बेगमपुल मुख्य बाजार में जनता की सुविधा के लिए बनाया गया नया सार्वजनिक शौचालय उद्घाटन के दो दिन बाद भी लोगों के काम नहीं आ रहा है। 15 सितंबर को फीता काटकर जिस जनसुविधा परिसर को आम जनता को समर्पित किया गया था, वह अब भी ताले में बंद है। न सफाई कर्मचारी की व्यवस्था हुई और न ही लोगों को शौचालय की सुविधा मिल पा रही है। नतीजा यह है कि बेगमपुल जैसे शहर के प्रमुख बाजार में आने वाले लोगों और व्यापारियों को खुले में पेशाब करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जोर-शोर से हुआ उद्घाटन, दो दिन बाद ताला

नगर निगम ने बेगमपुल मुख्य बाजार में नवनिर्मित सार्वजनिक शौचालय का 15 सितंबर को उद्घाटन कराया था। कार्यक्रम भी पूरे जोर-शोर से हुआ। महापौर हरिकांत अहलूवालिया, कैंट विधायक अमित अग्रवाल, भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, स्थानीय वार्ड पार्षद अजय चंद्रा और पार्षद सुनीता प्रजापति समेत जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

अतिथियों ने फीता काटकर जनसुविधा परिसर को आम जनता के प्रयोग के लिए समर्पित किया। उस समय दावा था कि बाजार में आने वाले हजारों लोगों और व्यापारियों को इससे सुविधा मिलेगी। लेकिन उद्घाटन के दो दिन बाद जब लोग सुविधा लेने पहुंचे तो शौचालय पर ही ताला लटका मिला।

यानी जिस सुविधा को जनता को समर्पित करने के लिए बाकायदा उद्घाटन समारोह हुआ, वह जनता के इस्तेमाल के लिए खुल ही नहीं सकी।

उद्घाटन हुआ, लेकिन कर्मचारी की व्यवस्था करना भूल गए?

बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने बताया कि शौचालय के लिए अभी तक सफाई कर्मचारी की उपस्थिति या नियुक्ति नहीं हुई है। इसी वजह से उद्घाटन के दो दिन बाद भी आम जनता और व्यापारी इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि बेगमपुल शहर का बेहद व्यस्त बाजार है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और दूसरे कामों से आते हैं। ऐसे में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण निश्चित तौर पर जरूरी था, लेकिन सिर्फ भवन बनाकर और फीता काटकर जनसुविधा शुरू नहीं हो जाती। उसे खोलने और साफ रखने की व्यवस्था भी जरूरी है।

नया है, फिर भी फ्रंट का पत्थर टूट गया

मामला यहीं खत्म नहीं होता। व्यापारियों के मुताबिक, उद्घाटन के बाद ही शौचालय के फ्रंट में लगा पत्थर भी टूट गया। यानी जिस सुविधा का अभी आम जनता इस्तेमाल भी शुरू नहीं कर पाई, उसके निर्माण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

व्यापारियों ने सवाल उठाया कि अगर उद्घाटन के तुरंत बाद ही पत्थर टूट गया तो निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?

मंच पर सभी मौजूद थे, अब जनता ताले के सामने

सबसे बड़ा सवाल यह है कि उद्घाटन के समय महापौर से लेकर विधायक, महानगर अध्यक्ष और स्थानीय पार्षद तक सभी मौजूद थे। फीता काटकर सुविधा जनता को सौंप दी गई। लेकिन उद्घाटन के बाद इसे जनता के लिए खोलने और कर्मचारी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा, इस पर सवाल खड़ा हो गया है।

व्यापारियों का कहना है कि अगर सफाई कर्मचारी ही नहीं है तो शौचालय खुलने के बाद उसकी सफाई कौन करेगा? और अगर संचालन की व्यवस्था पहले से तय नहीं थी तो उद्घाटन इतनी जल्दी क्यों कराया गया?

जनता को अब फीते और फोटो की नहीं, खुले हुए शौचालय की जरूरत है।

‘स्वच्छ मेरठ, सुंदर मेरठ’ पर व्यापारियों का सवाल

पुनीत शर्मा ने नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शौचालय जनता के लिए बनाया गया है तो उसे नियमित रूप से खोलने और सफाई की व्यवस्था भी होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसी तरह स्वच्छ मेरठ और सुंदर मेरठ बनाया जाएगा?

बेगमपुल व्यापार संघ का कहना है कि नगर निगम को तत्काल सफाई कर्मचारी की व्यवस्था कर शौचालय को आम जनता के लिए खोलना चाहिए। साथ ही टूटे हुए फ्रंट के पत्थर की भी मरम्मत कराई जानी चाहिए।

उद्घाटन के समय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने भले ही नई सुविधा की तस्वीर को पूरा कर दिया हो, लेकिन दो दिन बाद ताले में बंद शौचालय और बाहर खुले में पेशाब करते लोग अब उस उद्घाटन की पूरी तस्वीर पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन