फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बच्चों के खाने-पीने के प्रोडक्ट्स और उनके भ्रामक विज्ञापनों को लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) पर सख्त कार्रवाई की है। FSSAI ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि कंपनी के बेबी फूड्स में पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट्स) की भारी कमी और भ्रामक दावों के चलते तीन अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं। ई-कॉमर्स साइट्स पर बिकने वाले इन प्रोडक्ट्स की जांच में सामने आया है कि कंपनी बिक्री बढ़ाने के लिए नियमों को ताक पर रख रही थी।
इन 3 मुख्य प्रोडक्ट्स पर हुई कार्रवाई FSSAI की जांच के दायरे में नेस्ले इंडिया के तीन प्रमुख उत्पाद शामिल हैं। इनमें 'नान एक्सीला प्रो स्टेज 1', 'लैक्टोजेन प्रो 1' और 'फॉलो-अप फॉर्मूला' शामिल हैं। जांच के दौरान 'नान एक्सीला प्रो स्टेज 1' के पैकेट और विज्ञापनों पर 5 HMOs और वे (Whey) प्रोटीन जैसे दावों पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। इसके अलावा, 'लैक्टोजेन प्रो 1' के डिब्बे पर लिखे गए "आसानी से पचने योग्य वे प्रोटीन" वाले दावे को भी भ्रामक माना गया है। FSSAI का स्पष्ट कहना है कि इन दावों का इस्तेमाल केवल उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए एक लुभावने प्रचार के रूप में किया जा रहा था।
लैब टेस्ट में फेल, बायोटिन की पाई गई कमी दावों के अलावा प्रोडक्ट की क्वालिटी पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। FSSAI ने नेस्ले के 'फॉलो-अप फॉर्मूला' (बच्चों के दूध का पाउडर) के सैंपल की जब लैब में जांच कराई, तो उसमें बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाले 'बायोटिन' (विटामिन B7) की मात्रा तय सरकारी मानकों से काफी कम पाई गई। इस रिपोर्ट की पुष्टि के लिए सैंपल को एक स्वतंत्र और बड़ी रेफरल लैब में भी भेजा गया था, जहां दूसरी जांच में भी यह साफ हो गया कि प्रोडक्ट में बायोटिन की मात्रा मानकों के अनुरूप नहीं थी, जो कि खराब क्वालिटी का सीधा संकेत है।

कानून और सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन FSSAI की समीक्षा में पाया गया कि नेस्ले इंडिया ने दो प्रमुख कानूनों का सीधा उल्लंघन किया है। पहला, फूड सेफ्टी नियमावली 2020 के तहत बच्चों के उत्पादों को बेचने के लिए "सुपर न्यूट्रिशन" या "आसानी से पचता है" जैसे लुभावने दावे नहीं किए जा सकते। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण, भारत के इन्फैंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स (IMS) एक्ट 1992 के तहत 2 साल तक के बच्चों के दूध या बेबी फूड के किसी भी प्रकार के विज्ञापन या प्रचार पर पूरी तरह से पाबंदी है। इसका मुख्य उद्देश्य माताओं को स्तनपान के प्रति जागरूक रखना है। नेस्ले के इन विज्ञापनों ने इसी कानून की धारा 3 का उल्लंघन किया है।
फिलहाल जुर्माना नहीं, शुरू होगी अदालती कार्रवाई FSSAI के नोटिस के अनुसार, फिलहाल नेस्ले इंडिया पर कोई अंतिम जुर्माना या पेनाल्टी नहीं लगाई गई है। अभी केवल तीन केस दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत की गई है। अब यह पूरा मामला अदालत में जाएगा, जहां सुनवाई के बाद ही कंपनी पर जुर्माना या आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया की तरफ से इस पूरी कार्रवाई या दर्ज मामलों को लेकर अब तक सार्वजनिक तौर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह कार्रवाई अभिभावकों के लिए एक अलर्ट है कि वे बच्चों के उत्पाद चुनते समय दावों की सत्यता को जरूर परखें।