अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रही हलचल के बीच केंद्र सरकार ने देश की तेल निर्यातक कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात (Export) पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में भारी कटौती करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। यह फैसला वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस फैसले के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी? आइए इस पूरी खबर और इसके गणित को आसान भाषा में समझते हैं।
टैक्स में कितनी हुई है कटौती?
सरकार द्वारा जारी नए फैसले के तहत तेल का निर्यात करने वाली रिफाइनरी कंपनियों को टैक्स में यह राहत प्रदान की गई है। पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली लेवी को 1.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर सीधा 0.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी पेट्रोल के एक्सपोर्ट टैक्स में 1 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।
वहीं, डीजल के निर्यात पर सरकार ने और भी बड़ी राहत दी है। डीजल निर्यात पर कुल शुल्क 25 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पहले इस टैक्स में 24 रुपये स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और 1 रुपये रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) शामिल था। नए नियमों के मुताबिक, सरकार ने 1 रुपये वाले RIC को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह 15 रुपये प्रति लीटर ही रहेगा। गौरतलब है कि सरकार हर 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा करती है और उसी के आधार पर इस टैक्स को घटाया या बढ़ाया जाता है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›क्या आम जनता को मिलेगा सस्ता पेट्रोल-डीजल?
अगर आपको लग रहा है कि सरकार के इस कदम से आपके शहर के पेट्रोल पंप पर फ्यूल सस्ता हो जाएगा, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस फैसले का आम आदमी की जेब या रोजमर्रा के पेट्रोल-डीजल के खर्च पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया है।
यह कटौती केवल रिलायंस जैसी उन ऑयल रिफाइनरी कंपनियों पर लागू होगी जो भारत से बाहर कच्चा तेल या रिफाइंड फ्यूल निर्यात करती हैं। इससे कंपनियों की एक्सपोर्ट लागत तो कम होगी और उनका मुनाफा बढ़ेगा, लेकिन देश के भीतर पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों में इससे कोई गिरावट नहीं आएगी।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स और यह क्यों लगता है?
आसान शब्दों में कहें तो जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अचानक आसमान छूने लगते हैं, तो तेल की रिफाइनिंग करने वाली कंपनियों को बिना किसी अतिरिक्त मेहनत या निवेश के बंपर मुनाफा (Windfall Profit) होने लगता है।
सरकार इस अप्रत्याशित और अचानक हुए भारी मुनाफे के एक हिस्से पर अतिरिक्त टैक्स वसूलती है, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'विंडफॉल टैक्स' कहा जाता है। इस टैक्स को लगाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनियां अधिक मुनाफे के लालच में सारा तेल विदेश न भेज दें। इससे देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहती है और घरेलू बाजार में फ्यूल की कोई कमी नहीं होती।