की मनोनीत सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त (रद्द) कर दी थी। फिलहाल जमानत मिलने के बाद उनकी कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी।