8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के साथ ही देशभर के केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों में बेहतर वेतनमान और सेवा शर्तों को लेकर नई उम्मीदें जग गई हैं। इसी क्रम में देश भर के केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नर्सों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन 'नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन' (NWA) ने शुक्रवार, 18 सितंबर को चंडीगढ़ में 8वें वेतन आयोग के उच्च अधिकारियों से मुलाकात की।

​अस्पतालों में दिन-रात मरीजों की देखभाल में जुटी रहने वाली नर्सों की कार्य स्थितियों, वेतन विसंगतियों और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संगठन ने आयोग के सामने 8 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि नर्सों की ये 8 प्रमुख मांगें क्या हैं और यदि इन्हें मान लिया जाता है, तो उनके जीवन और करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा:

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1. शुरुआती स्तर पर पे-मैट्रिक्स लेवल 10 (Level 10 Entry Pay)

नर्सिंग अधिकारियों के लिए मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) की तर्ज पर शुरुआती वेतन पे-मैट्रिक्स लेवल 10 करने की पुरजोर सिफारिश की गई है। नर्सेज एसोसिएशन का तर्क है कि अब नर्सिंग के क्षेत्र में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता GNM से बढ़कर B.Sc Nursing हो चुकी है। योग्यता और जिम्मेदारियों के बढ़ते दायरे को देखते हुए शुरुआती पे-स्केल में यह संशोधन बेहद जरूरी है।

2. विशेष नाइट शिफ्ट अलाउंस (Night Duty Allowance)

अस्पताल में रात-रात भर जागकर गंभीर मरीजों की सेवा करना बेहद थकाऊ और चुनौतीपूर्ण होता है। रात की ड्यूटी के कठिन परिश्रम को देखते हुए एसोसिएशन ने सभी नर्सिंग कर्मचारियों के लिए एक निश्चित नाइट ड्यूटी अलाउंस तय करने की मांग रखी है।

3. R1H1 मैट्रिक्स के तहत रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस

नर्सों को अस्पताल के बेहद जोखिम भरे और संक्रमण से भरे माहौल में लगातार काम करना पड़ता है। इसलिए संगठन ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि नर्सिंग स्टाफ को R1H1 मैट्रिक्स के तहत उच्चतम स्तर का रिस्क और हार्डशिप अलाउंस (Risk & Hardship Allowance) प्रदान किया जाए।

4. परिवार के लिए स्थायी इंश्योरेंस कवर

हर दिन विभिन्न गंभीर बीमारियों के सीधे संपर्क में आने के कारण नर्सों के स्वास्थ्य पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। संगठन ने कोविड-19 महामारी के दौरान मिले हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस की तर्ज पर ही अब स्थायी बीमा सुरक्षा की मांग उठाई है, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सके।

5. चंडीगढ़ (ट्राइसिटी) को A1 शहर का दर्जा

एसोसिएशन ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला को मिलाकर एक 'ट्राइसिटी' (Tricity) जोन घोषित करने और चंडीगढ़ को A1 (Tier 1) शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से स्थानीय स्तर पर कार्यरत नर्सों के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) में सीधा इजाफा होगा।

6. रूटीन भत्तों में सीधे 3 गुना (3x) बढ़ोतरी

वर्तमान में मिलने वाले नर्सिंग अलाउंस (Nursing Allowance), ड्रेस अलाउंस (Dress Allowance) और स्पेशल अलाउंस को न सिर्फ बनाए रखने का अनुरोध किया गया है, बल्कि बढ़ती महंगाई के मद्देनजर उनकी मौजूदा दरों को सीधे 3 गुना (Triple) करने की सिफारिश की गई है।

7. उच्च शिक्षा के लिए 'एडवांस क्वालिफिकेशन अलाउंस'

नर्सिंग स्टाफ को अपनी शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी कौशल को अपग्रेड करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 'एडवांस क्वालिफिकेशन अलाउंस' देने की मांग की गई है। इसके तहत उच्च शिक्षा (जैसे M.Sc Nursing या स्पेशलाइजेशन) प्राप्त करने पर दो नॉन-एब्जॉर्बेबल इंक्रीमेंट के बराबर वित्तीय लाभ का प्रावधान प्रस्तावित है।

8. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली

देश भर के अन्य केंद्रीय कर्मचारियों की भांति नर्सेज एसोसिएशन ने भी नई पेंशन योजनाओं (NPS/UPS) को निरस्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की जोरदार वकालत की है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के सुरक्षित सेवानिवृत्ति जीवन के लिए पुरानी पेंशन योजना ही एकमात्र विकल्प है।

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