उत्तर प्रदेश में यातायात नियमों का उल्लंघन करने या शराब पीकर वाहन चलाने पर सस्पेंड हुए ड्राइविंग लाइसेंस (DL) को दोबारा सक्रिय (Reactivate) कराने के नियम में बड़ा बदलाव किया गया है। परिवहन विभाग के नए आदेश के अनुसार, अब निलंबन (Suspension) की समय सीमा पूरी होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस स्वतः सक्रिय नहीं होगा। चालकों को राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में जाकर अनिवार्य रूप से 'रिफ्रेशर कोर्स' (Refresher Course) का प्रशिक्षण लेना होगा। इसके बाद प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर ही सारथी पोर्टल पर डीएल दोबारा चालू किया जाएगा।

सारथी पोर्टल पर स्वतः नहीं होगा एक्टिवेट

राजधानी लखनऊ में ही ऐसे 1,000 से अधिक वाहन चालक हैं, जिनका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हो चुका है। उदाहरण के तौर पर, लखनऊ के घसियारी मंडी निवासी प्रिंस सोनकर और विकास नगर के सौरभ विश्वकर्मा को शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में पकड़ा गया था, जिसके बाद उनका ड्राइविंग लाइसेंस एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। अब निलंबन की एक माह की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन सारथी पोर्टल पर उनका डीएल एक्टिवेट नहीं हो रहा है।

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​परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक निलंबित चालक मान्यता प्राप्त सेंटर से प्रशिक्षण पूरा कर उसका सर्टिफिकेट जमा नहीं करेंगे, तब तक उनका ड्राइविंग लाइसेंस वैध नहीं माना जाएगा। यदि निलंबन अवधि बीतने के बाद भी कोई चालक बिना रिफ्रेशर कोर्स किए सड़क पर वाहन चलाता पकड़ा जाता है, तो उस पर 'बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने' की सख्त कानूनी धाराओं के तहत चालान व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ट्रेनिंग सेंटर में संचालित होंगे 7 विभिन्न कोर्स

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की इस नई व्यवस्था को लखनऊ समेत उन सभी जनपदों में लागू कर दिया गया है, जहां मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (DTC) स्थापित हो चुके हैं। राजधानी लखनऊ में उदेत खेड़ा मौंदा स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में इस प्रशिक्षण की शुरुआत कर दी गई है। जिन जिलों में अभी ट्रेनिंग सेंटर उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी जल्द ही यह व्यवस्था शुरू की जाएगी।

​परिवहन विभाग के अनुसार, ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों में कुल 7 प्रकार के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं, जो 2 दिन से लेकर डेढ़ महीने (6 सप्ताह) तक की अवधि के हैं:

  • रिफ्रेशर कोर्स: 2 दिन में 10 घंटे का प्रशिक्षण (शुल्क: ₹1,000)

  • लाइट मोटर व्हीकल (LMV): 4 सप्ताह में 29 घंटे का प्रशिक्षण (शुल्क: ₹6,000)

  • मीडियम व हैवी मोटर व्हीकल (HMV): 4 सप्ताह में 38 घंटे का प्रशिक्षण (शुल्क: ₹10,000)

  • व्हीकल मेंटेनेंस कोर्स: 2 दिन में 12 घंटे (शुल्क: ₹1,000)

  • ट्रैफिक एजुकेशन कोर्स: 1 दिन में 6 घंटे (शुल्क: ₹5,000)

  • फायर हजार्ड्स ट्रेनिंग: 1 दिन में 4 घंटे (शुल्क: ₹5,000)

  • ट्रेनिंग एंड ट्रेनर्स कोर्स: डेढ़ माह में 30 घंटे (शुल्क: ₹10,000)

सड़क सुरक्षा में सुधार और हादसों पर लगाम का लक्ष्य

रिफ्रेशर कोर्स का मुख्य उद्देश्य चालकों में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रशिक्षण के दौरान वाहन चालकों को ऑटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक (Automated Testing Track) पर सुरक्षित ड्राइविंग, ट्रैफिक संकेतों के नियम तथा वाहन रखरखाव की बारीकियां सिखाई जाती हैं। इससे चालकों की ड्राइविंग क्षमता में सुधार होगा और वे आसानी से ड्राइविंग टेस्ट भी पास कर सकेंगे।

​केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की योजना के अनुसार, भविष्य में सभी प्रकार के चालकों के लिए 1,000 रुपये वाले दो दिवसीय (10 घंटे) रिफ्रेशर कोर्स को व्यापक स्तर पर अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, सरकारी वाहनों को चलाने वाले चालकों के लिए भी हर 5 साल में इस प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश में इस नियम के कड़ाई से पालन से सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।