भारत में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं के लिए अनचाही स्पैम कॉल्स और धोखाधड़ी वाले संदेश एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। दिन-रात आने वाली इन कॉल्स से न केवल लोगों का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि साइबर ठगी के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने अनचाहे स्पैम और रोबोकॉल पर लगाम लगाने के लिए एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाया है। शुक्रवार को ट्राई ने नई गाइडलाइंस जारी करते हुए नियमों को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। अब संदिग्ध नंबरों और रोबोकॉल्स की निगरानी के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक की मदद ली जाएगी। इन नए नियमों के लागू होने से आम उपभोक्ताओं को अनचाहे मानसिक तनाव से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का होगा इस्तेमाल TRAI स्पैम कॉल नियम के तहत अब टेलीकॉम कंपनियों (जैसे जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, बीएसएनएल) को अपने नेटवर्क पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैनात करना होगा। यह सिस्टम कॉल के पैटर्न को समझेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सामान्य 10 अंकों वाले व्यक्तिगत नंबर से प्रतिदिन हजारों आउटगोइंग कॉल्स की जा रही हैं और उस पर इनकमिंग कॉल्स की संख्या न के बराबर है, तो AI सिस्टम तुरंत उस नंबर को संदिग्ध स्पैम की श्रेणी में डाल देगा। इस तकनीक के जरिए उन टेलीमार्केटर्स पर नकेल कसी जा सकेगी जो कमर्शियल नंबरों के बजाय निजी नंबरों का उपयोग करके ग्राहकों को परेशान करते हैं और नियमों को चकमा देते हैं।
शिकायतों पर तुरंत होगी सख्त कार्रवाई नए दिशा-निर्देशों में शिकायतों के निवारण और संदिग्ध नंबरों पर कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट और सख्त समयसीमा तय की गई है। यदि किसी एक विशिष्ट नंबर के खिलाफ 10 दिनों के भीतर 3 या उससे अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं, और उसी समय टेलीकॉम कंपनी का AI सिस्टम भी उस नंबर के कॉलिंग पैटर्न को संदिग्ध मानता है, तो उस पर तुरंत दंडात्मक एक्शन लिया जाएगा। यह त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी कि स्पैमर्स लंबे समय तक उपभोक्ताओं को परेशान न कर सकें। यह कदम भारत में संचार व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
री-केवाईसी (Re-KYC) और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) स्पैमर्स अक्सर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड प्राप्त कर लेते हैं। इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए TRAI ने भौतिक सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है। यदि 10 दिनों की अवधि के भीतर किसी एक टेलीमार्केटर या व्यक्ति से जुड़े 5 या उससे अधिक संदिग्ध नंबर पाए जाते हैं, तो उस उपयोगकर्ता के सभी कनेक्शनों का री-केवाईसी (Re-KYC) करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, दूरसंचार कंपनी के प्रतिनिधियों को उस पते का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) भी करना होगा जिस पते पर वह सिम कार्ड जारी किया गया है। यदि सत्यापन के दौरान कोई भी विसंगति पाई जाती है, तो कनेक्शन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।
रोबोकॉल्स और A2P कॉल्स पर लगाम, लगेगा भारी जुर्माना टेलीमार्केटिंग उद्योग में आजकल सॉफ्टवेयर या ऑटो-डायलिंग मशीन के जरिए कॉल्स करने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसे एप्लीकेशन-टू-पर्सन (A2P) और रोबोकॉल्स कहा जाता है। TRAI स्पैम कॉल नियम के अनुसार, अब ऐसी कॉल्स पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। टेलीकॉम कंपनियों को अपने नेटवर्क पर उत्पन्न होने वाली ऐसी किसी भी कमर्शियल कॉल या रोबोकॉल के बारे में पहले से स्पष्ट घोषणा (Declaration) करनी होगी।
अगर कोई एंटिटी बिना पूर्व सूचना या घोषणा के ऐसी रोबोकॉल्स या सॉफ्टवेयर-जनरेटेड कॉल्स करती हुई पाई जाती है, तो उसे अवैध स्पैम माना जाएगा। इस तरह के उल्लंघन पर TRAI ने भारी जुर्माने का प्रावधान किया है। बिना घोषणा वाली ऐसी कॉल्स पर 5 पैसे प्रति मिनट तक का 'टर्मिनेशन शुल्क' (Termination Charge) लगाया जाएगा। यह आर्थिक दंड टेलीमार्केटर्स को हतोत्साहित करने के लिए एक मजबूत हथियार साबित होगा।
ब्लैकलिस्टिंग और कनेक्शन काटने का प्रावधान नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए TRAI ने किसी भी प्रकार की रियायत न देने का मन बना लिया है। यदि कोई टेलीमार्केटर या व्यक्ति बार-बार चेतावनी और जुर्माने के बावजूद अनचाही कॉल्स करना जारी रखता है, तो दूरसंचार सेवा प्रदाता (Telecom Operator) उसका कनेक्शन पूरी तरह से काट देंगे। इतना ही नहीं, नियमों का गंभीर उल्लंघन करने वाले ऐसे टेलीमार्केटर्स को पूरे 1 साल के लिए 'ब्लैकलिस्ट' (Blacklist) कर दिया जाएगा। एक बार ब्लैकलिस्ट होने के बाद वह व्यक्ति या कंपनी देश के किसी भी टेलीकॉम ऑपरेटर से नया कमर्शियल कनेक्शन प्राप्त नहीं कर सकेगी।
1600, 1601 और 140 सीरीज के नंबरों की सुरक्षा TRAI ने इस बात का भी विशेष ध्यान रखा है कि स्पैम को रोकने के प्रयास में उपभोक्ताओं के जरूरी और महत्वपूर्ण कमर्शियल कॉल्स बाधित न हों। बैंक ट्रांजैक्शन, वन-टाइम पासवर्ड (OTP), टिकट बुकिंग कंफर्मेशन और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए 1600, 1601 और 140 सीरीज के नंबरों का उपयोग किया जाता है।
नए नियमों के अनुसार, कॉल मैनेजमेंट ऐप्स (जैसे ट्रूकॉलर या अन्य स्पैम फिल्टर ऐप्स) इन महत्वपूर्ण नंबर सीरीज को सीधे तौर पर अपने स्तर से ब्लॉक नहीं कर सकेंगे। हालांकि, उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर अपने डिवाइस में इन नंबरों को खुद फिल्टर या ब्लॉक कर सकते हैं। यह नियम सुनिश्चित करेगा कि महत्वपूर्ण बैंकिंग या आपातकालीन सेवा कॉल्स सिस्टम की गलती से ब्लॉक न हों।
उपभोक्ता अधिकार: 7 दिन का नियम और अपील का अधिकार व्यापारिक कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच संवाद को सुव्यवस्थित करने के लिए एक नया 7-दिवसीय नियम पेश किया गया है। यदि कोई ग्राहक स्वयं किसी उत्पाद (Product) या सेवा (Service) के बारे में किसी कंपनी से पूछताछ (Inquiry) करता है, तो कंपनी उस ग्राहक से केवल अधिकतम 7 दिन तक ही फॉलो-अप संपर्क कर सकेगी। इसके बाद बिना ग्राहक की सहमति के कॉल करना स्पैम माना जाएगा। कंपनियों के लिए इस संवाद का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध हों।
इसके साथ ही, यदि उपभोक्ता अपनी स्पैम शिकायत पर की गई कार्रवाई या समाधान से असंतुष्ट है, तो उसे 15 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।
दूरसंचार व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करने की पहल डिजिटल इंडिया के इस युग में मोबाइल फोन आवश्यक सेवा बन चुका है। लेकिन साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी (Financial Frauds) के बढ़ते मामलों ने दूरसंचार व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को कमजोर किया था। कई बार लोग अनजाने नंबरों से आने वाले जरूरी कॉल्स को भी स्पैम समझकर नहीं उठाते थे। TRAI का कहना है कि इन सख्त कदमों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना, उन्हें दिन-प्रतिदिन के अनचाहे मानसिक तनाव से बचाना और देश की दूरसंचार व्यवस्था पर लोगों का विश्वास फिर से कायम करना है। AI और ML का यह एकीकरण भारत को स्पैम-मुक्त संचार नेटवर्क बनाने की दिशा में एक वैश्विक मानक स्थापित कर सकता है।